भौंरा देखकर मुस्कराए छग के CM, खुद को खेलने से नहीं रोक सके
भौंरा चलाकर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को महत्व देने का संदेश दिया। जिले नेवरा ग्राम में हरेली तिहार मनाने पहुंचे थे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। महिलाओं को सशक्त बनाने, कुपोषण दूर करने की बात कही।
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बिलासपुर: मुख्यमंत्री भुपेश बघेल तखतपुर विधानसभा के नेवरा गांव में हरेली तिहार का त्योहार मनाने पहुंचे थे। हरेली त्योहार छत्तीसगढ़ राज्य में मनाया जाता है। जनता को छत्तीसगढ़ी में सम्बोधित करते हुए उन्होंने ग्रामीणों को 'गाड़ा-गाड़ा' बधाई दी। उन्होंने कहा कि, "छत्तीसगढ़ की पहचान और तीज त्यौहार, खान-पान और बोल-चाल खत्म हो रहा था। आज हम उस पुराने गौरव को वापस पहचान दिलाने जा रहे हैं।" प्रदेश में पहली बार हरेली के लिए शासन ने अवकाश घोषित किया है। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने, गांवों में चारा उगाने और छत्तीसगढ़ी त्योहारों, खान-पान और बोल-चाल के संरक्षण व बच्चों के कुपोषण को दूर करने पर जोर दिया। सीएम ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, "पहले कुछ लोगों ने गाय की सेवा के नाम पर सिर्फ व्यापार किया है। गौ मांस की तस्करी की, हडि़्डयों को बेचा और बाकी बचे हिस्से को खपाने के लिए गौशालाओं में ही मछली पालन करने लगे। गौ-सेवा की आड़ में अपना धंधा चलाया गया। मौजूदा सरकार जो भी नीति अपनाएगी, वह पशुधन में वृद्धि और किसानों में समृद्धि लाने के लिए होगी।"
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नेवरा भाषण की पांच प्रमुख बातें : राज्य में 40 फीसदी बच्चे कुपोषित है जो देश में सबसे ज्यादा है। सब को मिलकर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ना है। पुराने गौरव को वापस पहचान दिलाने पर जोर दीया गया। तीजा, करमा और विश्व आदिवासी दिवस जैसे त्योहारों पर छुट्टी की घोषणा की गई। गौठानों का संचालन ग्रामीण करेंगे। चारे की कमी के कारण हर गांव को पांच से दस एकड़ जमीन चारे के लिए आरक्षित की जाएगी जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसान समृद्ध होंगे। महिलाओं द्वारा बनाये जा रहे सामान जैसे लाख की चूड़ियां और जूट के बैग को खरीदने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे उनको आमदनी होगी और गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। राज्य के 33 हजार नालों को पुनर्जीवित किया जाएगा। नदी से जुड़ने वाले सभी नालों को साफ कर पुनर्जीवित करने से अरपा नदी में पानी आने लगेगा।
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चखा स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चीला-चटनी, फरा और गुलगुला का आनंद उठाया। उन्होंने ठेठरी, खुरमी, करी-लड्डू आदि व्यंजनों का भी स्वाद चखा। महिला बाल विकास विभाग के स्टाल में मुख्यमंत्री ने पत्तल से बनाये गए स्ट्रॉ की सराहना की।
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त्यौहार के उत्साह को बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने मंच पर चढ़कर सबको हरेली की बधाई दी और अभिवादन किया, साथ ही हाथ पर भौंरा (लट्टू) भी चलाया। बच्चों के लिए पारम्परिक फुगड़ी का खेल, बिल्लस और खो-खो खेल आयोजित किया गया था।
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