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रांची में इटली जैसा मंजर: श्मशानों में जगह कम पड़ी तो सड़क पर जलने लगीं चिताएं, शवों की लगी कतारें
रांची. पूरे देश में कोरोना इस तरह से तबाही मचा रहा है कि हालात पहले से ज्यादा खराब हो गए हैं। संक्रमण की दूसरी लहर रोज हजारों जिंदगियां लील रहा है। झारखंड की राजधानी रांची में रविवार को इटली जैसा मंजर देखने को मिला है, जहां सभी श्मशान घाट और कब्रिस्तान शवों से फुल हो चुके थे। अंतिम संस्कार करने पहुंचे लोगों को मुक्तिधाम में इतनी भी जगह नहीं मिली कि वह डेडबॉडी की चिता जला सके। कई घंटों के इतजार के बाद भी उन्हें शव लेकर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई ही जो बेहद डरावनी है। जहां लोग बीच सड़क पर चिता सजाकर शव जलाने लगे।

दरअसल, रविवार को रांची में 60 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। शहर के अलग-अलग श्मशान घाट में यह चिताएं जलाई गईं। जिसके बाद भी जगह कम पड़ने लगी। इतना ही नहीं 12 शव कोरोना संक्रमितों के थे जिनका अंतिम संस्कार घाघरा में सामूहिक चिता जलकार किया गया। वहीं 35 शव 5 श्मशान घाटों पर जलाए गए। जबकि 13 शवों को कब्रिस्तान में दफन किया गया। बता दें कि सबसे ज्यादा शवों का दाह संस्कार हरमू मुक्ति धाम में हुआ।
कुछ लोगों को जब श्मशान में जगह नहीं मिली तो उन्होंने मुक्तिधाम के सामने की सड़क पर वाहनों की पार्किंग में ही शव रखकर अंतिम क्रिया करने लगे। क्योंकि मृतकों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि श्मशान घाट में चिता जलाने की जगह कम पड़ गई।
हरमू श्मशान घाट में पिछले कई सालों से शवों का अतिंम संस्कार करने वाले राजू राम ने कहा- मैंने ऐसा भयानक मंजर अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं देखा। लोग अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। अर्थियों की लंबी कतार लही हुई थी, कुछ शव सड़क पर ही रखे हुए थे। जहां लोग जहां गाड़ियां पार्क करते हैं, वहां भी शव जलाने पड़े।
शहर के लोग नगर निगम और सरकार की व्यवस्थाओं से नाराज हैं। उनका कहना है कि पहले अस्पताल में बेड के लिए जद्दोजहद और उसके बाद दाह संस्कार के लिए भी कतार लगानी पड़ेगी ऐसा सोचा नहीं था। किसी मुक्ति धाम में पहुंचे तो वहां विद्युत शव दाह गृह में मशीन के खराब हो जाने के कारण इंतजार करना पड़ा। तो कहीं शवों की लंबी कतार से विटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ा। कोरोना को देखते हुए प्रशासन को कोई दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
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