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इन्श्योरेंस सेक्टर में विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी होगी 74 फीसदी, जानें आम आदमी को क्या मिलेगा इसका फायदा
बिजनेस डेस्क। 1 फरवरी, सोमवार को वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने वित्त वर्ष 2021-22 का आम बजट पेश किया। इस बजट में इन्श्योरेंस सेक्टर में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा बड़ा कर 74 फीसदी कर दी गई है। यह अभी तक 49 फीसदी थी। जाहिर है, इससे इन्श्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश बढ़ेगा और कस्टमर्स को बीमा के क्षेत्र में कई तरह के अलग-अलग ऑप्शन मिलेंगे। इसके साथ ही आम लोगों में भी इन्श्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, जो अभी काफी कम है। यह फैसला सरकार ने इसलिए लिया है, ताकि देश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़े और अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार हो। (फाइल फोटो)
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बीमा के क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की लिमिट बढ़ने से जनरल और लाइफ इन्श्योरेंस कंपनियों को फायदा होगा। विदेशी कंपनियां भारतीय इन्श्योरेंस कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकेंगी। यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कंपनियों के वैल्यूएशन के आधार पर किया जाएगा। (फाइल फोटो)
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बीमा के क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने से आम कस्टमर को बीमा के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। उन्हें जनरल बीमा और लाइफ इन्श्योरेंस के साथ ही हेल्थ इन्श्योरेंस में निवेश का मौका मिलेगा। इससे कस्टमर्स को बीमा योजनाओं में ज्यादा रिटर्न हासिल हो सकता है। फिलहाल, ज्यादातर जीवन बीमा में रिस्क कवर किया जाता है। इस क्षेत्र में इससे कॉम्पिटीशन भी बढ़ेगा, जिसका फायदा आम लोगों को हो सकता है। (फाइल फोटो)
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इन्श्योरेंस सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ने से कंपनियों के पास ज्यादा पैसा आएगा। इससे वे भी निवेश बढ़ाएंगी और अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी। बीमा कंपनियां अपने ज्यादा ऑफिस दूर-दराज के क्षेत्रों में खोलेंगी। इससे गांवों और छोटे शहरों के लोगों की भी बीमा कंपनियों तक पहुंच आसानी से हो सकेगी और उनमें बीमा को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी। (फाइल फोटो)
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बीमा सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ने से सरकार को ज्यादा टैक्स मिलेगा। इससे सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी पर सरकार को अच्छा वैल्यूएशन मिल सकता है। बता दें कि सरकार जनरल इन्श्योरेंस (GI)और लाइफ इन्श्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) में हिस्सेदारी बेचना चाहती है। (फाइल फोटो)
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विदेशी निवेश बढ़ने से कंपनियां देश में अपनी पहुंच का विस्तार कर पाने में सक्षम होंगी। अभी आम लोगों तक बीमा कंपनियों की पहुंच कम है। देश के बैंकिंग सेक्टर में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा 74 फीसदी है। बीमा कंपनियों को भी इससे अलग नहीं रखा जा सकता है। माना जा रहा है कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा बढ़ाए जाने से 20 हजार करोड़ रुपए की विदेशी पूंजी बीमा सेक्टर में आ सकती है। (फाइल फोटो)
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सरकार ने बीमा सेक्टर में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा बढ़ाने के साथ ही यह शर्त रखी है कि भले ही विदेशी कंपनी का निवेश 74 फीसदी हो, लेकिन कंपनी का मैनेजमेंट और बोर्ड भारतीय लोगों के पास ही होगा। जिन भारतीय कंपनियों ने पहले से ही विदेशी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रखी है, उनके लिए यह आसान है। वहीं, दूसरी कंपनियों को भी ऐसा करना होगा। बता दें कि भारत में बीमा के प्रति जागरूकता सिर्फ 3.7 फीसदी है। जहां तक दूसरे देशों का सवाल है, चीन में 1 जनवरी 2020 से ही बीमा के क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी मिली हुई है। (फाइल फोटो)
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