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17वें दिन डॉक्टरों ने कमरा खोला..पत्नी और बच्चों को देख भावुक हुए, 5 मिनट बात की और फिर दरवाजा कर लिया बंद

First Published Apr 3, 2020, 9:49 AM IST
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रायपुर, छत्तीसगढ़. यह कहानी कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई का एक हिस्सा है। देशभर से ऐसी कई कहानियां सामने आ रही हैं, जो भावुक करती हैं। लेकिन यह हिंदुस्तानियों का साहस है कि उन्होंने कोरोना संक्रमण को हावी नहीं होने दिया। यह कहानी दो डॉक्टरों से जुड़ी है। वे 16 मार्च से क्वारेंटाइन हैं। 17वें दिन उन्होंने कुछ पल के लिए अपने कमरे का दरवाजा खोला। बाहर उनकी पत्नी और बच्चे खड़े थे। एक-दूसरे को देखकर सभी भावुक हो उठे। करीब 5 मिनट डॉक्टरों ने सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर उनसे बात की और फिर दरवाजा बंद कर लिया। डॉक्टरों को उम्मीद है कि कुछ दिनों बाद वे बाहर निकलेंगे। बता दें कि मेडिकल कॉलेज के ये दोनों डॉक्टर 15 मार्च को जब नई दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे, तो उन्हें 24 घंटे नरेला स्थित क्वारेंटाइन में रखा गया था। हालांकि उनमें कोरोना के लक्षण नहीं मिले थे, फिर भी दोनों ने रायपुर लौटकर खुद को आइसोलेशन में रख लिया था। (आगे पढ़ें इन्हीं दोनों डाक्टरों की कहानी..)

ये दोनों डॉक्टर मार्च के पहले हफ्ते में जर्मनी में एडवांस ट्रेनिंग के लिए गए थे। उस दौरान कोरोना संक्रमण फैल गया था। जर्मनी में हालात खराब होते जा रहे थे। 14 दिनों की ट्रेनिंग के बाद जब ये भारत लौटे, तो स्थिति की गंभीरता को समझते हुए खुद को 16 मार्च से क्वारेंटाइन कर लिया। 17वें दिन जब पत्नी बच्चों से आमना-सामना हुआ, तो भावुक हो उठे। हालांकि दोनों डॉक्टरों ने इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। एक डॉक्टर ने बताया कि वे डुप्लेक्स में रहते हैं। उन्होंने खुद को नीचे वाले फ्लोर में क्वारेंटाइन किया। पत्नी दरवाजे के बाहर खाना रखकर चली जाती है। कुछ देर बाद वे जरा-सा दरवाजा खोलकर थाली अंदर कर लेते हैं। वे मोबाइल के जरिये संपर्क में हैं।

ये दोनों डॉक्टर मार्च के पहले हफ्ते में जर्मनी में एडवांस ट्रेनिंग के लिए गए थे। उस दौरान कोरोना संक्रमण फैल गया था। जर्मनी में हालात खराब होते जा रहे थे। 14 दिनों की ट्रेनिंग के बाद जब ये भारत लौटे, तो स्थिति की गंभीरता को समझते हुए खुद को 16 मार्च से क्वारेंटाइन कर लिया। 17वें दिन जब पत्नी बच्चों से आमना-सामना हुआ, तो भावुक हो उठे। हालांकि दोनों डॉक्टरों ने इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। एक डॉक्टर ने बताया कि वे डुप्लेक्स में रहते हैं। उन्होंने खुद को नीचे वाले फ्लोर में क्वारेंटाइन किया। पत्नी दरवाजे के बाहर खाना रखकर चली जाती है। कुछ देर बाद वे जरा-सा दरवाजा खोलकर थाली अंदर कर लेते हैं। वे मोबाइल के जरिये संपर्क में हैं।

ह तस्वीर नई दिल्ली की है। यहां कोरोना की टेस्टिंग के लिए सेंटर बनाए गए हैं।

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यह तस्वीर नई दिल्ली की है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में डॉक्टरों के अलावा पुलिस भी पूरी शिद्दत से जुटी हुई है।

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कोरोना के साथ मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए भी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

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यह तस्वीर नई दिल्ली की है। सब्जीवाले को उम्मीद है कि जल्द कोरोना संक्रमण के डर से मुक्ति मिलेगी।

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यह तस्वीर नई दिल्ली की है। चेहरे पर रोटी-रोटी की चिंता के भाव हैं, लेकिन कोरोना को हराने का साहस भी।

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शुरुआती अफरा-तफरी के बाद देश के मजदूरों ने जिस संयम का परिचय दिया, वो तारीफ के काबिल है।

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यह अद्भुत तस्वीर यूपी के वाराणसी की है। यहां मुस्लिम महिलाओं ने रामनवमीं पर भगवान राम की आरती उताकर देश और मानवता को बचाने की प्रार्थना की।

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सोशल डिस्टेंसिंग के पालन से ही कोरोना को हराया जा सकता है।

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