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PF पर टैक्स लगने से परेशानी की बात नहीं, यहां निवेश कर हासिल कर सकते हैं बेहतर रिटर्न
बिजनेस डेस्क। इस साल बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने एक सीमा ले ज्यादा प्रोविडेंट फंड (PF) कॉन्ट्रिब्यूशन पर टैक्स लगाने की घोषणा कर दी। केंद्र सरकार के फैसले के मुताबिक, पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन की राशि सालाना 2.5 लाख रुपए से ज्यादा होने पर ब्याज पर टैक्स लगेगा। बता दें कि इस पर बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के मुताबिक ही टैक्स लगेगा। इसलिए अब लोग ऐसे विकल्प की तलाश कर रहे हैं, जिनमें निवेश पर टैक्स नहीं लगे। बता दें कि इस तरह के ऑप्शन्स की कोई कमी नहीं है। जानें इनके बारे में।(फाइल फोटो)
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इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) में सालाना 2.5 लाख रुपए से ज्यादा के कॉन्ट्रिब्यूशन राशि पर जो ब्याज मिलेगा, उसे टैक्सेबल इनकम माना जाएगा। इस पर सामान्य दर के मुताबिक टैक्स का आकलन किया जाएगा। यह टैक्स सिर्फ इम्प्लॉई के कॉन्ट्रिब्यूशन पर लागू होगा, इम्प्लॉयर के कॉन्ट्रिब्यूशन पर नहीं। (फाइल फोटो)
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बता दें कि कई इम्प्लॉई अपने पीएफ अकाउंट में बेसिक पे के लिए निर्धारित सीमा 12 फीसदी से ज्यादा भी कॉन्ट्रिब्यूट करते हैं। पीएफ नियमों के मुताबिक, इम्प्लॉई बेसिक पे के 12 फीसदी से ज्यादा राशि कॉन्ट्रिब्यूट कर सकते हैं, लेकिन इम्प्लॉयर के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह इस लिमिट से ज्यादा कॉन्ट्रिब्यूट करे। (फाइल फोटो)
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डेट एसेट क्लास में दूसरे विकल्प के तौर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP), बैंक डिपॉजिट्स या डेट फंड्स हो सकते हैं। पीपीएफ में अधिकतम 1.5 लाख रुपए का निवेश किया जा सकता है। इस पर 7.1 फीसदी ब्याज मिलता है, लेकिन ज्यादातर इम्प्लॉई इस सीमा को पूरा कर लेते हैं। (फाइल फोटो)
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बैंक डिपॉजिट्स पर इस समय 6.5 फीसदी के करीब ब्याज मिल रहा है। इस ब्याज पर टैक्स लगता है। ऐसे में, जिन इम्प्लॉइज के पीएफ जमा पर टैक्स लगेगा, वे चाहें तो पीएफ में निवेश जारी रख सकते हैं। इसकी वजह यह है कि टैक्स के बाद भी उन्हें 5.5 से 5.85 फीसदी तक का रिटर्न मिलेगा। (फाइल फोटो)
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कुछ इम्प्लॉई वॉलियन्टरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में निवेश का विकल्प चुनते हैं। इसमें सबसे ज्यादा टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लिए पीएफ की ब्याज दर 8.5 फीसदी रखी गई है। वहीं, वॉलियन्टरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में इम्प्लॉयर को सूचना देकर कॉन्ट्रियूबिशन बंद किया जा सकता है। इसमें जमा राशि रिटायरमेंट तक नहीं निकाली जा सकती है। (फाइल फोटो)
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इम्प्लॉई चाहें तो मार्केट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट्स भी कर सकते हैं। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश भी एक बेहतर विकल्प है। इसमें इक्विटी फंड ऑप्शन को प्रॉयोरिटी दिया जाना चाहिए। एनपीएस में रिटायरमेंट पर 60 फीसदी राशि विदड्रॉल की जा सकती है, जिस पर टैक्स नहीं लगता है। बाकी राशि से एक एन्यूटी प्लान लेना होगा, जिससे जिंदगी भर पेंशन मिलेगा। (फाइल फोटो)
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इम्प्लॉई अपनी वित्तीय जरूरतों और रिस्क लेने की क्षमता के मुताबिक दूसरे विकल्पों का भी चुनाव कर सकते हैं। निवेशक इक्विटी, हाइब्रिड और मल्टी-कैप फंड्स वाले म्यूचुअल फंड्स के अलावा ऐसे भी फंड्स में निवेश कर सकते हैं, जो इंटरनेशनल मार्केट्स व कमोडिटीज में पूंजी लगाते हैं। इसके अलावा ऐसे डायनेमिक इक्विटी फंड्स और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स भी हैं, जिसमें निवेशकों को कम रिस्क में बेहतर रिटर्न मिल सकता है। (फाइल फोटो)
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