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डॉक्टर ने किया खुलासा, कहा-'कभी जल्दी-जल्दी बोलता, घबराता तो रोने लगता था सुशांत'
मुंबई. सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में अब एक नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि उनका इलाज कर रही डॉक्टर सुजैन वॉकर ने किया है। उन्होंने मंबई पुलिस को बयान दिया था, जिसकी कॉपी आजतक अपने पास होने का दावा करता है। उसकी खबर के अनुसार, डॉ. वॉकर ने ऐसी तमाम चौंकाने वाली बातें कही हैं जो इस केस को बिल्कुल अलग नजरिए से देखने में मदद करता है। डॉ. वॉकर के बयान के मुताबिक रिया सुशांत की बहुत अच्छे से देखभाल कर रही थीं और सुशांत खुद ही कई बार अपनी मर्जी से दवाएं लेना बंद कर देते थे।

डॉक्टर वॉकर ने कहा कि 'सुशांत अपनी मां के बहुत ज्यादा करीब था और इसके बाद वह अपनी बहनों के करीब हो गया, लेकिन उन्हें नहीं लगा कि वह अपने पिता के करीब है। सुशांत ने स्पेस, खगोल विज्ञान और भौतिक विज्ञान की बातें की। उसका बात करने का तरीका और बर्ताव पूरी तरह से अतार्किक और बहुत फास्ट था। जिसकी वजह से उन्हें समझ में आया कि वह बायपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं।'
डॉक्टर सुजैन का कहना है कि 'उन्हें पता चला कि सुशांत पिछले 20 साल से इस दिकक्त से जूझ रहा है। सुशांत ने खुद डॉक्टर वॉकर को बताया कि बहुत युवा उम्र से ही उसे ये दिक्कतें हो रही थी। यही लक्षण उसने 2013 से 2014 के बीच महसूस किए थे। हर बार ये लक्षण पहले से ज्यादा बढ़ जाते थे।' इसके साथ ही डॉक्टर वॉकर ने दावा किया कि 'सुशांत अपनी बीमारी के बारे में जानते थे, लेकिन जैसे ही वह थोड़ा बेहतर महसूस करते थे वह दवाइयां लेना बंद कर देते थे। वह रेग्युलर बेसिस पर ट्रीटमेंट नहीं ले रहे थे। वॉकर ने बताया कि जब सुशांत उनके पास आए तब तक उनकी दिक्कत बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। उन्होंने बताया कि सुशांत को तत्काल इलाज की जरूरत थी।'
वॉकर का आगे कहना है कि 'उन्होंने अपने परिचित डॉक्टर प्रवीण दादाचंदजी को कॉन्टेक्ट किया।' वॉकर ने बताया कि 'बायपोलर डिसऑर्डर एक तरह का रासायनिक असंतुलन है, इसमें बेहिसाब पैसा खर्च करना, 4-4 5-5 दिन तक नींद का नहीं आना, सब कुछ खोने और सब कुछ जल्दी जल्दी करने की चाहत होना जैसी चीजें होती हैं। वॉकर ने बताया कि ऊपर जिन सेशन्स का जिक्र किया गया है, उनमें सुशांत में जल्दी-जल्दी सोचने, जल्दी-जल्दी बातें करने और बैचेनी जैसे लक्षण नजर आए थे। सुशांत ने बताया था कि उसे एक मिनट का समय भी कई दिनों की तरह लगता था इसलिए उसे और ज्यादा डर और घबराहट होने लगती थी।'
'इसके बाद सुशांत प्रवीण दादाचंदजी के पास गया जिन्हें सुजैन ने 14 नवंबर, 2019 को कंसल्ट किया था। अगले दिन जब सुशांत डॉक्टर प्रवीण के पास पहुंचा तो वह भी श्योर थे कि वह बायपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहा है। 15 नवंबर, 2019 को सुशांत सिंह राजपूत डॉक्टर सुजैन वॉकर के पास आए और रिया चक्रवर्ती उनके पास थीं। सुजैन ने सुशांत को बताया कि उन्हें बायपोलर डिसऑर्डर है और वह ठीक हो जाएंगे, लेकिन उन्हें प्रॉपर और रेग्युलर ट्रीटमेंट लेना होगा।'
डॉक्टर सुजैन ने बताया कि 'सुशांत जल्दी ही अपनी बीमारी से निजात पाना चाहते थे, जो कि संभव नहीं था। सुजैन ने सुशांत से 18 नवंबर को दोबारा क्लीनिकल एग्जामिनेशन को आने के लिए कहा। 15 नवंबर को सुशांत रिया के साथ डॉक्टर वॉकर के यहां पहुंच गए। जब सुजैन क्लीनिक पहुंचे तब तक सुजैन बायपोलर डिसऑर्डर के बारे में काफी रिसर्च कर चुकी थीं। सुशांत बिना किसी वजह से उदास था।' सुजैन ने एक बड़ी बात ये बताई कि 'सुशांत कई बार रोया करता था। डॉक्टर वॉकर ने कहा कि 'वह कई बार उनसे बात करने के दौरान भी रोने लगते थे। इसके अलावा वह अपने बारे में बहुत ज्यादा निगेटिव महसूस किया करता था।'
डॉक्टर वॉकर ने बीमारी के बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा कि 'हर इंसान के दिमाग में सेरोटोनिन नाम का कैमिकल रिलीज होता है। अगर ये कैमिकल कम रिलीज होगा तो इंसान दुखी महसूस करेगा और ये कैमिकल अलग ज्यादा रिलीज होगा तो इंसान खुश महसूस करेगा। अन्य शब्दों में कहें तो किसी इंसान का मूड किस वक्त कैसा होगा ये उस इंसान के दिमाग में बहने वाला ये कैमिकल तय करता है।'
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