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धनतेरस पर खरीदने जा रहे हैं Gold, तो नुकसान से बचने के लिए इन 7 बातों का जरूर रखें ध्यान
बिजनेस डेस्क। अब बाजार में दीपावली की धूम बढ़ गई है। दीपावली के मौके पर लोग जम कर शॉपिंग करते हैं। इस मौके पर तमाम कंपनियां कई तरह के ऑफर लेकर आती हैं। कल गुरुवार को धनतेरस मनाया जाएगा। धनतेरस पर सोना-चांदी और बहुमूल्य रत्नों की खरीददारी की जाती है। इस मौके पर लोग बर्तन और जरूरत की दूसरी चीजें भी खरीदते हैं। दीपावली के लिए सबसे ज्यादा शॉपिंग धनतेरस के मौके पर ही होती है। धनतेरस के दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इस मौके पर लोग सोने के सिक्के भी खरीदते हैं, वहीं जिनके पास ज्यादा पैसा है, वे गोल्ड में अच्छा-खासा इन्वेस्ट करते हैं। इसका फायदा भी मिलता है। फिलहाल, सोने की कीमतों में कुछ गिरावट आई है। सोना खरीदना निवेश का अच्छा जरिया हो सकता है। अगर धनतेरस के मौके पर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ खास बातों पर आपको ध्यान देना होगा, ताकि नुकसान और धोखे से बच सकें।(फाइल फोटो)

शुद्धता का रखें ध्यान
सोना खरीदते समय शुद्धता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर आप प्योर गोल्ड लेना चाहते हैं तो यह 24 कैरेट का होता है। हालांकि, आपको जूलरी 100 फीसदी प्योर गोल्ड में नहीं मिलेगी, क्योंकि सोना बहुत लचीला और सॉफ्ट होता है। इसके चलते 24 कैरेट वाले गोल्ड की जूलरी नहीं बन पाती है। जूलरी में 22 कैरेट या 18 कैरेट गोल्ड का इस्तेमाल होता है। लेकिन गोल्ड बार या सिक्का 24 कैरेट का खरीदा जा सकता है। कैरेट के अलावा फाइननेस के जरिए भी गोल्ड की प्योरिटी का पता लगाया जा सकता है। फाइननेस के नंबर होते हैं जैसे 916, इसका मतलब है कि कॉइन 999.9 फीसदी प्योर है।
(फाइल फोटो)
कैरेट के हिसाब से होती है कीमत
इस बात का ध्यान रखें कि 22 कैरेट गोल्ड 24 कैरेट गोल्ड से सस्ता होता है। जूलरी 22 कैरेट गोल्ड की होती है, इसलिए इसकी कीमत 24 कैरेट गोल्ड के हिसाब से नहीं होगी। इस बात का ध्यान रखें कि प्योर गोल्ड जूलरी बताकर 22 कैरेट वाले गोल्ड के लिए 24 कैरेट के हिसाब से पैसे न वसूल लिए जाएं। बिल बनवाते वक्त ज्वैलर से सोने की शुद्धता और कीमत को बिल पर जरूर लिखवाएं।
(फाइल फोटो)
गोल्ड जूलरी का मेकिंग चार्ज
गोल्ड जूलरी बनवाते वक्त मेकिंग चार्ज लिया जाता है। जिस जूलरी का काम जितना बारीक रहता है, मेकिंग चार्ज उतना ही ज्यादा रहता है। फेस्टिवल्स के मौके पर गोल्ड जूलरी की डिमांड ज्यादा रहती है। इसका फायदा उठाते हुए कुछ ज्वैलर्स छोटी जूलरी पर भी हैवी जूलरी वर्क के हिसाब से ही चार्ज वसूलते हैं। ज्यादातर कस्टमर के पास वक्त कम होता है। इसलिए त्योहार के मौके पर भीड़भाड़ की वजह से वे बहुत ज्यादा तोल-मोल किए बिना ज्वैलर द्वारा बताया गया ज्यादा मेकिंग चार्ज देने के लिए तैयार हो जाते हैं। इससे बचना चाहिए और समय देकर खरीदादारी करनी चाहिए।
(फाइल फोटो)
खरीद सकते हैं गोल्ड कॉइन
धनतेरस के मौके पर सोने के सिक्के की लोग काफी खरीदते हैं। आप चाहें तो 0.5 ग्राम के मिनिमम वेट वाले गोल्ड कॉइन भी खरीद सकते हैं। जूलरी की तुलना में इन पर मेकिंग चार्ज भी कम होता है। गोल्ड कॉइन पर मेकिंग चार्ज की 4 फीसदी से 11 फीसदी तक होता है। वहीं, गोल्ड जूलरी पर 8 से 10 फीसदी तक मेकिंग चार्ज लग जाता है।
(फाइल फोटो)
मत करें हॉलमार्क की अनदेखी
ज्यादातर लोग गोल्ड खरीदते वक्त हॉलमार्क की अनदेखी करते हैं। बीआईएस (BIS) हॉलमार्क गोल्ड के शुद्ध होने की गांरटी होता है। इसलिए बिना हॉलमार्क वाली जूलरी नहीं खरीदें। गोल्ड कॉइन खरीदते वक्त भी जांच लें कि वह BIS सर्टिफाइड हो। किसी भी गोल्ड आइटम पर पांच चीजें मार्क होती हैं- BIS लोगो, प्योरिटी या फाइननेस दर्शाने वाला नंबर जैसे 22 कैरेट या 916, एसेइंग या हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो, मार्किंग की साल और ज्वैलर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर। BIS की ओर से यह घोषणा की जा चुकी है कि सिर्फ 22, 18 और 14 कैरेट वाली गोल्ड जूलरी पर ही उसकी हॉलमार्किंग होगी। यह नियम 1 जनवरी, 2017 से लागू हो गया है।
(फाइल फोटो)
स्टेटेड जूलरी
स्टेटेड गोल्ड जूलरी में नग की कीमत भी शामिल रहती है। ऐसी जूलरी खरीदते वक्त स्टोन्स या जेम्स की शुद्धता का सर्टिफिकेट जरूर लें। साथ ही उनकी कीमत और वजन भी बिल पर दर्ज करवाएं। कुछ ज्वैलर्स स्टडेड जूलरी में लगे स्टोन्स और जेम्स को भी सोने की कीमत में ही लगाते हैं और उनका वजन अलग से नहीं किया जाता है। जब कस्टमर उस जूलरी को बेचता है तो नगों का दाम अलग रहता है और सोने का अलग। एक या दो छोटे स्टोन्स होने पर फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हैवी वर्क होने पर ध्यान देना जरूरी है।
(फाइल फोटो)
बिल न लेना
सोने की खरीददारी करते वक्त उसका पक्का बिल जरूर लें। कई लोग जान-पहचान की दुकान से खरीददारी करते वक्त बिल लेने पर ध्यान नहीं देते हैं। इससे नुकसान हो सकता है। सोना चाहे जहां से खरीदें, लेकिन उसका पक्का बिल लेना न भूलें। यह भी ध्यान रखें कि उसमें खरीदी गई जूलरी, मेकिंग चार्ज और दूसरी सारी डिटेल हो।
(फाइल फोटो)
गोल्ड कॉइन की पैकेजिंग
गोल्ड कॉइन टेंपर प्रूफ पैकेजिंग में आते हैं। टेंपर प्रूफ पैकेजिंग कॉइन की प्योरिटी बरकरार रहने की गांरटी होती है। इसलिए गोल्ड कॉइन खरीदते वक्त यह ध्यान रखें कि काइॅन टेंपर प्रूफ पैकेजिंग वाला ही हो। अगर आप आगे चलकर इसे बेचना चाहते हैं तो आपको भी इसकी यही पैकेजिंग बरकरार रखनी होगी।
(फाइल फोटो)
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