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BSF की नौकरी छोड़ महाभारत का भीम बना साढ़े 6 फीट लंबा ये एक्टर, ऐसे मिला था यादगार रोल
मुंबई। कोरोना वायरस लॉकडाउन में 90 के दशक के चर्चित सीरियल रामायण और महाभारत खूब पसंद किए जा रहे हैं। डीडी भारती के बाद अब कलर्स चैनल पर महाभारत हर रोज शाम 7 से 9 बजे आती है। महाभारत का एक-किरदार आज भी लोगों को अच्छी तरह याद है। फिर चाहे कृष्ण बने नीतिश भारद्वाज हों या भीम का रोल निभाने वाले प्रवीण कुमार सोबती। 6 दिसंबर 1947 को जन्मे प्रवीण कुमार सोबती भारत के लिए एशियन गेम्स में 4 मेडल जीत चुके हैं। इनमें दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल शामिल है।

साढ़े 6 फीट के प्रवीण कुमार 1960 और 1970 में स्टार इंडियन एथलीट रहे हैं। अपनी लंबाई के कारण वे सालों तक हैमर थ्रो और डिस्कस थ्रो के खिलाड़ी रहे। 1966 और 1970 में बैंकॉक में हुए एशियन गेम्स में प्रवीण ने डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीता था। 1966 में ही हैमर थ्रो में प्रवीण को ब्रॉन्ज मेडल मिला।
1974 में तेहरान में हुए एशियन गेम्स में भी प्रवीण ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीता। 1968 और 1972 में हुए समर ओलंपिक्स में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
खेल की बदौलत ही प्रवीण कुमार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में डिप्टी कमांडेंट की नौकरी मिल गई थी लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। 1986 में एक दिन पंजाबी दोस्त ने प्रवीण को आकर बताया कि बीआर चोपड़ा महाभारत बना रहे हैं और वो भीम के किरदार के लिए एक बलशाली सा बंदा ढूंढ रहे हैं और वो चाहते हैं कि तुम एक बार आकर मिलो।
इसके बाद 1988 तक तकरीबन 30 फिल्मों में काम करने के बाद प्रवीण कुमार बीआर चोपड़ा से मिले और फिर तय हो गया कि महाभारत में भीम का किरदार प्रवीण कुमार सोबती ही करेंगे। ये कैरेक्टर इतना पॉपुलर हुआ कि खुद प्रवीण कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि उन्हें कई दफा लोगों ने बस, ट्रेन और जहाज में सफर करते हुए घेर लिया
प्रवीण कुमार ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1981 में आई फिल्म रक्षा से की थी। इसी साल उनकी दूसरी फिल्म मेरी आवाज सुनो भी आई। दोनों ही फिल्मों में उनके साथ जितेन्द्र थे।
प्रवीण कुमार सोबती अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म 'शहंशाह' में भी काम कर चुके हैं। फिल्म में वे मुख्तार सिंह के रोल में थे, जिनसे अमिताभ कहते हैं- रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं नाम है शहंशाह। प्रवीण ने चाचा चौधरी सीरियल में साबू का रोल भी निभाया है।
एक इंटरव्यू में प्रवीण कुमार ने माना था कि भीम के रोल की वजह से लोग लाइन में लगकर उनके पैर छूते थे और उनको बहुत सम्मान मिलता था। लेकिन इस वजह से वो टाइपकास्ट हो गए और उनको एक खास इमेज में बांध दिया गया, जिसका अफसोस उनको आज भी है।
1998 तक लगातार फिल्मों और टीवी में सक्रिय रहने के बाद प्रवीण कुमार ने एक्टिंग से दूरी बना ली। लगभग 14 साल बाद 2012 में वे धर्मेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी एक फिल्म भीम में नजर आए थे। लेकिन फिर उन्होंने एक्टिंग को अलविदा कहकर राजनीति में कदम रखा।
73 साल के हो चुके प्रवीण कुमार ने 2013 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन की और वजीरपुर से दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद 2014 में उन्होंने बीजेपी का हाथ थाम लिया।
एक इंटरव्यू में प्रवीण कुमार ने बताया था कि अब उनसे मिलने लोग नहीं आते। वहीं उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती है और चलने में भी उन्हें छड़ी का सहारा लेना पड़ता है।
प्रवीण कुमार ने रक्षा, गजब, हमसे है जमाना, हम हैं लाजवाब, जागीर, युद्ध, सिंहासन, नामोनिशान, खुदगर्ज, लोहा, दिलजला, शहंशाह, कमांडो, मालामाल, अग्नि, बीस साल बाद, प्यार मोहब्बत, इलाका, एलान-ए-जंग, आज का अर्जुन, नाकाबंदी, बेटा हो तो ऐसा जैसी फिल्मों में काम किया है।
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