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पोल्ट्री फार्मिंग के लिए धोनी ने दिया 2000 कड़कनाथ चिकन ब्रीड का ऑर्डर, आप भी शुरू कर सकते हैं यह बिजनेस
बिजनेस डेस्क। दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी और पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) अब ऑर्गेनिक पोल्ट्री फार्मिंग (Organic Poultry Farming) के बिजनेस में उतर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) के कप्तान के रूप में यूएई (UAE) के शारजाह (Sharjah) में हुए मैचों में खेलने के बाद अंतिम रूप से क्रिकेट को अलविदा कह दिया। इसके बाद धोनी रांची में ऑर्गेनिक पोल्ट्री फार्मिंग बिजनेस शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के थंडला जिले के रहने वाले विनोद मेधा को 2 हजार से ज्यादा कड़कनाथ ब्रीड का ऑर्डर दिया है। यह बिजनेस कोई भी कर सकता है। इसे छोटे पैमाने पर भी शुरू किया जा सकता है। इसमें बहुत ज्यादा पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होती। (फाइल फोटो)

दूसरे चिकन से महंगा बिकता है कड़कनाथ
कड़कनाथ चिकन के अंडे और मांस दूसरे चिकन के मुकाबले काफी महंगे दर पर बिकते हैं। कड़कनाथ मुर्गा पूरी तरह से काला होता है। इसका मांस स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना गया है। इसकी डिमांड मार्केट में काफी है। डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम होने से इसकी कीमत ज्यादा है। कड़कनाथ मुर्गा मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में ही होता है। झाबुआ में यह सबसे ज्यादा पाया जाता है।
(फाइल फोटो)
कड़कनाथ मुर्गे को मिला है GI टैग
बता दें कि कड़कवनाथ मुर्गे को जियोग्राफिकल (GI) टैग मिला है। यह टैग उसी प्रोडक्ट को मिलता है, जो किसी खास क्षेत्र में ही होते हैं। झाबुआ में कड़कनाथ अनुसंधान केंद्र के प्रमुख ने मीडिया को बताया कि छत्तीसगढ़ के साथ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद झाबुआ को 2018 में कड़कनाथ के लिए GI टैग मिला है।
(फाइल फोटो)
भारतीय नस्ल का है चिकन
झाबुआ में कड़कनाथ मुर्ग को वहां की स्थानीय भाषा में काली मासी कहा जाता है। यह भारतीय प्रजाति का मुर्गा है। इसके पंख से लेकर स्किन तक का रंग पूरी तरह ब्लैक होता है। इसके अंडे और मांस का रंग भी काला होता है। यह 600 रुपए से 900 रुपए प्रति किलोग्राम की कीमत पर बिकता है। कड़कनाथ मुर्गी का एक अंडा कम से कम 40 रुपए में बिकता है।
(फाइल फोटो)
हार्ट और डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
कड़कनाथ मुर्गा मूल रूप मध्य प्रदेश के धार, झाबुआ, और छत्तीसगढ़ के बस्तर में होता है। यह गुजरात और राजस्थान का सीमावर्ती क्षेत्र है। कड़कनाथ चिकन में फैट कम और प्रोटीन ज्यादा होता है। इसे हार्ट और डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है। इसका मांस और अंडा खाने से पुरुषों की यौन शक्ति भी बढ़ती है।
(फाइल फोटो)
चंडीगढ़ और पंतनगर में हो रहा है शोध
कड़कनाथ मुर्गे के पालन को बढ़ावा देने के लिए चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय कुक्कुट संस्थान और पंतनगर यूनिवर्सिटी में शोध हो रहा है। इसके ब्रीड को घर पर भी पाला जा सकता है और छोटे पैमाने पर भी इसका व्यवसाय कर अच्छी-खासी कमाई की जाती है। कड़कनाथ मुर्गे का मांस दमा, टीबी और माइग्रेन जैसी बीमारी में भी फायदेमंद है। इसलिए इसकी मांग काफी है।
(फाइल फोटो)
50 हजार की पूंजी से भी शुरू कर सकते कारोबार
कड़कनाथ मुर्गा पालन का व्यवसाय 50 हजार रुपए की पूंजी से भी शुरू किया जा सकता है। 100 या 200 चूजों से भी इस व्यवसाय की शुरुआत की जा सकती है। इसमें दूसरे मुर्गों की तरह ज्यादा रोग भी नहीं होते। छोटे पैमाने पर कड़कनाथ मुर्गा पालन के लिए ज्यादा जगह की भी जरूरत नहीं पड़ती है। इसका फार्म आसानी से तैयार किया जा सकता है। मुर्गे के शेड में बिजली और पानी के साथ कुछ घंटे के लिए रोशनी की भी व्यवस्था होनी चाहिए। एक किलो मांस वाला कड़कनाथ मुर्गा तैयार करने में करीब 200 रुपए का खर्च आता है, वहीं यह 600 से 900 रुपए प्रति किलोग्राम की कीमत पर बिकता है।
(फाइल फोटो)
यहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग
कड़कनाथ मुर्गे का व्यवसाय शुरू करने के लिए भारतीय पक्षी अनुसंधान केंद्र, बरेली से प्रशिक्षण लिया जा सकता है। दूसरे कृषि विज्ञान केंद्रों में भी इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए राज्यों के पशुपालन विभाग से पूरी जानकारी ली जा सकती है।
(फाइल फोटो)
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