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Dussehra 2020: यहां रावण की होती है पूजा, घूंघट में रहती हैं महिलाएं..जानें क्या है खास रिश्ता

First Published Oct 25, 2020, 11:32 AM IST
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मंदसौर (मध्य प्रदेश). 25 अक्टूबर यानि आज पूरे भारत देश में दशहरा मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार हर साल की तरह विजयादशमी की ऐसी भव्यता नहीं देखने को मिलेगी। क्योंकि कोरोना महामारी ने दशहरे की उमंग जो छीन ली है। बता दें कि मध्य प्रदेश में एक जगह ऐसी है जहां पर रावण का दहन नहीं किया जाता है। बल्कि यहां की महिलाएं तो उसको देखती तक नहीं हैं। घूंघट डालकर ही रावण की प्रतिमा के सामने से गुजरती हैं।

रावण की उतारी जाती है आरती
दरअसल, यह अनोखा नजारा मंदसौर जिले का खानपूरा क्षेत्र में हर साल दशहरे के दिन देखने को मिलता है। जहां रावण को भगवान की तरह हर घर में पूजा जाता है। इस दिन यहां पर महिलाएं हाथों में आरती की थाली लिए, ढोल नगाड़े बजाते हुए रावण की प्रतिमा की आरती उतारती हैं।

रावण की उतारी जाती है आरती
दरअसल, यह अनोखा नजारा मंदसौर जिले का खानपूरा क्षेत्र में हर साल दशहरे के दिन देखने को मिलता है। जहां रावण को भगवान की तरह हर घर में पूजा जाता है। इस दिन यहां पर महिलाएं हाथों में आरती की थाली लिए, ढोल नगाड़े बजाते हुए रावण की प्रतिमा की आरती उतारती हैं।

घूंघट में रहती हैं महिलाएं
बता दें कि इस क्षेत्र के नामदेव समाज के लोग इस परंपरा को पिछले 400 सालों से निभाते चले आ रहे हैं। जहां वह रावण की पत्नी मंदोदरी को अपनी बेटी मानते हैं। जिस कारण यहां की महिलाएं रावण को अपना दामाद यानि जमाई मानती हैं। इसलिए इस दिन वह रावण के सामने आते ही सिर पर घूंघट डाल लेती हैं।

घूंघट में रहती हैं महिलाएं
बता दें कि इस क्षेत्र के नामदेव समाज के लोग इस परंपरा को पिछले 400 सालों से निभाते चले आ रहे हैं। जहां वह रावण की पत्नी मंदोदरी को अपनी बेटी मानते हैं। जिस कारण यहां की महिलाएं रावण को अपना दामाद यानि जमाई मानती हैं। इसलिए इस दिन वह रावण के सामने आते ही सिर पर घूंघट डाल लेती हैं।


इसलिए रावण को  मानते हैं दामाद
बताया जाता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था और यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था। स्थानीय कर्मकांडी विद्वान श्याम पंड्या का कहना है कि एक मान्यता है कि मंदोदरी नामदेव समाज की ही बेटी थीं, इसलिए रावण को दामाद की तरह सम्मान दिया जाता है और उसकी पूजा भी की जाती है। इसके अलावा विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए भी यहां रावण की पूजा की जाती है। जहां लोग पहले रावण से पूरे साल की क्षमा मांगते हैं


इसलिए रावण को  मानते हैं दामाद
बताया जाता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था और यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था। स्थानीय कर्मकांडी विद्वान श्याम पंड्या का कहना है कि एक मान्यता है कि मंदोदरी नामदेव समाज की ही बेटी थीं, इसलिए रावण को दामाद की तरह सम्मान दिया जाता है और उसकी पूजा भी की जाती है। इसके अलावा विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए भी यहां रावण की पूजा की जाती है। जहां लोग पहले रावण से पूरे साल की क्षमा मांगते हैं

यहां पर रावण का मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर 41 फीट ऊंची प्रतिमा रखी हुई है। 

यहां पर रावण का मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर 41 फीट ऊंची प्रतिमा रखी हुई है। 

रावण को राजस्थान के जोधपुर शहर में कुछ समाज के लोग भी भगवान की तरह पूजा करते हैं। जहां वह लोग रावण को अपना वंशज मानते हैं। यहां पर एक विशाल मंदिर भी बना हुआ है।
 

रावण को राजस्थान के जोधपुर शहर में कुछ समाज के लोग भी भगवान की तरह पूजा करते हैं। जहां वह लोग रावण को अपना वंशज मानते हैं। यहां पर एक विशाल मंदिर भी बना हुआ है।
 


तस्वीर में दिखाई दे रहा यह मंदिर आंध्रप्रदेश के काकिनाड में बना हुआ है। जहां पर  रावण बड़ी प्रतिमा मंदिर में रखी हुई है। लोग रावण को भगवान मानते हैं। दशहरे के दिन धूमधाम से भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा करते हैं।


तस्वीर में दिखाई दे रहा यह मंदिर आंध्रप्रदेश के काकिनाड में बना हुआ है। जहां पर  रावण बड़ी प्रतिमा मंदिर में रखी हुई है। लोग रावण को भगवान मानते हैं। दशहरे के दिन धूमधाम से भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा करते हैं।

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