मेडिकल कॉलेज की महिला फार्मासिस्ट की मौत, 3 साल के बेटे को घर छोड़ निभा रही थी डयूटी का फर्ज

First Published 8, Apr 2020, 6:28 PM

शिवपुरी (मध्य प्रदेश). मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं इससे अब तक 23 की मौत भी हो चुकी है। इसी बीच एक दुखद खबर समाने आई है। जहां शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में पदस्थ महिला फार्मासिस्ट की वंदना तिवारी की मंगलवार को ग्वालियर के बिड़ला अस्पताल में मौत हो गई। सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि वंदना 3 साल के बच्चे को घर छोड़ अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल कर रही थी। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. इला गुजारिया ने बताया कि वंदना तिवारी गर्ल्स हॉस्टल में केयर टेकर का काम करती थीं। तबियत खराब होने पर पति उसको ग्वालियर लेकर चले गए थे।

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि शिवपुरी में ड्यूटी के दौरान 31 मार्च की रात को वंदना को ब्रेन हेमरेज हो गया था। जहां उसको अगले दिन ग्वालियर के  बिड़ला हॉस्पिटल ले गए थे।

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि शिवपुरी में ड्यूटी के दौरान 31 मार्च की रात को वंदना को ब्रेन हेमरेज हो गया था। जहां उसको अगले दिन ग्वालियर के बिड़ला हॉस्पिटल ले गए थे।

जानकारी के मुताबिक, 2 दिन से वंदना कोमा में थी। लेकिन, मंगलवार उसने दम तोड़ दिया। हालांकि हकीकत क्या थी, इसकी जांच होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी। क्या वंदना तिवारी कोरोना के मरीजों की देखरेख कर रही थी या फिर कॉलेज डीन डॉ. इला गुजारिया के बताए अनुसार वो गर्ल्स हॉस्टल में केयर टेकर का काम करती थी।

जानकारी के मुताबिक, 2 दिन से वंदना कोमा में थी। लेकिन, मंगलवार उसने दम तोड़ दिया। हालांकि हकीकत क्या थी, इसकी जांच होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी। क्या वंदना तिवारी कोरोना के मरीजों की देखरेख कर रही थी या फिर कॉलेज डीन डॉ. इला गुजारिया के बताए अनुसार वो गर्ल्स हॉस्टल में केयर टेकर का काम करती थी।

सोशल मीडिया पर लोग प्रदेश सरकार और ग्वालियर प्रशासन पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। वहीं एक भोपाल के अखबार ने लिखा है।  ''वंदना के पति ने बताया कि ऑन ड्यूटी उसकी तबीयत खराब हुई थी। वंदना के विभाग ने उनकी कोई मदद नहीं की। कलेक्टर ने हाल चाल तक नहीं पूछा। मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. इला गुजरिया सिर्फ मदद करने का आश्वासन देती रहीं। लेकिन कोई मदद नहीं की। ग्वालियर में डॉक्टरों ने सही तरीके से इलाज नहीं किया। ग्वालियर कलेक्टर और ग्वालियर कमिश्नर ने कोई मदद नहीं की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। अंततः वंदना तिवारी ने दम तोड़ दिया।

सोशल मीडिया पर लोग प्रदेश सरकार और ग्वालियर प्रशासन पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। वहीं एक भोपाल के अखबार ने लिखा है। ''वंदना के पति ने बताया कि ऑन ड्यूटी उसकी तबीयत खराब हुई थी। वंदना के विभाग ने उनकी कोई मदद नहीं की। कलेक्टर ने हाल चाल तक नहीं पूछा। मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. इला गुजरिया सिर्फ मदद करने का आश्वासन देती रहीं। लेकिन कोई मदद नहीं की। ग्वालियर में डॉक्टरों ने सही तरीके से इलाज नहीं किया। ग्वालियर कलेक्टर और ग्वालियर कमिश्नर ने कोई मदद नहीं की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। अंततः वंदना तिवारी ने दम तोड़ दिया।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को 50 लाख का बीमा कवर दिया है। इसकी जानकारी खुद राज्य के सीएम शिवराज सिंह ने एक एक विज्ञापन के जरिए दी है। इस विज्ञापन में लिखा है, कोरोना से संघर्ष में जुटे योद्धाओं की सुरक्षा, भारत सरकार द्वारा कोविड-19 से लड़ रहे सभी स्वास्थ्यकर्मियों का 50 लाख रुपये का बीमा कर दिया गया है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को 50 लाख का बीमा कवर दिया है। इसकी जानकारी खुद राज्य के सीएम शिवराज सिंह ने एक एक विज्ञापन के जरिए दी है। इस विज्ञापन में लिखा है, कोरोना से संघर्ष में जुटे योद्धाओं की सुरक्षा, भारत सरकार द्वारा कोविड-19 से लड़ रहे सभी स्वास्थ्यकर्मियों का 50 लाख रुपये का बीमा कर दिया गया है।

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