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Tiktok India बेचेगी अपने एसेट्स, जानें ByteDance किस भारतीय कंपनी से कर रही है बातचीत

First Published Feb 13, 2021, 9:03 PM IST
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बिजनेस डेस्क। टिकटॉक (TikTok) पर भारत सरकार ने स्थाई तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस (ByteDance) ने टिकटॉक के भारतीय कारोबार को बेचने के लिए कुछ कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी है। बाइटडांस टिकटॉक इंडिया के एसेट्स बेचना चाहती है। इसके लिए वह प्रतिद्वंद्वी कंपनी ग्लेंस (Glance) से बातचीत कर रही है। इसके अलावा वह जापान के सॉफ्टबैंक ग्रुप (SoftBank Group) के साथ भी बातचीत चला रही है। बता दें कि सॉफ्टबैंक की ग्लेंस की पेरेंट कंपनी InMobi और टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस में हिस्सेदारी है। (फाइल फोटो)

टिकटॉक इंडिया के एसेट्स के सौदे को लेकर सॉफ्टबैंक, बाइटडांस और ग्लेंस के बीच बातचीत चल रही है। वहीं, सॉफ्टबैंक और बाइटडांस ने इस मामले को लेकर भेजे गए ई-मेल का जवाब नहीं दिया है। ग्लेंस के स्पोक्सपर्सन ने भी इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। (फाइल फोटो)

टिकटॉक इंडिया के एसेट्स के सौदे को लेकर सॉफ्टबैंक, बाइटडांस और ग्लेंस के बीच बातचीत चल रही है। वहीं, सॉफ्टबैंक और बाइटडांस ने इस मामले को लेकर भेजे गए ई-मेल का जवाब नहीं दिया है। ग्लेंस के स्पोक्सपर्सन ने भी इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। (फाइल फोटो)

सॉफ्टबैंक, बाइटडांस और ग्लेंस के बीच इस सौदे को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, अगर सौदे पर अंतिम मुहर लगती है तो इसे भारतीय अथॉरिटी से भी अप्रूवल लेना होगा। भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद बढ़ने के बाद सैकड़ों चाइनीज ऐप्स पर पाबंदी लगा दी थी। इनमें टिकटॉक प्रमुख था। बता दें कि चीन का यह शॉर्ट वीडियो मेकिंग ऐप भारत में काफी पॉपुलर था। (फाइल फोटो)

सॉफ्टबैंक, बाइटडांस और ग्लेंस के बीच इस सौदे को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, अगर सौदे पर अंतिम मुहर लगती है तो इसे भारतीय अथॉरिटी से भी अप्रूवल लेना होगा। भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद बढ़ने के बाद सैकड़ों चाइनीज ऐप्स पर पाबंदी लगा दी थी। इनमें टिकटॉक प्रमुख था। बता दें कि चीन का यह शॉर्ट वीडियो मेकिंग ऐप भारत में काफी पॉपुलर था। (फाइल फोटो)

अब सॉफ्टबैंक टिकटॉक इंडिया के एसेट्स को खरीद सकता है। इसके लिए वह किसी स्थानीय पार्टनर की तलाश में भी है। इस मामले के जानकारों के मुताबिक, अगर बातचीत जारी रहती है तो भारत सरकार टिकटॉक को भारतीय यूजर्स का डेटा और टेक्नोलॉजी भारतीय सीमा में ही रखने का आदेश दे सकती है। (फाइल फोटो)

अब सॉफ्टबैंक टिकटॉक इंडिया के एसेट्स को खरीद सकता है। इसके लिए वह किसी स्थानीय पार्टनर की तलाश में भी है। इस मामले के जानकारों के मुताबिक, अगर बातचीत जारी रहती है तो भारत सरकार टिकटॉक को भारतीय यूजर्स का डेटा और टेक्नोलॉजी भारतीय सीमा में ही रखने का आदेश दे सकती है। (फाइल फोटो)

बता दें कि भारत और चीन के बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसी हालत में भारत चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारत में आने की इजाजत नहीं देगा। इसके साथ ही तकनीक के निर्यात को लेकर चीन के नए नियमों के कारण भी इस सौदे में दिक्कत आ सकती है। टिकटॉक की बिक्री को लेकर बाइटडांस को चीन की अथॉरिटी से भी मंजूरी लेनी होगी। (फाइल फोटो)

बता दें कि भारत और चीन के बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसी हालत में भारत चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारत में आने की इजाजत नहीं देगा। इसके साथ ही तकनीक के निर्यात को लेकर चीन के नए नियमों के कारण भी इस सौदे में दिक्कत आ सकती है। टिकटॉक की बिक्री को लेकर बाइटडांस को चीन की अथॉरिटी से भी मंजूरी लेनी होगी। (फाइल फोटो)

टिकटॉक ऐप के भारत में 20 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स थे। साल 2020 में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के दौरान भारत सरकार ने टिकटॉक सहित कई चाइनीज ऐप्स को बैन करने का फैसला किया था। टिकटॉक के सबसे ज्यादा यूजर्स भारत में थे। जब भारत सरकार ने टिकटॉक पर स्थाई पाबंदी लगाने की घोषणा कर दी, तो जनवरी 2021 में  बाइटडांस ने अपने भारतीय कारोबार को बंद करने का फैसला किया। कंपनी ने सैकड़ों लोगो को नौकरी से हटा दिया। (फाइल फोटो)

टिकटॉक ऐप के भारत में 20 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स थे। साल 2020 में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के दौरान भारत सरकार ने टिकटॉक सहित कई चाइनीज ऐप्स को बैन करने का फैसला किया था। टिकटॉक के सबसे ज्यादा यूजर्स भारत में थे। जब भारत सरकार ने टिकटॉक पर स्थाई पाबंदी लगाने की घोषणा कर दी, तो जनवरी 2021 में बाइटडांस ने अपने भारतीय कारोबार को बंद करने का फैसला किया। कंपनी ने सैकड़ों लोगो को नौकरी से हटा दिया। (फाइल फोटो)

ग्लेंस डिजिटल एक्सपीरियंस एक मोबाइल कंटेंट प्लेटफॉर्म है। इसे हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ाई कर चुके नवीन तिवारी ने शुरू किया है। वे इनमोबी (InMobi) के फाउंडर हैं, जो देश का पहला यूनिकॉर्न है। टिकटॉक पर बैन लगने के बाद ग्लेंस का 20 महीने पुराना शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म Roposo काफी तेजी से पॉपुलर हुआ है। (फाइल फोटो)

ग्लेंस डिजिटल एक्सपीरियंस एक मोबाइल कंटेंट प्लेटफॉर्म है। इसे हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ाई कर चुके नवीन तिवारी ने शुरू किया है। वे इनमोबी (InMobi) के फाउंडर हैं, जो देश का पहला यूनिकॉर्न है। टिकटॉक पर बैन लगने के बाद ग्लेंस का 20 महीने पुराना शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म Roposo काफी तेजी से पॉपुलर हुआ है। (फाइल फोटो)

दिसंबर, 2020  में गूगल (Google) और अरबपति पीटर थील (Peter Thiel) से फंडिंग मिलने के बाद इनमोबी (InMobi) यूनिकॉर्न बन गया। यूनिकॉर्न ऐसे स्टार्टअप को कहते हैं, जिसका वैल्यूएशन 100 करोड़ डॉलर से ज्यादा हो। बता दें कि टिकटॉक पर बैन लगने के बाद भारत में दर्जनों शॉर्ट वीडियो ऐप शुरू हुए, जिनमें कई काफी पॉपुलर हुए हैं। (फाइल फोटो)

दिसंबर, 2020 में गूगल (Google) और अरबपति पीटर थील (Peter Thiel) से फंडिंग मिलने के बाद इनमोबी (InMobi) यूनिकॉर्न बन गया। यूनिकॉर्न ऐसे स्टार्टअप को कहते हैं, जिसका वैल्यूएशन 100 करोड़ डॉलर से ज्यादा हो। बता दें कि टिकटॉक पर बैन लगने के बाद भारत में दर्जनों शॉर्ट वीडियो ऐप शुरू हुए, जिनमें कई काफी पॉपुलर हुए हैं। (फाइल फोटो)

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