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अगले महीने से बदल जाएंगे बैंकों के पैसे के लेन-देन से जुड़े ये नियम, जानें क्या होगा फायदा

First Published Nov 21, 2020, 10:35 AM IST
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बिजनेस डेस्क। इस वर्ष के अंतिम महीने से बैंकों में पैसे के लेन-देन से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) चौबीसों घंटे और साल के हर दिन (24x7x365) सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का यह फैसला दिसंबर, 2020 से लागू होगा। इससे बैंकों के कस्टमर्स को कभी भी रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के जरिए मनी ट्रांसफर (Money Transfer) कर सकेंगे। 
(फाइल फोटो)
 

फिलहाल क्या है व्यवस्था
फिलहाल, मनी ट्रांसफर की यह व्यवस्था (RTGS) महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़ कर हफ्ते के सभी कामकाजी दिनों में उपलब्ध है। इस सुविधा का फायदा कस्टमर्स अभी सुबह 7 बजे से शाम बजे तक ले पाते हैं। 
(फाइल फोटो)
 

फिलहाल क्या है व्यवस्था
फिलहाल, मनी ट्रांसफर की यह व्यवस्था (RTGS) महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़ कर हफ्ते के सभी कामकाजी दिनों में उपलब्ध है। इस सुविधा का फायदा कस्टमर्स अभी सुबह 7 बजे से शाम बजे तक ले पाते हैं। 
(फाइल फोटो)
 

पिछले साल से NEFT है 24 घंटे उपलब्ध 
इससे पहले पिछले साल दिसंबर में नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) सिस्टम को चौबीसों घंटे और साल के हर दिन (24x7x365) उपलब्ध कराया गया था। रिजर्व बैंक ने कहा कि लागू किए जाने के बाद से यह सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर रहा है।
(फाइल फोटो)

पिछले साल से NEFT है 24 घंटे उपलब्ध 
इससे पहले पिछले साल दिसंबर में नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) सिस्टम को चौबीसों घंटे और साल के हर दिन (24x7x365) उपलब्ध कराया गया था। रिजर्व बैंक ने कहा कि लागू किए जाने के बाद से यह सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर रहा है।
(फाइल फोटो)

क्या कहा रिजर्व बैंक ने
रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि भारतीय वित्तीय बाजारों (Indian Financial Markets) के दुनिया के वित्तीय बाजारों से  जुड़ाव के लिए चल रहे कामों को के तहत और भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों (International Financial Centres) को विकसित करने की कोशिशों के तहत इस नए सिस्टम को शुरू किया जा रहा है। 
(फाइल फोटो)
 

क्या कहा रिजर्व बैंक ने
रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि भारतीय वित्तीय बाजारों (Indian Financial Markets) के दुनिया के वित्तीय बाजारों से  जुड़ाव के लिए चल रहे कामों को के तहत और भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों (International Financial Centres) को विकसित करने की कोशिशों के तहत इस नए सिस्टम को शुरू किया जा रहा है। 
(फाइल फोटो)
 

बढ़ेगी पेमेंट की फ्लेक्सिबिलिटी 
रिुजर्व बैंक ऑफ इंडिया  (RBI) ने कहा कि इस फैसले से भारतीय कॉरपोरेट (Indian Corporate) और  वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) को बड़े पैमाने पर पेमेंट की फ्लैक्सिबिलिटी की सुविधा मिलेगी। इससे वे ज्यादा बेहतर तरीके से ट्रांजैक्शन कर सकेंगे और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी। 
(फाइल फोटो)
 

बढ़ेगी पेमेंट की फ्लेक्सिबिलिटी 
रिुजर्व बैंक ऑफ इंडिया  (RBI) ने कहा कि इस फैसले से भारतीय कॉरपोरेट (Indian Corporate) और  वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) को बड़े पैमाने पर पेमेंट की फ्लैक्सिबिलिटी की सुविधा मिलेगी। इससे वे ज्यादा बेहतर तरीके से ट्रांजैक्शन कर सकेंगे और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी। 
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क्या है आरजीटीएस (RTGS) 
रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) बहुत ही काम की सुविधा है। इसके जरिए तुरंत फंड ट्रांसफर किया जा सकता है। यह बड़े ट्रांजैक्शन्स में काम आता है।  आरजीटीएस (RTGS) के जरिए 2 लाख रुपए से कम अमाउंट ट्रांसफर नहीं हो सकता है। इसके जरिए ऑनलाइन और बैंक ब्रांच, दोनों तरीके से ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। इसमें ऑनलाइन किसी भी तरह का फंड ट्रांसफर करने पर चार्ज नहीं लगता हैं, लेकिन बैंक ब्रांच में आरजीटीएस  RTGS से फंड ट्रांसफर कराने पर चार्ज देना होता है।
(फाइल फोटो)
 

क्या है आरजीटीएस (RTGS) 
रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) बहुत ही काम की सुविधा है। इसके जरिए तुरंत फंड ट्रांसफर किया जा सकता है। यह बड़े ट्रांजैक्शन्स में काम आता है।  आरजीटीएस (RTGS) के जरिए 2 लाख रुपए से कम अमाउंट ट्रांसफर नहीं हो सकता है। इसके जरिए ऑनलाइन और बैंक ब्रांच, दोनों तरीके से ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। इसमें ऑनलाइन किसी भी तरह का फंड ट्रांसफर करने पर चार्ज नहीं लगता हैं, लेकिन बैंक ब्रांच में आरजीटीएस  RTGS से फंड ट्रांसफर कराने पर चार्ज देना होता है।
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क्या है NEFT
नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) एक इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड है। इसमें एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसों का लेन-देन किया जाता है। इंटरनेट बैंकिंग के जरिए इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा, बैंक के ब्रांच में जाकर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। NEFT के जरिए कुछ ही समय में फंड ट्रांसफर हो जाता है। इसमें ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए कोई  एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना पड़ता है। लेकिन ब्रांच से NEFT कराने के लिए शुल्क देना होता है। यह सुविधा हमेशा चालू रहती है।
(फाइल फोटो)
 

क्या है NEFT
नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) एक इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड है। इसमें एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में पैसों का लेन-देन किया जाता है। इंटरनेट बैंकिंग के जरिए इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा, बैंक के ब्रांच में जाकर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। NEFT के जरिए कुछ ही समय में फंड ट्रांसफर हो जाता है। इसमें ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए कोई  एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना पड़ता है। लेकिन ब्रांच से NEFT कराने के लिए शुल्क देना होता है। यह सुविधा हमेशा चालू रहती है।
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ब्याज दरों में बदलाव नहीं
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया। वहीं, रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार है।
(फाइल फोटो)
 

ब्याज दरों में बदलाव नहीं
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया। वहीं, रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार है।
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