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मां की मौत के बाद भी ड्यूटी करता रहा डॉ. बेटा, बोला जिसे जाना था चला गया मरीजों को बचाना मेरा फर्ज

First Published Apr 2, 2020, 3:25 PM IST
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रायसेन (मध्य प्रदेश). कोरोना सक्रमित व्यक्ति से उसके अपने तक दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे हालातों में डॉक्टर अपनी जान पर खेलकर दिन रात कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने पिछले कई दिनों से अपने परिवारवालों तक का भी चेहरा नहीं देखा है। वह इस समय कर्तव्य पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं। इसलिए तो  शायद उन्हें धरती का भगवान कहा जाता है। एक ऐसी ही मानवता की मिसाल पेश की है एक एमपी के डॉक्टर ने। जिससी मां की मौत होने के बाद भी वह घर नहीं गया। 

दरअसल, यह मामला रायसेन जिले के देवरी तहसील के एक अस्पताल में बुधवार को सामने आया। जहां पर डॉ. केके सिलावट की कोरोना वायरस के चलते ड्यूटी लगी है। डॉक्टर साहब किसी मरीज को देख रहे थे। इसी दौरान उनके भाई का फोन आया कहा-भैया घर आ जाओ मां का निधन हो गया है। डॉक्टर ने कहा-आप अभी देख लो मैं मरीजों का इलाज कर रहा हूं और ड्यूटी पूरी करने के बाद शाम 5 बजे तक ही घर आऊंगा। बता दें कि डॉ. केके सिलावट की मां गिरिजाबाई सिलावट का  भोपाल की एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया है। डॉक्टर ने अपने घरवालों से  अंतिम यात्रा में कम से कम लोगों के शामिल होने की अपील की है। हालांकि गुरुवार के दिन अंतिम संस्कार किया जाएगा।

दरअसल, यह मामला रायसेन जिले के देवरी तहसील के एक अस्पताल में बुधवार को सामने आया। जहां पर डॉ. केके सिलावट की कोरोना वायरस के चलते ड्यूटी लगी है। डॉक्टर साहब किसी मरीज को देख रहे थे। इसी दौरान उनके भाई का फोन आया कहा-भैया घर आ जाओ मां का निधन हो गया है। डॉक्टर ने कहा-आप अभी देख लो मैं मरीजों का इलाज कर रहा हूं और ड्यूटी पूरी करने के बाद शाम 5 बजे तक ही घर आऊंगा। बता दें कि डॉ. केके सिलावट की मां गिरिजाबाई सिलावट का भोपाल की एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया है। डॉक्टर ने अपने घरवालों से अंतिम यात्रा में कम से कम लोगों के शामिल होने की अपील की है। हालांकि गुरुवार के दिन अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मानवता का ऐसा ही एक मामला उड़ीशा में देखने को मिला था। यह मामला है उड़ीशा के संबलपुर जिले का है। जहां के सहायक संभागीय चिकत्सा अधिकारी डॉक्टर अशोक दास की 80 साल की मां का 17 मार्च को निधन हो गया था। शोक जताने के लिए आसपास के लोग और रिश्तेदार उनके घर पर पहुंच चुके थे। इसी दौरान उनकी अस्पताल से फोन आ गया और वह कोरोना के मरीजों का इलाज करने और उनको इससे बचने के लिए ड्यूटी पर पहुंच गए। ड्यूटी करने के बाद जब शाम को डॉक्टर अशोक दास घर पहुंचे तब उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया। यह सीन देखने लायक था, उनके घरवाले देखकर हैरान थे और यही बोल रहे थे कि हर कोई आपस नहीं होता डॉ. साहब।

मानवता का ऐसा ही एक मामला उड़ीशा में देखने को मिला था। यह मामला है उड़ीशा के संबलपुर जिले का है। जहां के सहायक संभागीय चिकत्सा अधिकारी डॉक्टर अशोक दास की 80 साल की मां का 17 मार्च को निधन हो गया था। शोक जताने के लिए आसपास के लोग और रिश्तेदार उनके घर पर पहुंच चुके थे। इसी दौरान उनकी अस्पताल से फोन आ गया और वह कोरोना के मरीजों का इलाज करने और उनको इससे बचने के लिए ड्यूटी पर पहुंच गए। ड्यूटी करने के बाद जब शाम को डॉक्टर अशोक दास घर पहुंचे तब उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया। यह सीन देखने लायक था, उनके घरवाले देखकर हैरान थे और यही बोल रहे थे कि हर कोई आपस नहीं होता डॉ. साहब।

तीन दिन पहले मध्य प्रदेश के दमोह में लॉक डाउन के दौरान एक पुलिसकर्मी के बेटी की मौत का भावुक करने वाला मामला सामने आया था। जहां पुलिसकर्मी पिता इसके लिए खुद को कोस रहा है। वह लॉकडाउन के दौरान अपने घर-परिवार की फिक्र छोड़कर मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहा था। बता दें कि उसकी 14 साल की बेटी की एक बीमारी के चलते मौत हो गई थी।

तीन दिन पहले मध्य प्रदेश के दमोह में लॉक डाउन के दौरान एक पुलिसकर्मी के बेटी की मौत का भावुक करने वाला मामला सामने आया था। जहां पुलिसकर्मी पिता इसके लिए खुद को कोस रहा है। वह लॉकडाउन के दौरान अपने घर-परिवार की फिक्र छोड़कर मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहा था। बता दें कि उसकी 14 साल की बेटी की एक बीमारी के चलते मौत हो गई थी।

ये हैं भोपाल के सीएमएचओ डॉक्टर सुधीर डेहरिया जो कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वो 5 दिन बाद थोड़े समय के लिए अपने घर आए थे उन्होंने बाहर ही बैठकर पत्नी और बच्चों से मुलाकात की और चाय पी। लेकिन घर के अंदर नहीं गए, क्योंकि उनको इलाज करने जाना था।

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तस्वीर में दिखाई देने वाली यह हैं ,नर्स पूनम रानी है जो राजस्थान के झुंझुनूं जिले की रहने वाली है। कोरोना के इस संकट के समय पूनम  जयपुर के एसएमएस अस्पताल ड्यूटी कर रही हैं।  पूनम पिछले 18 दिन से अपने घर नहीं गई हैं। इस दौरान उन्होंने अपने 13 महीने के बेटो को भी नहीं देखा है।

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