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LIC: जानें कितने तरह की होती है लाइफ इन्श्योरेंस पॉलिसी, सुरक्षा के साथ मिलता है अच्छा मुनाफा
बिजनेस डेस्क। लाइफ इन्श्योरेंस (Life Insurance) की पॉलिसी लेना हर किसी के लिए जरूरी है। लाइफ इन्श्योरेंस की कई तरह की पॉलिसी होती हैं। यह लोगों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाई जाती हैं। लाइफ इन्श्योरेंस की पॉलिसी लेने से किसी आपदा की स्थिति में अगर व्यक्ति की असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो परिवार के लोगों को फाइनेंशियल सिक्युरिटी मिलती है। इसके अलावा पॉलिसी मेच्योर होने पर अच्छा-खासा रिटर्न भी मिलता है। लाइफ इन्श्योरेंस की कुछ पॉलिसी ऐसी भी है, जिसमें सिर्फ लाइफ कवरेज यानी सिक्युरिटी ही मिलती है और रिटर्न नहीं मिलता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि लाइफ इन्श्योरेंस की कितने तरह की पॉलिसी होती है, ताकि आप अपनी जरूरत के हिसाब से पॉलिसी का चुनाव कर सकें। जानें इनके बारे में।(फाइल फोटो)
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टर्म इन्श्योरेंस प्लान लाइफ इन्श्योरेंस का टर्म प्लान (Term Plan) एक निश्चित समय के लिए खरीदा जा सकता है। यह 10, 20 या 30 साल के लिए होता है। इस प्लान के तहत चुने गए एक टेन्योर यानी अवधि के लिए कवरेज मिलता है। ऐसी लाइफ इन्श्योरेंस पॉलिसी में मेच्योरिटी बेनिफिट नहीं मिलता। इस प्लान में सेविंग्स और प्रॉफिट कम्पोनेंट के बिना लाइफ कवर मिलता है। यह प्लान दूसरी पॉलिसी की तुलना में सस्ता होता है। टर्म इन्श्योरेंस में पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर एश्योर्ड सम यानी एक तय रकम बेनिफिशियरी को दी जाती है। (फाइल फोटो)
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एंडोमेंट पॉलिसी लाइफ इन्श्योरेंस की एंडोमेंट पॉलिसी (Endowment policy) में बीमा और निवेश, दोनों होते हैं। इस पॉलिसी में एक तय अवधि के लिए रिस्क कवर होता है और उस अवधि के खत्म होने के बाद बोनस के साथ एश्योर्ड सम पॉलिसीधारक को वापस मिल जाता है। पॉलिसीधारक की मौत होने या निर्धारित सालों के बाद एंडोमेंट पॉलिसी के तहत पॉलिसी अमाउंट की फेस वैल्यू का भुगतान किया जाता है। कुछ कंपनियां गंभीर बीमारी होने पर भी भुगतान करती हैं। (फाइल फोटो)
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मनीबैक इन्श्योरेंस पॉलिसी लाइफ इन्श्योरेंस की मनीबैक (Money Back) पॉलिसी भी एक तरह की एंडोमेंट पॉलिसी ही है। इस पॉलिसी में भी निवेश और बीमा, दोनों ही होत है। इनमें फर्क सिर्फ इतना ही है कि इस लाइफ इन्श्योरेंस पॉलिसी में बोनस के साथ एश्योर्ड सम पॉलिसी टर्म के दौरान ही किस्तों में वापस किया जाता है। आखिरी किस्त पॉलिसी खत्म होने पर मिलती है। अगर पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है तो पूरा एश्योर्ड सम बेनिफिशियरी को मिलता है। हालांकि, इस पॉलिसी का प्रीमियम सबसे ज्यादा होता है। (फाइल फोटो)
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आजीवन लाइफ इन्श्योरेंस आजीवन लाइफ इन्श्योरेंस प्लान (Whole Life Insurance Plan) में आपको जीवनभर प्रोटेक्शन मिलता है। इस पॉलिसी का कोई टर्म नहीं होता। इस प्लान में पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को बीमा का क्लेम मिल जाता है। वहीं, इस लाइफ इन्श्योरेंस पॉलिसी में उम्र की एक मैक्सिमम लिमिट होती है। यह आमतौर पर 65-70 साल होती है। इसके बाद मौत होने पर नॉमिनी डेथ क्लेम नहीं ले सकता, लेकिन आजीवन लाइफ इन्श्योरेंस के तहत पॉलिसीधारक की मौत 95 साल की उम्र में ही क्यों न हुई हो, नॉमिनी क्लेम कर सकता है। इस पॉलिसी का प्रीमियम काफी ज्यादा रहता है। इस पॉलिसी के तहत पॉलिसीधारक के पास इन्श्योर्ड सम को आंशिक रूप से विदड्रॉ करने का ऑप्शन होता है। इसके अलावा, वह पॉलिसी के एवज में पैसा लोन के तौर पर भी ले सकता है। (फाइल फोटो)
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यूलिप लाइफ इन्श्योरेंस के इस प्लान को यूलिप (Unit-linked Insurance Plan) कहा जाता है। इसमें भी प्रोटेक्शन के साथ निवेश पर रिटर्न मिलता है। एंडोमेंट इन्श्योरेंस पॉलिसी और मनीबैक पॉलिसी में मिलने वाला रिटर्न जहां एक हद तक पक्का होता है, वहीं यूलिप में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है। इसकी वजह यह है कि यूलिप में निवेश वाले हिस्से को बॉन्ड और शेयर में लगाया जाता है और म्यूचुअल फंड की तरह यूनिट मिलती है। ऐसे में, रिटर्न मार्केट के उतार-चढ़ाव पर आधारित होता है। हालांकि, इसमें तय किया जा सकता है कि कितना पैसा शेयर में लगे और कितना पैसा बॉन्ड में लगे। (फाइल फोटो)
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रिटायरमेंट प्लान लाइफ इन्श्योरेंस के रिटायरमेंट प्लान (Retirement Plan) में लाइफ कवर नहीं मिलता है। यह एक रिटायरमेंट सॉल्यूशन प्लान है। इसके तहत एक रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। तय की गई एक अवधि के बाद इसमें पॉलिसीधारक और बाद में बाद बेनिफिशियरी को पेंशन के तौर पर एक निश्चित रकम का भुगतान किया जाता है। यह भुगतान मासिक, छमाही या सालाना आधार पर किया जाता है। (फाइल फोटो)
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चाइल्ड इन्श्योरेंस पॉलिसी (Child Insurance Policy) के प्लान बच्चों की शिक्षा के खर्च और दूसरी जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं। चाइल्ड प्लान में पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद एकमुश्त रकम का भुगतान किया जाता है, लेकिन पॉलिसी खत्म नहीं होती है। पॉलिसीधारक की मृत्य होने के बाद आगे के सारे प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं और इन्श्योरेंस कंपनी पॉलिसीधारक की ओर से निवेश जारी रखती है। इसके साथ ही, बच्चे को एक निश्चित अवधि तक पैसा मिलता है। (फाइल फोटो)
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