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सड़ने लगी थी स्किन और हड्डियां, धीरे-धीरे फटने रह थी खोपड़ी, आखिर में डॉक्टरों को करना पड़ा दुर्लभ ऑपरेशन

First Published Jan 1, 2021, 10:05 AM IST
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अहमदाबाद, गुजरात. यह कोई पेंटिंग नहीं है! एक घातक रोग से 79 वर्षीय शख्स को बचाने के लिए ऐसा करना पड़ा। इस शख्स को बेसल सेल कार्सिनोमा यानी एक तरह का अल्सर हो गया था। नतीजा, उसकी त्वचा और हड्डियां सड़ने लगी थीं। अल्सर धीरे-धीरे खोपड़ी को फाड़ने की स्थिति में आता जा रहा था। आखिर में डॉक्टरों ने उसके सिर(स्कल) का एक दुर्लभ ऑपरेशन किया। इसमें सिर पर प्लास्टि सर्जरी करके नई त्वचा लगाई गई। बता दें कि नवीनचंद्र पिछले 6 महीने से सिर दर्द से परेशान थे। जांच में पता चला कि अल्सर करीब दो सेमी का था, जो 6 महीने में बढ़कर उनके सिर तक पहुंच गया था। यह ऑपरेशन अहमदाबाद के जीसीएस हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. कुशल शाह और प्लास्टिक-कॉस्मेटिक रिकंसट्रक्टिव सर्जन डॉ. प्रमोद मेनन ने किया। ऑपरेशन में खराब स्किन को गांठ सहित बाहर निकाल गया। इसके बाद संक्रमित हड्डी को निकालकर सिर को नई त्वचा देने प्लास्टिक सर्जरी की गई। ऑपरेशन के करीब तीन महीने बाद मरीज अब पूरी तरह ठीक है। आगे पढ़िए क्या है बेसल सेल कार्सिनोमा...

बेसल सेल कार्सिनोमा एक तरह का कैंसर है, जो स्किन के ऊपरी हिस्से में होता है। यह मानव शरीर की बेसल सेल कार्सिनोमा कोशिकाओं में होता है। ये कोशिकाएं नई त्वचा कोशिकाओं को जन्म देती हैं। बता दें कि शरीर में निरंतर पुरानी कोशिकाएं मरती रहती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं लेती रहती हैं।

बेसल सेल कार्सिनोमा एक तरह का कैंसर है, जो स्किन के ऊपरी हिस्से में होता है। यह मानव शरीर की बेसल सेल कार्सिनोमा कोशिकाओं में होता है। ये कोशिकाएं नई त्वचा कोशिकाओं को जन्म देती हैं। बता दें कि शरीर में निरंतर पुरानी कोशिकाएं मरती रहती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं लेती रहती हैं।

बेसल सेल कार्सिनोमा कैंसर त्वचा के नीचे मौजूद हड्डियों या टीशू को संक्रमित करता है। आमतौर पर यह नाक या चेहरे के किसी हिस्से से शुरू होता है। यह कैंसर बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ता है। जो लोग सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में और लंबे समय तक रहते हैं, उन्हें कम उम्र में भी यह कैंसर हो सकता है। इससे त्वचा पर घाव बन जाता है, जो आम उपचार से ठीक नहीं होता।

बेसल सेल कार्सिनोमा कैंसर त्वचा के नीचे मौजूद हड्डियों या टीशू को संक्रमित करता है। आमतौर पर यह नाक या चेहरे के किसी हिस्से से शुरू होता है। यह कैंसर बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ता है। जो लोग सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में और लंबे समय तक रहते हैं, उन्हें कम उम्र में भी यह कैंसर हो सकता है। इससे त्वचा पर घाव बन जाता है, जो आम उपचार से ठीक नहीं होता।

बेसल सेल कार्सिनोमा कैंसर के लक्षण: इसमें त्वचा पीयरली व्हाइट या लाइट पिंक की तरह चमकती है।  इसमें  रक्त वाहिकाएं (blood vessels) साफ दिखाई देने लगती हैं। इसमें घाव फटने लगता है और खून रिसने लगता है।

बेसल सेल कार्सिनोमा कैंसर के लक्षण: इसमें त्वचा पीयरली व्हाइट या लाइट पिंक की तरह चमकती है।  इसमें  रक्त वाहिकाएं (blood vessels) साफ दिखाई देने लगती हैं। इसमें घाव फटने लगता है और खून रिसने लगता है।

बेसल सेल कार्सिनोमा के कारण: अगर आप यूवी किरणों के संपर्क में अधिक आए हों। यह अल्सर से शुरू होकर घातक कैंसर में बदल सकता है।

बेसल सेल कार्सिनोमा के कारण: अगर आप यूवी किरणों के संपर्क में अधिक आए हों। यह अल्सर से शुरू होकर घातक कैंसर में बदल सकता है।

अगर आपको स्किन में कोई बदलाव यानी दाग-धब्बा दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

अगर आपको स्किन में कोई बदलाव यानी दाग-धब्बा दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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