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पत्नी कोकिलबेन के हाथों शुरू कराते थे नया काम, ऐसी थी करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने वाले धीरूभाई की लव स्टोरी
बिजनेस डेस्क। रिलायंस इंडस्ट्रीज के रूप में देश का सबसे बड़ा बिजनेस एम्पायर खड़ा करने वाले धीरूभाई अंबानी की 6 जुलाई को डेथ एनिवर्सरी है। धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर, 1932 को गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक छोटे से गांव चोरवाड़ में हुआ था। धीरूभाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बहुत ही कम उम्र से उन्होंने तरह-तरह के काम करने शुरू कर दिए। उन्होंने पकौड़े भी बेचे और यमन में पेट्रोल पंप पर नौकरी भी की। लेकिन अपनी मेहनत और बुद्धि की बदौलत वे एक बड़ा व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर पाने में सफल रहे। उन्होंने जिस रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की, वह उनके बेटे मुकेश अंबानी के नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ रही है। धीरूभाई अंबानी की मृत्यु 6 जुलाई, 2002 को दिल का दौरा पड़ने से हो गई। उस समय उनकी संपत्ति 62 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा थी। धीरूभाई अंबानी अपनी पत्नी कोकिलाबेन से बहुत ज्यादा प्यार करते थे। कोकिलाबेन का कहना है कि वह कोई भी महत्वपूर्ण फैसला उनसे पूछे बिना नहीं लेते थे। धीरूभाई के निधन के बाद कोकिलाबेन ने मुद्रा वेबसाइट को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने अपने पति से जुड़ी यादों को साझा किया था। इससे पता चलता है कि धीरूभाई एक बड़े उद्योगपति होने के साथ ही अपनी पत्नी को बहुत प्यार करने वाले खुशदिल इंसान थे।

हर काम का शुभारंभ पत्नी के हाथों कराते थे
धीरूभाई के मन में अपनी पत्नी के लिए इतना ज्यादा प्यार और इज्जत थी कि वे हर नये काम की शुरुआत उनके ही हाथों कराते थे। वे हर कार्यक्रम में उन्हें अपने साथ ले जाते थे। धीरूभाई अंबानी जो भी प्रोजेक्ट शुरू करते थे, पहले उसके बारे में कोकिलाबेन से जरूर चर्चा करते थे।
प्यार जताने का अंदाज था अनोखा
कोकिलाबेन को धीरूभाई का प्यार जताने का अनोखा अंदाज बेहद पसंद था। कोकिलाबेन ने जामनगर में कभी कोई गाड़ी या कार नहीं देखी थी। उन्होंने बताया कि एक बार मैं चोरवाड़ से अदेन शहर के लिए निकली, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही धीरूभाई का फोन उनके पास आया। धीरूभाई ने उनसे कहा कि मैंने तुम्हारे लिए एक गाड़ी ली है और पूछा कि गाड़ी का रंग कैसा होगा। फिर कहा कि मैं बता दूं, ‘It is black, like me. कोकिलाबेन को उनका यही अंदाज बेहद पसंद था।
अंग्रेजी सीखने को कहा
कोकिलाबेन ने अफनी पढ़ाई गुजराती स्कूल में की थी। उन्हें अंग्रेजी की खास जानकारी नहीं थी। जब फैमिली मुंबई शिफ्ट हो गई तो वहां के माहैल में ढलने के लिए अंग्रेजी जानना जरूरी हो गया। धीरूभाई ने कोकिलाबेन को अंग्रेजी सीखने के लिए कहा। घर में बच्चों को पढ़ाने के लिए जो ट्यूटर आता था, उसी से कोकिलाबेन ने अंग्रेजी सीखी।
साथ जाते थे दूसरे शहरों में
धीरूभाई जब भी किसी काम से कहीं जाते थे, तो पत्नी कोकिलाबेन को साथ ले जाते थे। पहले वे अपने प्रोजेक्ट से जुड़े काम को पूरा करते। इधर, कोकिलाबेन शहर से जुड़ी जानकारी जुटातीं। फिर जब उन्हें काम से छुट्टी मिल जाती तो दोनों घूमने जाते। धीरूभाई उन्हें शहर की खास बातों और होटलों के बारे में बताया करते।
घमंड नाम का भी नहीं
कोकिलाबेन कहती हैं कि धीरूभाई ने बहुत ऊंचा मुकाम हासिल किया, लेकिन कभी घमंड मन में आने नहीं दिया। कोकिलाबेन ने बताया कि वे सिर्फ अपने दोस्तों को ही बाहर घूमने के लिए साथ नहीं ले जाते थे, बल्कि मुझे भी अपने दोस्तों को बुलाने के लिए कहते थे।
हवाई जहाज किया गिफ्ट
कोकिलाबेन कहती हैं कि जब धीरूभाई ने नया हवाई जहाज खरीदा तो कहा कि यह आपको गिफ्ट किया है। उस मौके पर उनके काफी दोस्त आए थे। कोकिलाबेन ने कहा कि उस समय उन्होंने मेरे दोस्तों को बुलाने की भी काफी जिद की। धीरूभाई ने अपनी जिंदगी में गरीबी देखी तो देश की सबसे बड़ी कंपनी भी खड़ी की। वे एक बेहद अच्छे पति और पिता थे। उन्होंने बेटे-बहुओं, नाती-पोतों से भरे-पुरे परिवार में बेहद खुशहाल जीवन बिताया।
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