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लॉकडाउन में फजीहत: स्कूटी पर यह शव नहीं, सरकारी इंतजाम हैं, रोते हुए मदद मांगते रहे परिजन

First Published Apr 15, 2020, 9:41 AM IST
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इंदौर, मध्य प्रदेश. यह तस्वीर मध्य प्रदेश में लॉक डाउन के बीच सरकारी इंतजामों की असलियत सामने लाती है। प्रशासन कितना सजग है, यह तस्वीर यही दिखाती है। ये लोग स्कूटी पर शव को लेकर भटकते रहे, लेकिन उन्हें एम्बुलेंस नहीं मिली। मामला मरीमाता क्षेत्र के रहने वाले 55 वर्षीय पांडुराव चांदवे की मौत से जुड़ा है। चांदवे कुछ दिनों से बीमार थे। उन्हें सर्दी-जुकाम भी था। सोमवार को उनके परिजन एमवायएच की फ्लू ओपीडी लेकर पहुंचे थे। यहां डॉक्टरों ने लापरवाही बरती और मरीज का एक्स रे लिया और दवाइयां देकर वापस भेज दिया। मंगलवार सुबह चांदवे की तबीयत फिर बिगड़ी। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी, तो परिजन घबराकर क्लॉथ मार्केट के हॉस्पिटल पहुंचे। लेकिन कोरोना संक्रमण की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों ने इलाज से मना कर दिया। यहां एम्बुलेंस की व्यवस्था भी नहीं थी। लिहाजा, परिजन मरीज को स्कूटी पर बैठाकर एमवायएच पहुंचे। लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

पांडुराव चांदवे की भतीजी और अन्य परिजन उनके शव को स्कूटी पर लिए यहां से वहां भटकते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। इस तस्वीर ने इंदौर प्रशासन की लॉक डाउन में सजगता की असलियत सामने ला दी। इस बीच इंदौर में  मरीजों की संख्या 569 पर पहुंच गई है। 

पांडुराव चांदवे की भतीजी और अन्य परिजन उनके शव को स्कूटी पर लिए यहां से वहां भटकते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। इस तस्वीर ने इंदौर प्रशासन की लॉक डाउन में सजगता की असलियत सामने ला दी। इस बीच इंदौर में  मरीजों की संख्या 569 पर पहुंच गई है। 

यह तस्वीर गुजरात के राजकोट की है। यह विधवा मां हाथ ठेले से एक्सीडेंट में घायल हुए अपने बेटे को हॉस्पिटल ले जाते हुए। तेज धूप में करीब 2 किमी यह मां ठेला चलकर हॉस्पिटल पहुंची। महिला ने एम्बुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 108 पर कॉल किया था। लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली। मामला जेतपुर नगर पालिका का है। इस बीच एक ठेले वाले ने महिला की मदद की और अपना ठेला उसे दिया।

यह तस्वीर गुजरात के राजकोट की है। यह विधवा मां हाथ ठेले से एक्सीडेंट में घायल हुए अपने बेटे को हॉस्पिटल ले जाते हुए। तेज धूप में करीब 2 किमी यह मां ठेला चलकर हॉस्पिटल पहुंची। महिला ने एम्बुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 108 पर कॉल किया था। लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली। मामला जेतपुर नगर पालिका का है। इस बीच एक ठेले वाले ने महिला की मदद की और अपना ठेला उसे दिया।

यह तस्वीर नई दिल्ली की है। प्रवासी मजदूर नारायण मांघी और उनकी दुल्हन लीलम बेबी। कुछ समय पहले ही इनकी शादी हुई है। अब लॉक डाउन में फंसे होने से यमुना स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में बनाए गए शेल्टर होम में रह रहे हैं।

यह तस्वीर नई दिल्ली की है। प्रवासी मजदूर नारायण मांघी और उनकी दुल्हन लीलम बेबी। कुछ समय पहले ही इनकी शादी हुई है। अब लॉक डाउन में फंसे होने से यमुना स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में बनाए गए शेल्टर होम में रह रहे हैं।

यह राहत देने वाली खबर है। ये हैं भोपाल में रहने वाले 55 वर्षीय पुलिस जवान कमलेश तिवारी। ये 15 दिनों तक चले इलाज के बाद मंगलवार को कोरोना को हराकर घर लौट आए। वे एम्स में भर्ती थे। ये आईएएस अधिकारी जे विजय कुमार के साथ ड्यूटी करते हुए संक्रमित हुए थे।
 

यह राहत देने वाली खबर है। ये हैं भोपाल में रहने वाले 55 वर्षीय पुलिस जवान कमलेश तिवारी। ये 15 दिनों तक चले इलाज के बाद मंगलवार को कोरोना को हराकर घर लौट आए। वे एम्स में भर्ती थे। ये आईएएस अधिकारी जे विजय कुमार के साथ ड्यूटी करते हुए संक्रमित हुए थे।
 

यह तस्वीर श्रीनगर की है। यहां रेड जोन एरिया में आवागमन रोकने इस तरह रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
 

यह तस्वीर श्रीनगर की है। यहां रेड जोन एरिया में आवागमन रोकने इस तरह रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
 

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