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जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा नहीं, कोई जाना नहीं: लॉकडाउन की कुछ इमोशनल तस्वीरें

First Published Apr 17, 2020, 10:27 AM IST
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गुमला, झारखंड. जिंदगी कब..किसी मोड़ पर ले आए, कोई नहीं जानता। ये तस्वीरें जिंदगी के इन्हीं पलों को दिखाती हैं। लॉकडाउन ने मानों जिंदगी का पहिया ही जाम कर दिया हो। लेकिन इंसान कभी हार भी नहीं मानता। ये तस्वीरें लॉकडाउन के दौरान आवागमन बंद होने से पैदा हुई दिक्कतों और संक्रमण के चलते लोगों के बीच पैदा हुईं दूरियों को दिखाती हैं।

झारखंड के गुमला की यह तस्वीर मजबूरी और गरीबी दोनों को दिखाती है। बिशुनपुर प्रखंड के जालिम गांव की इस 70 वर्षीय तेतरी उरांइन को वृद्धा पेंशन के लिए उसके परिजन 15 किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते से बिशुनपुर कॉपरेटिव बैंक लाए। फिर इसी तरह वापस भी ले गए। लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई साधन हीं मिला। दूसरा, मामूली पेंशन के लिए प्राइवेट वाहन करना मुमकिन नहीं था। जितनी पेंशन है, उससे ज्यादा गाड़ी का किराया लग जाता।

झारखंड के गुमला की यह तस्वीर मजबूरी और गरीबी दोनों को दिखाती है। बिशुनपुर प्रखंड के जालिम गांव की इस 70 वर्षीय तेतरी उरांइन को वृद्धा पेंशन के लिए उसके परिजन 15 किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते से बिशुनपुर कॉपरेटिव बैंक लाए। फिर इसी तरह वापस भी ले गए। लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई साधन हीं मिला। दूसरा, मामूली पेंशन के लिए प्राइवेट वाहन करना मुमकिन नहीं था। जितनी पेंशन है, उससे ज्यादा गाड़ी का किराया लग जाता।

यह तस्वीर बिहार के नवादा की है। गुरुवार को हिसुआ शहर की रहने वाली विधवा रेखा  भदानी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। कोरोना के डर से न के बराबर लोग उनके अंतिम संस्कार में आए। हालांकि यह जरूरी भी था। कुछ साल पहले उनके पति का भी बीमारी के बाद निधन हो गया था। ऐसे में 10 साल की बेटी ने मां की अर्थी को कंधा दिया।

यह तस्वीर बिहार के नवादा की है। गुरुवार को हिसुआ शहर की रहने वाली विधवा रेखा  भदानी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। कोरोना के डर से न के बराबर लोग उनके अंतिम संस्कार में आए। हालांकि यह जरूरी भी था। कुछ साल पहले उनके पति का भी बीमारी के बाद निधन हो गया था। ऐसे में 10 साल की बेटी ने मां की अर्थी को कंधा दिया।

यह तस्वीर केरल के तिरुवनंतपुरम की है। यहां के पनलूर शहर में 63 साल के बीमार पिता को उसका बेटा 1 किमी दूर खड़े रिक्शे तक यूं पीठ पर लादकर ले गया। रिक्शेवाले को पुलिस ने घर से दूर रोक दिया था। इसे लेकर केरल मानवाधिकार आयोग ने पुलिस की आलोचना की है।
 

यह तस्वीर केरल के तिरुवनंतपुरम की है। यहां के पनलूर शहर में 63 साल के बीमार पिता को उसका बेटा 1 किमी दूर खड़े रिक्शे तक यूं पीठ पर लादकर ले गया। रिक्शेवाले को पुलिस ने घर से दूर रोक दिया था। इसे लेकर केरल मानवाधिकार आयोग ने पुलिस की आलोचना की है।
 

यह तस्वीर हरियाणा के करनाल जिले की है। यह युवक अपनी भाभी को डॉक्टर के पास लेकर जा रहा था। इसी दौरान निसिंग पुलिस ने उसे रोक लिया और मेढक चाल चलवाई। इसका वीडियो जब वायरल हुआ, तो एसपी ने दोनों पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया था।

यह तस्वीर हरियाणा के करनाल जिले की है। यह युवक अपनी भाभी को डॉक्टर के पास लेकर जा रहा था। इसी दौरान निसिंग पुलिस ने उसे रोक लिया और मेढक चाल चलवाई। इसका वीडियो जब वायरल हुआ, तो एसपी ने दोनों पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया था।

यह तस्वीर गुजरात के जेतपुर की है। यहां एक विधवा मां को एक्सीडेंट में घायल अपने बेटे को हाथ ठेले पर लिटाकर हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि वो एम्बुलेंस का किराया दे सकें।

यह तस्वीर गुजरात के जेतपुर की है। यहां एक विधवा मां को एक्सीडेंट में घायल अपने बेटे को हाथ ठेले पर लिटाकर हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि वो एम्बुलेंस का किराया दे सकें।

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