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सचिन को कई बार आउट करने वाले खिलाड़ी की हो गई ऐसी हालत, तंगी में कर रहा गुजारा

First Published Jun 14, 2020, 1:54 PM IST
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स्पोर्ट्स डेस्क। आम तौर पर लोग सोचते हैं कि अगर कोई प्लेयर एक बार इंटरनेशनल क्रिकेट खेल ले तो उसके पास दौलत का अंबार लग जाता है। लोगों की यह सोच क्रिकेट खिलाड़ियों की लाइफस्टाइल और उनकी हाई स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग को देख कर बनती है। लेकिन हर मामले में यह सच नहीं होता। भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड जैसे बड़े देशों के खिलाड़ियों को छोड़ दिया जाए, तो गरीब देशों के कई ऐसे खिलाड़ी मिलेंगे जो काफी प्रतिभाशाली होने के बावजूद रिटायर होने पर तंगी में जीवन गुजारने पर मजबूर होते हैं। ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं जिम्बाब्वे के रे प्राइस, जिन्होंने सचिन तेंदुलकर को 3 बार आउट किया था।

बाएं हाथ के बेहतरीन स्पिनर थे रे प्राइस
रे प्राइस बाएं हाथ के बेहतरीन स्पिनर थे। वे गजब की गेंदबाजी करते थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मैचों में बेहद शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने टेस्ट मैचों में 100 विकट लिए, वनडे में 80 और टी20 मैचों में 13 विकेट लिए। 
 

बाएं हाथ के बेहतरीन स्पिनर थे रे प्राइस
रे प्राइस बाएं हाथ के बेहतरीन स्पिनर थे। वे गजब की गेंदबाजी करते थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मैचों में बेहद शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने टेस्ट मैचों में 100 विकट लिए, वनडे में 80 और टी20 मैचों में 13 विकेट लिए। 
 

मुंबई इंडियन्स के लिए खेला
साल 2011 में रे प्राइस ने इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियन्स के लिए खेला। मैचों में काफी सफल रहने के बावजूद उनकी माली हालत बेहतर नहीं हो सकी। क्रिकेट के दूसरे इंटरनेशनल प्लेयर्स की तरह वह पैसे नहीं जुटा सके।

मुंबई इंडियन्स के लिए खेला
साल 2011 में रे प्राइस ने इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियन्स के लिए खेला। मैचों में काफी सफल रहने के बावजूद उनकी माली हालत बेहतर नहीं हो सकी। क्रिकेट के दूसरे इंटरनेशनल प्लेयर्स की तरह वह पैसे नहीं जुटा सके।

रिटायरमेंट के बाद खोली दुकान
साल 2013 में क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद रे प्राइस ने जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में एक स्पोर्ट्स शॉप खोली। इस शॉप में वे बैट, बॉल, ग्लव्ज, पैड्स और स्पोर्ट्स के दूसरे सामान बेचते हैं। इस दुकान से होने वाली आमदनी से ही वे गुजर-बसर कर रहे हैं। 

रिटायरमेंट के बाद खोली दुकान
साल 2013 में क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद रे प्राइस ने जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में एक स्पोर्ट्स शॉप खोली। इस शॉप में वे बैट, बॉल, ग्लव्ज, पैड्स और स्पोर्ट्स के दूसरे सामान बेचते हैं। इस दुकान से होने वाली आमदनी से ही वे गुजर-बसर कर रहे हैं। 

एसी मैकेनिक का भी करते हैं काम
रे प्राइस एसी मैकेनिक भी हैं। बुलाए जाने पर वे घर-घर जाकर एसी ठीक करते हैं। इससे भी उन्हें कुछ एक्स्ट्रा इनकम हो जाती है, लेकिन उनकी कमाई ज्यादा नहीं है। प्राइस रे को तंगी में ही गुजारा करना पड़ता है।
 

एसी मैकेनिक का भी करते हैं काम
रे प्राइस एसी मैकेनिक भी हैं। बुलाए जाने पर वे घर-घर जाकर एसी ठीक करते हैं। इससे भी उन्हें कुछ एक्स्ट्रा इनकम हो जाती है, लेकिन उनकी कमाई ज्यादा नहीं है। प्राइस रे को तंगी में ही गुजारा करना पड़ता है।
 

रे प्राइस से सचिन थे बेहद प्रभावित
रे प्राइस बहुत ही प्रतिभाशाली गेंदबाज थे। साल 2002 में वे भारत के दौरे पर आए थे और नागपुर टेस्ट में दोनों पारियों में उन्होंने सचिन तेंदुलकर का विकेट झटका था। इसके बाद दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में भी उन्होंने सचिन को आउट किया था। सचिन उनकी गेंदबाजी से बेहद प्रभावित थे।

रे प्राइस से सचिन थे बेहद प्रभावित
रे प्राइस बहुत ही प्रतिभाशाली गेंदबाज थे। साल 2002 में वे भारत के दौरे पर आए थे और नागपुर टेस्ट में दोनों पारियों में उन्होंने सचिन तेंदुलकर का विकेट झटका था। इसके बाद दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में भी उन्होंने सचिन को आउट किया था। सचिन उनकी गेंदबाजी से बेहद प्रभावित थे।

सचिन की कप्तानी में आईपीएल में किया डेब्यू
प्राइस रे ने भारत में टेस्ट मैच खेलने के 9 साल बाद 2011 में सचिन की कप्तानी में ही आईपीएल में डेब्यू किया था। सचिन उनकी गेंदबाजी का लोहा मानते हैं। अभी भी सचिन तेंदुलकर और प्राइस रे बहुत ही अच्छे दोस्त हैं।

सचिन की कप्तानी में आईपीएल में किया डेब्यू
प्राइस रे ने भारत में टेस्ट मैच खेलने के 9 साल बाद 2011 में सचिन की कप्तानी में ही आईपीएल में डेब्यू किया था। सचिन उनकी गेंदबाजी का लोहा मानते हैं। अभी भी सचिन तेंदुलकर और प्राइस रे बहुत ही अच्छे दोस्त हैं।

दिल्ली का चिड़ियाघर हमेशा करते हैं याद
रे प्राइस दिल्ली टेस्ट के दौरान चिड़ियाघर घूमने गए थे। वहां एक ऐसी घटना हुई थी, जिसे प्राइस रे हमेशा याद रते हैं। दिल्ली चिड़ियाघर घूमने के दौरान वहां उन्हें हाथियों की देखभाल करने वाले एक कर्मचारी ने पहचान लिया था। उसने रे प्राइस से कहा था कि मेरा बेटा भी बाएं हाथ का स्पिनर है और आपको अपना हीरो मानता है। रे इस बात को कभी नहीं भूल पाए। अपने कई इंटरव्यू में उन्होंने इसका जिक्र किया है।  
 

दिल्ली का चिड़ियाघर हमेशा करते हैं याद
रे प्राइस दिल्ली टेस्ट के दौरान चिड़ियाघर घूमने गए थे। वहां एक ऐसी घटना हुई थी, जिसे प्राइस रे हमेशा याद रते हैं। दिल्ली चिड़ियाघर घूमने के दौरान वहां उन्हें हाथियों की देखभाल करने वाले एक कर्मचारी ने पहचान लिया था। उसने रे प्राइस से कहा था कि मेरा बेटा भी बाएं हाथ का स्पिनर है और आपको अपना हीरो मानता है। रे इस बात को कभी नहीं भूल पाए। अपने कई इंटरव्यू में उन्होंने इसका जिक्र किया है।  
 

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