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बजट 2021: हुई महंगी बहुत ही शराब कि 'थोड़ी-थोड़ी' करके हर साल 600 करोड़ लीटर पीते जाते हैं भारतीय

First Published Feb 1, 2021, 6:39 PM IST
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नई दिल्ली.  बजट में सबको थोड़ा-बहुत मिलता है, लेकिन 'शराब' एक ऐसी चीज है, जिस पर टैक्स या सेस बढ़ता ही रहता है। इसका एक फायदा और एक नुकसान है। फायदा सरकार को अधिक पैसा मिलता है। नुकसान नकली-सस्ती और अवैध शराब की खपत बढ़ जाती है। यह अलग बात है कि शराबियों का बजट कितना भी बिगड़े, वे विरोध नहीं करते। खैर, केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2021 के बजट में अल्कोहल पर 100 प्रतिशत कृषि सेस लगाया है। यानी शराबियों से टैक्स वसूलकर किसानों के खाते में जाएगा। यह अच्छी बात है, लेकिन यह भी एक सच है कि देश में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इनमें से बिहार, गुजरात, मिजोरम, मणिपुर, लक्षद्वीप और नगालैंड में शराब बंदी है। बाकी जो राज्य बचते हैं, वहां हर साल 600 लीटर शराब पी ली जाती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देश का एक तिहाई पुरुष शराब पीता है। जिन प्रदेशों में शराबंदी है, वहां अवैध शराब बिकती है। जहां महंगी है, वहां भी। हाल में मप्र में नकली शराब पीने से 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। आगे पढ़ते हैं शराब से जुड़े कुछ फैक्ट्स....

पहले जानते हैं ये सेस है क्या?
सेस या उपकर विशेष उद्देश्यों के लिए लगाया जाता है। इस समय सरकार की प्राथमिकता कृषि क्षेत्र का विकास है। पैसा कहां से आए? इसलिए अल्कोहल पर 100 प्रतिशत सेस लगाया गया है। इससे मिलने वाला पैसा केंद्र सरकार अपने पास ही रखती है, राज्य को कुछ नहीं मिलता। जब केंद्र सरकार का उद्देश्य पूरा हो जाता है, तब यह टैक्स हटा लिया जाता है।

पहले जानते हैं ये सेस है क्या?
सेस या उपकर विशेष उद्देश्यों के लिए लगाया जाता है। इस समय सरकार की प्राथमिकता कृषि क्षेत्र का विकास है। पैसा कहां से आए? इसलिए अल्कोहल पर 100 प्रतिशत सेस लगाया गया है। इससे मिलने वाला पैसा केंद्र सरकार अपने पास ही रखती है, राज्य को कुछ नहीं मिलता। जब केंद्र सरकार का उद्देश्य पूरा हो जाता है, तब यह टैक्स हटा लिया जाता है।

जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है, शराब का बिजनेस भी फलता-फूलता जाता है। कभी खुशियों में, तो कभी गम में शराब पीने का बहाना चाहिए। बता दें कि शराब की लत भले बेकार चीज हो, लेकिन इससे सरकार का खजाना खूब भरता है। केंद्र सरकार ने स्टेट एक्साइज ड्यूटी से 2019-20 में करीब 1,75,501.42 करोड़ रुपये की आमदमी की थी।

जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है, शराब का बिजनेस भी फलता-फूलता जाता है। कभी खुशियों में, तो कभी गम में शराब पीने का बहाना चाहिए। बता दें कि शराब की लत भले बेकार चीज हो, लेकिन इससे सरकार का खजाना खूब भरता है। केंद्र सरकार ने स्टेट एक्साइज ड्यूटी से 2019-20 में करीब 1,75,501.42 करोड़ रुपये की आमदमी की थी।

रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल आमदनी का 10 से 15 फीसदी हिस्सा शराब पर लगे टैक्स से आता है। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस असोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में करीब 2.48 लाख करोड़ रुपये की आमदनी शराब बेचने से हुई।

रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल आमदनी का 10 से 15 फीसदी हिस्सा शराब पर लगे टैक्स से आता है। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस असोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में करीब 2.48 लाख करोड़ रुपये की आमदनी शराब बेचने से हुई।

शराब एक ऐसा प्रोडक्ट्स है, जिसका प्रचार-प्रसार नहीं करना पड़ता। टेलिविजन, अखबार आदि में कहीं भी आपको शराब के विज्ञापन नहीं दिखेंगे। फिर भी शराब की खपत बढ़ती जाती है।

शराब एक ऐसा प्रोडक्ट्स है, जिसका प्रचार-प्रसार नहीं करना पड़ता। टेलिविजन, अखबार आदि में कहीं भी आपको शराब के विज्ञापन नहीं दिखेंगे। फिर भी शराब की खपत बढ़ती जाती है।

शराब के मार्केट पर रिसर्च करने वाली संस्था यूरोमेंटल इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में शराब उद्योग का कारोबार दोगुना हो चुका है। अब तो 20 से 25 वर्ष तक के युवाओें को भी व्हिस्की और वोदका का चस्का लग गया है। कोरोनाकाल के बाद पंजाब में पीने का जो शौक चला, उसने प्रति व्यक्ति 7.9 लीटर तक पी ली। यानी यह भारत में दूसरे नंबर का राज्य है।
 

शराब के मार्केट पर रिसर्च करने वाली संस्था यूरोमेंटल इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में शराब उद्योग का कारोबार दोगुना हो चुका है। अब तो 20 से 25 वर्ष तक के युवाओें को भी व्हिस्की और वोदका का चस्का लग गया है। कोरोनाकाल के बाद पंजाब में पीने का जो शौक चला, उसने प्रति व्यक्ति 7.9 लीटर तक पी ली। यानी यह भारत में दूसरे नंबर का राज्य है।
 

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