इस फूल की खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान, लाखों की कमाई से यूं बदल रही लाइफ
नई दिल्ली: आर्किड फूल के उत्पादन से पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के किसानों की आय में पर्याप्त इजाफा हुआ है। आने वाले वर्षो में क्षेत्र के दूसरे राज्यों के किसान भी इस फूल का उत्पादन कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान, ग्रेटर नोएडा ने इस काम में अहम भूमिका निभाई है।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से निजी संस्थान, बागवानी प्रौद्योगिकी संस्थान, ग्रेटर नोएडा ने मणिपुर में इस परियोजना को सफलता के साथ अंजाम देकर आने वाले दिनों में किसानों की आय बढ़ाने का नया रास्ता खोला है।
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संस्थान के निदेशक डा. उमेश कोहली ने मीडिया को बताया, ''आर्किड, थाइलैंड का राष्ट्रीय फूल है। थाइलैंड इस फूल के करोड़ों डॉलर के वैश्विक बाजार का सबसे बड़ा निर्यातक है। इसका एक- एक पत्ता बिकता है इसलिए किसानों के लिए यह लाभकारी व्यवसाय है। इस फूल से माला बनाने के अलावा विभिन्न सजावट में इसका उपयोग किया जा सकता है।''
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विगत 10 वर्षो से कार्यरत इस संस्थान की भविष्य में पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों नगालैंड, सिक्किम और असम में भी किसानों को इस फूल की खेती के बारे में प्रशिक्षण देने और परियोजना को अमली जामा पहनाने की योजना है।
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कोहली ने बताया, ''आर्किड फूल के पौधों की आयु बाकी फूल के पौधों से 15 गुना ज्यादा है और उत्पादन की लागत कम है। मणिपुर में संस्थान ने इस परियोजना को सफलतापूर्वक दो वर्षो में अंजाम दिया। किसानों ने 80 वर्गमीटर खेत में इस फूल की खेती से औसतन 11,980 रुपये की कमाई की। संस्थान (आईएचटी) ने किसानों को फूल की 100 फीसदी खरीद की सुविधा भी दी ताकि इन फूलों का समुचित विपणन हो सके।''
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कोहली ने बताया कि परियोजना के तहत किसानों को उनके खेत पर पौधों की देखरेख, उनके खाद और पानी की आवश्यकता के बारे में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्किड के छोटे पौधों की देखरेख लगभग एक तरह से की जाती है लेकिन इन पौधों के बड़े होने पर हर पेड़ की देखरेख भिन्न-भिन्न तरीके से करनी होती है, उन पौधों की खाद पानी के खुराक की आवश्यकता भी अलग अलग होती है।
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