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लॉकडाउन में फंसी फूल सी बच्ची..मासूम के दिल में छेद फिर भी दर्द भूल बॉर्डर पर मुस्कुराती रही..

First Published Apr 2, 2020, 1:16 PM IST
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रायपुर, कोरोना के संकट से पूरी दुनिया जूझ रही है। इसस निपटने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन कर दिया है। लेकिन इस लॉकडाउन सबसे ज्यादा असर मजदूरों के साथ-साथ देश के उन लाखों लोगों पर पड़ा रहा है जो पहले से अन्य बीमारी से ग्रासित हैं। हर तरफ नाकेबंदी और पुलिस तैनात है। ऐसे में वो मजबूर दुखी अपना इलाज कराने तक नहीं जा पा रहे हैं। ऐसी ही एक झकझोर देने वाली तस्वीर छत्तीसगढ़ से सामने आई है। जहां एक महज 5 साल की बच्ची इलाज कराने तो निकली, लेकिन वह बॉर्डर पर फंस गई।

दरअसल, इस फूल सी बच्ची का नाम सान्वी है जो अपनी मां मोनाली मेश्राम के साथ महाराष्ट्र के भंडारा शहर से रायपुर इलाज कराने जा रही थी। उसके दिल में छेद है। लेकिन पुलिस ने उसको रोक लिया। मासूम मोबाइल पर गेम खेल और  बॉर्डर पर मजदूरों को देख मुस्कुराती रही। हालांकि महिला की काफी मिन्नचें करने और उससे पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसको इलाज कराने के लिए जाने दिया गया।

दरअसल, इस फूल सी बच्ची का नाम सान्वी है जो अपनी मां मोनाली मेश्राम के साथ महाराष्ट्र के भंडारा शहर से रायपुर इलाज कराने जा रही थी। उसके दिल में छेद है। लेकिन पुलिस ने उसको रोक लिया। मासूम मोबाइल पर गेम खेल और बॉर्डर पर मजदूरों को देख मुस्कुराती रही। हालांकि महिला की काफी मिन्नचें करने और उससे पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसको इलाज कराने के लिए जाने दिया गया।

यह तस्वीर झारखंड की है। टैक्सी में बैठी जिस महिला की गोद में वह बच्ची है उसको ट्यूमर है। माता-पिता अपनी बेटी का ऑपरेशन के बाद घर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में फंस गए।

यह तस्वीर झारखंड की है। टैक्सी में बैठी जिस महिला की गोद में वह बच्ची है उसको ट्यूमर है। माता-पिता अपनी बेटी का ऑपरेशन के बाद घर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में फंस गए।

यह तस्वीर झारखंड के रहने वाले एक परिवार की है। जो काम ठप हो जाने के बाद हैदराबाद से अपने राज्य लौटे हैं। लेकिन उनको राज्य की बॉर्डर पर ही रोक लिया। परिवार के मुखिया रुपेश यादव ने बताया- वो चार दिन से यहां फंसे हैं। प्रशासन कोई खाने की व्यवस्था नहीं कर रहा है। नदी का पानी पीकर और जमीन पर सोकर दिन काट रहे हैं।

यह तस्वीर झारखंड के रहने वाले एक परिवार की है। जो काम ठप हो जाने के बाद हैदराबाद से अपने राज्य लौटे हैं। लेकिन उनको राज्य की बॉर्डर पर ही रोक लिया। परिवार के मुखिया रुपेश यादव ने बताया- वो चार दिन से यहां फंसे हैं। प्रशासन कोई खाने की व्यवस्था नहीं कर रहा है। नदी का पानी पीकर और जमीन पर सोकर दिन काट रहे हैं।

यह तस्वीर छत्तीसगढ़  महाराष्ट्र बॉर्डर की है। जहां सैंकड़ों मजदूरों को यहां रोक लिया गया है। आप फोटो में साफ तौर पर देख सकते हैं कि भोजन लेने के चक्कर में मजदूर सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए।

यह तस्वीर छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र बॉर्डर की है। जहां सैंकड़ों मजदूरों को यहां रोक लिया गया है। आप फोटो में साफ तौर पर देख सकते हैं कि भोजन लेने के चक्कर में मजदूर सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए।

यह तस्वीर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र की सीमा की है। जहां मजदूरों को एक स्कूल में  उनको ठहराया गया है। आप देख सकते हैं कि जब उनको नींद आई तो वह स्कूल की टेबल पर ही सो गए।

यह तस्वीर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र की सीमा की है। जहां मजदूरों को एक स्कूल में उनको ठहराया गया है। आप देख सकते हैं कि जब उनको नींद आई तो वह स्कूल की टेबल पर ही सो गए।

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