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फ्री का चला जादू या केजरीवाल का काट नहीं ढूंढ़ पाए... जानें दिल्ली चुनाव में BJP की हार के 8 बड़े कारण

First Published Feb 11, 2020, 2:33 PM IST
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नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव के लिए सभी 70 सीटों के रुझान सामने हैं। बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए इस बार दिल्ली में हरियाणा और झारखंड की गलतियों को दोहराने से बचने की कोशिश की थी। पार्टी ने सहयोगी दलों जनता दल यूनाइटेड और लोकजनशक्ति पार्टी के साथ गठबंधन किया था। शुरुआती ना नौकर के बाद शिरोमणि अकाली दल से भी समर्थन हासिल कर लिया था। मगर रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी को इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ। वैसे 2015 के मुकाबले पार्टी को इस बार ज्यादा सीटें मिल रही हैं, जो चुनाव में किए गए पार्टी के दावों से बेहद कम हैं।
 

आइए उन 9 बड़ी वजहों को जानते हैं जो अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सामने बीजेपी की हार के सबसे बड़े कारण बनकर सामने आ रहे हैं।

आइए उन 9 बड़ी वजहों को जानते हैं जो अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सामने बीजेपी की हार के सबसे बड़े कारण बनकर सामने आ रहे हैं।

#1. दिल्ली में नहीं मिला केजरीवाल के कद का चेहरा :- पार्टी ने चुनाव में अपने दिग्गज नेताओं की पूरी फौज उतार दी, मगर दिल्ली के लिए अरविंद केजरीवाल के मुकाबले मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं खोज पाई। केजरीवाल कैम्पेन में बीजेपी पर हमला भी करते रहे कि उनके यहां मुख्यमंत्री के सात दावेदार हैं। केजरीवाल, बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार को बहस की चुनौती भी देते रहे। उम्मीदवार नहीं देने से यह मैसेज गया कि दिल्ली में बीजेपी के पास केजरीवाल के कद का नेता ही नहीं है।

#1. दिल्ली में नहीं मिला केजरीवाल के कद का चेहरा :- पार्टी ने चुनाव में अपने दिग्गज नेताओं की पूरी फौज उतार दी, मगर दिल्ली के लिए अरविंद केजरीवाल के मुकाबले मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं खोज पाई। केजरीवाल कैम्पेन में बीजेपी पर हमला भी करते रहे कि उनके यहां मुख्यमंत्री के सात दावेदार हैं। केजरीवाल, बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार को बहस की चुनौती भी देते रहे। उम्मीदवार नहीं देने से यह मैसेज गया कि दिल्ली में बीजेपी के पास केजरीवाल के कद का नेता ही नहीं है।

#2. केजरीवाल पर सीधे अटैक ने पहुंचाया नुकसान :- चुनाव में बीजेपी नेताओं ने सीधे केजरीवाल पर हमला किया। उन्हें हिन्दू विरोधी, अक्षम, भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने वाला, देश विरोधी और आतंकी तक बताया गया। हनुमान चालीसा और तमाम मुद्दों को लेकर जिस तरह से केजरीवाल पर हमला किया गया वह बीजेपी के खिलाफ गया।

#2. केजरीवाल पर सीधे अटैक ने पहुंचाया नुकसान :- चुनाव में बीजेपी नेताओं ने सीधे केजरीवाल पर हमला किया। उन्हें हिन्दू विरोधी, अक्षम, भ्रष्टाचार को प्रश्रय देने वाला, देश विरोधी और आतंकी तक बताया गया। हनुमान चालीसा और तमाम मुद्दों को लेकर जिस तरह से केजरीवाल पर हमला किया गया वह बीजेपी के खिलाफ गया।

#3. केजरीवाल की ताकत पर हमला करना उल्टा पड़ा  :- बीजेपी नेताओं ने आक्रामक प्रचार किया मगर उनका बड़बोलपन दिल्ली की जनता को पसंद नहीं आया। कपिल मिश्रा ने दिल्ली के चुनाव को हिंदुस्तान पाकिस्तान का मुक़ाबला करार दे दिया। जिन योजनाओं की वजह से केजरीवाल मजबूत बने उसे लेकर बीजेपी के बड़बोले नेताओं ने आंकड़ेबाजी कर गलत बताते रहे। जनता को लगा कि बीजेपी नेता झूठ बोल रहे हैं। जिन मुद्दों पर केजरीवाल नेता कमजोर थे, बीजेपी नेता हमला करने में नाकामयाब रहे।

#3. केजरीवाल की ताकत पर हमला करना उल्टा पड़ा :- बीजेपी नेताओं ने आक्रामक प्रचार किया मगर उनका बड़बोलपन दिल्ली की जनता को पसंद नहीं आया। कपिल मिश्रा ने दिल्ली के चुनाव को हिंदुस्तान पाकिस्तान का मुक़ाबला करार दे दिया। जिन योजनाओं की वजह से केजरीवाल मजबूत बने उसे लेकर बीजेपी के बड़बोले नेताओं ने आंकड़ेबाजी कर गलत बताते रहे। जनता को लगा कि बीजेपी नेता झूठ बोल रहे हैं। जिन मुद्दों पर केजरीवाल नेता कमजोर थे, बीजेपी नेता हमला करने में नाकामयाब रहे।

#4. नहीं ढूंढ पाए केजरीवाल की फ्री योजनाओं की काट :- पूरे चुनाव मे बीजेपी नेता केजरीवाला पर आक्रामक हमला करते रहे मगर, आखिर तक केजरीवाल की लोकप्रिय फ्री और सब्सिडाइज्ड योजनाओं (बिजली, पानी, हेल्थ और एजुकेशन) की काट ही नहीं ढूढ़ पाए।

#4. नहीं ढूंढ पाए केजरीवाल की फ्री योजनाओं की काट :- पूरे चुनाव मे बीजेपी नेता केजरीवाला पर आक्रामक हमला करते रहे मगर, आखिर तक केजरीवाल की लोकप्रिय फ्री और सब्सिडाइज्ड योजनाओं (बिजली, पानी, हेल्थ और एजुकेशन) की काट ही नहीं ढूढ़ पाए।

#5. स्थानीय मुद्दों को भूल ही गए बड़े नेता :- विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पार्टी के दिग्गज नेताओं की फौज उतार दी। केंद्रीय नेताओं के उतारने का एक बुरा असर यह रहा कि दिल्ली के चुनाव में स्थानीय मुद्दों की जगह राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा हावी हो गए। बीजेपी के बड़े नेता जहां नागरिकता कानून, धारा 370, हिन्दुत्व और पाकिस्तान जैसे टोपिक्स में उलझे रहे, वहीं आम आदमी पार्टी लगातार स्कूल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और प्रदूषण के मुद्दे को बेहतर बनाने की बात करती रही।

#5. स्थानीय मुद्दों को भूल ही गए बड़े नेता :- विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पार्टी के दिग्गज नेताओं की फौज उतार दी। केंद्रीय नेताओं के उतारने का एक बुरा असर यह रहा कि दिल्ली के चुनाव में स्थानीय मुद्दों की जगह राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा हावी हो गए। बीजेपी के बड़े नेता जहां नागरिकता कानून, धारा 370, हिन्दुत्व और पाकिस्तान जैसे टोपिक्स में उलझे रहे, वहीं आम आदमी पार्टी लगातार स्कूल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और प्रदूषण के मुद्दे को बेहतर बनाने की बात करती रही।

#6. खल गई पंजाबी चेहरों की कमी:- कैम्पेन में बीजेपी के पास नेताओं की फौज थी, मगर इस बार दिल्ली यूनिट में पार्टी के पास बड़ा पंजाबी चेहरा नहीं था। रुझना बता रहे हैं कि ये कमी पार्टी को भारी पड़ गई। कभी दिल्ली में बीजेपी के पास मदनलाल खुराना और विजय कुमार मल्होत्रा जैसे दिग्गज चेहरे थे।

#6. खल गई पंजाबी चेहरों की कमी:- कैम्पेन में बीजेपी के पास नेताओं की फौज थी, मगर इस बार दिल्ली यूनिट में पार्टी के पास बड़ा पंजाबी चेहरा नहीं था। रुझना बता रहे हैं कि ये कमी पार्टी को भारी पड़ गई। कभी दिल्ली में बीजेपी के पास मदनलाल खुराना और विजय कुमार मल्होत्रा जैसे दिग्गज चेहरे थे।

#7. पुराने चेहरे पड़े फीके :- बीजेपी ने चुनाव में इस बार पुराने और ज़्यादातर पिछला चुनाव हारने वाले नेताओं को उम्मीदवारों बनाया। रुझना में दिख रहा है कि पार्टी के पुराने चेहरे कोई कमाल नहीं दिखा पाए।

#7. पुराने चेहरे पड़े फीके :- बीजेपी ने चुनाव में इस बार पुराने और ज़्यादातर पिछला चुनाव हारने वाले नेताओं को उम्मीदवारों बनाया। रुझना में दिख रहा है कि पार्टी के पुराने चेहरे कोई कमाल नहीं दिखा पाए।

#8.  व्यापारियों की नाराजगी महंगी पड़ी:- दिल्ली में व्यापारी बीजेपी का कोर वोट बैंक रहे हैं। मगर इस बार चुनाव में एक हद तक उनकी नाराजगी बीजेपी के साथ थी। रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी व्यापारियों को पूरी तरह से भरोसे में नहीं ले पाई।

#8. व्यापारियों की नाराजगी महंगी पड़ी:- दिल्ली में व्यापारी बीजेपी का कोर वोट बैंक रहे हैं। मगर इस बार चुनाव में एक हद तक उनकी नाराजगी बीजेपी के साथ थी। रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी व्यापारियों को पूरी तरह से भरोसे में नहीं ले पाई।

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