अगर आप हैं SBI के ग्राहक, तो ये खुश खबरी है आपके लिए

First Published 9, Sep 2019, 1:36 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक ने एक बार फिर अपने ग्रहकों को खुशखबरी दी है। SBI MCLR ने रेट घटा कर 10 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। एसबीआई ने MCLR पहले 8.25 फीसदी थी जो घटाकर 8.15 फीसदी कर दी गई है। नई दरें 10 सितंबर से लागू कर दी जाएगी। एसबीआई की राह पर अब अन्य बैंक भी चल सकती हैं। इस कदम से फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन सस्ते हो जाएंगे, इसका लाभ तुरंत नहीं मिलेगा।

एसबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 में लगातार तीसरी बार MCLR घटाई है, वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में 20 से 25 बेसिस प्वाइंट (चौथाई फीसदी) की कटौती की

एसबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 में लगातार तीसरी बार MCLR घटाई है, वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में 20 से 25 बेसिस प्वाइंट (चौथाई फीसदी) की कटौती की

MCLR का मतलब मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट होता है, जो असल में बैंक की फंड की अपनी लागत पर आधारित होता है। जब बैंक की फंड की लागत घटती है तो वह एमसीएलआर घटा देता है।

MCLR का मतलब मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट होता है, जो असल में बैंक की फंड की अपनी लागत पर आधारित होता है। जब बैंक की फंड की लागत घटती है तो वह एमसीएलआर घटा देता है।

SBI की फ्लोटिंग रेट होम लोन इस एक साल के MCLR से जुड़ा होता है। किसी के लिए रेट सितंबर में तय किया, उसके बाद MCLR में बदलाव होता है तो इसका फायदा अगले साल सितंबर तक ही मिल पाएगा।

SBI की फ्लोटिंग रेट होम लोन इस एक साल के MCLR से जुड़ा होता है। किसी के लिए रेट सितंबर में तय किया, उसके बाद MCLR में बदलाव होता है तो इसका फायदा अगले साल सितंबर तक ही मिल पाएगा।

बाजार में SBI की होम लोन 35 और ऑटो लोन में 36 फीसदी की हिस्सेदारी है। हाल में RBI ने बैंकों को सभी लोन रेपो रेट से जोड़ने का निर्देश दिया है

बाजार में SBI की होम लोन 35 और ऑटो लोन में 36 फीसदी की हिस्सेदारी है। हाल में RBI ने बैंकों को सभी लोन रेपो रेट से जोड़ने का निर्देश दिया है

पिछले कुछ महीनों से केंद्रीय बैंक सभी सरकारी और प्राइवेट बैंको से रेपो रेट के साथ बैंक लोन को जोड़ने के लिए कह रहा था। कई बैंकों के RBI की अपील को नरअंदाज करने के कारण केंद्रीय बैंक को डेडलाइन के साथ निर्देश देना पड़ा।

पिछले कुछ महीनों से केंद्रीय बैंक सभी सरकारी और प्राइवेट बैंको से रेपो रेट के साथ बैंक लोन को जोड़ने के लिए कह रहा था। कई बैंकों के RBI की अपील को नरअंदाज करने के कारण केंद्रीय बैंक को डेडलाइन के साथ निर्देश देना पड़ा।

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