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हादसे ने ऐसी कर दी थी 'आशिकी' एक्ट्रेस की हालत, 29 दिन तक लड़ी मौत से जंग, अब 1 काम कर कमा रही नाम

First Published Apr 19, 2021, 11:48 AM IST
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मुंबई. अनु अग्रवाल (Anu Agarwal) का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहले फिल्म आशिकी (Film Aashiqui) आती है। आशिकी हिट होने के बाद उन्हें हॉलीवुड के साथ ही साउथ से भी की ऑफर्स मिले लेकिन 1999 में एक एक्सीडेंट ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। वो कोमा में चली गईं। अनु ने जिंदगी से जंग लड़ी और जब वो कोमा से बाहर आईं तो उन्होंने बॉलीवुड में दोबारा जाने बजाए योगिनी और लेखिका बनने का फैसला किया। 2015 में अनु ने अपनी बायोग्राफी अनयूजवल: मेमोइर ऑफ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम डेड लिखी। हाल ही में उन्होंने अपनी ऑडियोबुक भी लॉन्च की है। इसी बीच हाल ही में अनु अग्रवाल ने फिल्में, प्रसिद्धि और लाइफ चेंज के बारे में इंटरव्यू के दौरान कई सारी बातें की। 

उन्होंने इंटरव्यू के दौरान बताया- जनवरी में आशिकी की शूटिंग शुरू की और जब मैंने एक्टिंग शुरू की तो मेरा मन बदल गया। मैं मॉडलिंग में वापस नहीं जाना चाहती थी। लेकिन आशिकी के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। मैं रातोंरात स्टार बन गई। 

उन्होंने इंटरव्यू के दौरान बताया- जनवरी में आशिकी की शूटिंग शुरू की और जब मैंने एक्टिंग शुरू की तो मेरा मन बदल गया। मैं मॉडलिंग में वापस नहीं जाना चाहती थी। लेकिन आशिकी के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। मैं रातोंरात स्टार बन गई। 

आशिकी की सक्सेस के बाद लोगों से मुझे जिस तरह का प्यार मिला उस पर यकीन नहीं कर पाई मैं। जब मैं बाहर जाती तो फैंस आकर मेरा ऑटोग्राफ लेने लगते थे। इतना ही नहीं लोग मेरी एक झलक पाने के लिए घर के बाहर खड़े रहते थे।

आशिकी की सक्सेस के बाद लोगों से मुझे जिस तरह का प्यार मिला उस पर यकीन नहीं कर पाई मैं। जब मैं बाहर जाती तो फैंस आकर मेरा ऑटोग्राफ लेने लगते थे। इतना ही नहीं लोग मेरी एक झलक पाने के लिए घर के बाहर खड़े रहते थे।

उन्होंने बताया- मैं स्टारडम के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। मुझे नहीं पता था कि मैं स्टारडम पर कैसे रिएक्ट करूं। मैंने कभी एक्टर बनने का सपना नहीं देखा था। मैं हमेशा से ही सोशल वर्कर थी और मेरा सपना संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने का था।

उन्होंने बताया- मैं स्टारडम के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। मुझे नहीं पता था कि मैं स्टारडम पर कैसे रिएक्ट करूं। मैंने कभी एक्टर बनने का सपना नहीं देखा था। मैं हमेशा से ही सोशल वर्कर थी और मेरा सपना संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने का था।

अनु ने बताया- आशिकी के बाद मुझे राकेश रोशन और मणिरत्नम का फोन आया। मुझे एक हॉलीवुड फिल्म में भी ऑफर हुई। मेरे हाथ में कुछ अच्छे प्रोजेक्ट्स थे लेकिन मैं हमेशा पहले से एक स्क्रिप्ट पढ़ना चाहती थी। 

अनु ने बताया- आशिकी के बाद मुझे राकेश रोशन और मणिरत्नम का फोन आया। मुझे एक हॉलीवुड फिल्म में भी ऑफर हुई। मेरे हाथ में कुछ अच्छे प्रोजेक्ट्स थे लेकिन मैं हमेशा पहले से एक स्क्रिप्ट पढ़ना चाहती थी। 

अनु ने एक्सीडेंट के दिनों को याद कर कहा- मैं अपनी जिंदगी में बहुत मुश्किल दौर से गुजरी हूं, जो बहुत ही कठिन थे। जहां बीमारी थी, तकलीफें थी और कुछ भी ठीक नहीं हो पा रहा था। हालांकि, सभी को कभी न कभी ऐसे मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है। मैं चाहूंगी कि ऐसे दौर में आप मेडिटेशन जरूर करें। 

अनु ने एक्सीडेंट के दिनों को याद कर कहा- मैं अपनी जिंदगी में बहुत मुश्किल दौर से गुजरी हूं, जो बहुत ही कठिन थे। जहां बीमारी थी, तकलीफें थी और कुछ भी ठीक नहीं हो पा रहा था। हालांकि, सभी को कभी न कभी ऐसे मुश्किल समय का सामना करना पड़ता है। मैं चाहूंगी कि ऐसे दौर में आप मेडिटेशन जरूर करें। 

बता दें कि भयानक हादसे के बाद अब अनु ग्लैमर वर्ल्ड से दूर झुग्गी-झोपड़ी में जाकर गरीब बच्चों को मुफ्त में योगा सिखाती हैं। उन्हें आखिरी बार अप्रैल 2018 में महेश भट्ट के प्रोडक्शन हाउस विशेष फिल्म्स की 30वीं एनिवर्सरी की पार्टी में नजर आई थीं।

बता दें कि भयानक हादसे के बाद अब अनु ग्लैमर वर्ल्ड से दूर झुग्गी-झोपड़ी में जाकर गरीब बच्चों को मुफ्त में योगा सिखाती हैं। उन्हें आखिरी बार अप्रैल 2018 में महेश भट्ट के प्रोडक्शन हाउस विशेष फिल्म्स की 30वीं एनिवर्सरी की पार्टी में नजर आई थीं।

1996 के बाद अनु अग्रवाल ने कोई फिल्म नहीं की और योग और अध्यात्म की तरफ रुख कर लिया। इसी बीच 1999 में एक भीषण सड़क हादसे में उनकी याददाश्त चली गई। करीब 29 दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब अनु होश में आईं, तो वह खुद को पूरी तरह से भूल चुकी थीं। याददाश्त खो चुकीं अनु अग्रवाल का 3 साल तक लगातार इलाज चला। इसके बाद वो अपनी याददाश्त वापस पा सकीं।

1996 के बाद अनु अग्रवाल ने कोई फिल्म नहीं की और योग और अध्यात्म की तरफ रुख कर लिया। इसी बीच 1999 में एक भीषण सड़क हादसे में उनकी याददाश्त चली गई। करीब 29 दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब अनु होश में आईं, तो वह खुद को पूरी तरह से भूल चुकी थीं। याददाश्त खो चुकीं अनु अग्रवाल का 3 साल तक लगातार इलाज चला। इसके बाद वो अपनी याददाश्त वापस पा सकीं।

अनु ने एक इंटरव्यू में बताया था- बॉलीवुड छोड़ने के बाद मैंने योगा पर फोकस किया। दरअसल में शुरु से ही योग करती थी और 1997 में मैंने उत्तराखंड के आश्रम में योगा सीखा। लेकिन इसी बीच 1999 में मेरा एक्सीडेंट हो गया और मैं कोमा में रही। डॉक्टर ने मेरे पेरेंट्स को कहा कि इसकी मौत कोमा में ही हो जाएगी। लेकिन योगा की मदद से मैंने मौत को भी मात दे दी।

अनु ने एक इंटरव्यू में बताया था- बॉलीवुड छोड़ने के बाद मैंने योगा पर फोकस किया। दरअसल में शुरु से ही योग करती थी और 1997 में मैंने उत्तराखंड के आश्रम में योगा सीखा। लेकिन इसी बीच 1999 में मेरा एक्सीडेंट हो गया और मैं कोमा में रही। डॉक्टर ने मेरे पेरेंट्स को कहा कि इसकी मौत कोमा में ही हो जाएगी। लेकिन योगा की मदद से मैंने मौत को भी मात दे दी।

अनु अग्रवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही अनु को महेश भट्ट ने अपनी फिल्म आशिकी में पहली बार काम दिया था। महज 21 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली अनु इस फिल्म से रातोंरात स्टार बन गईं।

अनु अग्रवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही अनु को महेश भट्ट ने अपनी फिल्म आशिकी में पहली बार काम दिया था। महज 21 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली अनु इस फिल्म से रातोंरात स्टार बन गईं।

अनु अग्रवाल ने गजब तमाशा, खलनायिका, किंग अंकल, कन्यादान, जन्म कुंडली और रिटर्न टू ज्वेल थीफ जैसी फिल्मों में काम किया। अनु ने तमिल फिल्म थिरुदा-थिरुदा और शॉर्ट फिल्म द क्लाऊड डोर में भी काम किया है।

अनु अग्रवाल ने गजब तमाशा, खलनायिका, किंग अंकल, कन्यादान, जन्म कुंडली और रिटर्न टू ज्वेल थीफ जैसी फिल्मों में काम किया। अनु ने तमिल फिल्म थिरुदा-थिरुदा और शॉर्ट फिल्म द क्लाऊड डोर में भी काम किया है।

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