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4 दिन के बच्चे को लेकर भूखे पेट 2500 किमी के सफर पर निकल पड़ी मजदूर मां,मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती तस्वीरें

First Published May 14, 2020, 10:16 AM IST
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भोपाल, मध्य प्रदेश. लॉकडाउन ने लोगों की जिंदगियां बेपटरी कर दी हैं। हजारों मजदूर काम-धंधा बंद होने से अपने घरों को लौट रहे हैं। किसी को मनमाने किराये पर साधन मिल रहे हैं, तो किसी को पैदल ही चलना पड़ रहा है। यह तस्वीर मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है। सरकारी इंतजामों की कलई खोलती है। यह हैं पश्चिम बंगाल के मालदा की खातून। ये काम-धंधा बंद होने के बाद अपने घर को लौट रही थीं। वे भूखी थीं। गोद में 4 दिन का बच्चा था। लेकिन उन्हें किसी ने रास्ते में खाना नहीं खिलाया। जब वे मप्र की सीमा में पहुंचीं, तब उन्हें खाना नसीब हुआ।
 

खातून ने कहा कि भूख के कारण उनका बुरा हाल था। वहीं, उन्हें डर था कि अगर दूध न उतरा, तो बच्चा क्या पीयेगा? आगे देखें ऐसी ही तस्वीरें...
 

खातून ने कहा कि भूख के कारण उनका बुरा हाल था। वहीं, उन्हें डर था कि अगर दूध न उतरा, तो बच्चा क्या पीयेगा? आगे देखें ऐसी ही तस्वीरें...
 

यह तस्वीर नई दिल्ली की है। पैदल चलकर थककर यूं रास्ते में सो गए मां-बेटे।

यह तस्वीर नई दिल्ली की है। पैदल चलकर थककर यूं रास्ते में सो गए मां-बेटे।

यह तस्वीर पुणे की है। लोग ट्रक पर यूं चढ़े..जैसे वे इंसान नहीं, सामान हों।
 

यह तस्वीर पुणे की है। लोग ट्रक पर यूं चढ़े..जैसे वे इंसान नहीं, सामान हों।
 

गाजियाबाद से मध्य प्रदेश के लिए निकलते समय चेकिंग पाइंट पर अपनी बारी का इंतजार करती एक मां।

गाजियाबाद से मध्य प्रदेश के लिए निकलते समय चेकिंग पाइंट पर अपनी बारी का इंतजार करती एक मां।

यह तस्वीर गुरुग्राम की है। सिर पर बोझ और गोद में बच्चा..एक मां के लिए कितनी तकलीफभरी राह होगी यह।
 

यह तस्वीर गुरुग्राम की है। सिर पर बोझ और गोद में बच्चा..एक मां के लिए कितनी तकलीफभरी राह होगी यह।
 

यह तस्वीर गुरुग्राम है। बिहार को जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन के इंतजार में व्याकुल बैठी एक मां। 

यह तस्वीर गुरुग्राम है। बिहार को जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन के इंतजार में व्याकुल बैठी एक मां। 

यह तस्वीर जयपुर की है। इन मासूम बच्चों के साथ मीलों पैदल चलना एक मां के लिए कितना कष्टकर होता है, सोचना भी मुश्किल है।

यह तस्वीर जयपुर की है। इन मासूम बच्चों के साथ मीलों पैदल चलना एक मां के लिए कितना कष्टकर होता है, सोचना भी मुश्किल है।

यह तस्वीर गाजियाबाद की है। अपने घर की लौटती एक मजदूर मां बच्चे को कंधे पर बैठाये हुए। 

यह तस्वीर गाजियाबाद की है। अपने घर की लौटती एक मजदूर मां बच्चे को कंधे पर बैठाये हुए। 

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