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मेरा बेटा जिंदा है या उसे मार दिया...मां ने पूछा सवाल, दिल्ली हिंसा की ऐसी ही 30 दर्दनाक तस्वीरें
नई दिल्ली. दिल्ली में रविवार की शाम से हिंसा की शुरुआत हुई। 4 दिन बाद पता चला कि 39 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत का ये आंकड़ा अभी बढ़ सकता है, क्योंकि अभी कई लोग गायब है। अपने घर नहीं पहुंचे। नालों में लाश तलाशी जा रही हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा पर दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा ने कहा, हमने अब तक 123 एफआईआर दर्ज की हैं। हिरासत में लिए या गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या लगभग 630 है। उन्होंने कहा कि अब उत्तर पूर्वी जिलों में स्थिति सामान्य है। हिंसा की कोई भी घटना आज सामने नहीं आई। आज 10 घंटे के लिए धारा 144 में राहत भी दी गई थी। ऐसे में बताते हैं उन परिवारों के बारे में जिन्होंने अपना बेटा, पति या पत्नी को खो दिया।
130

मुस्तफाबाद में मोहम्मद इरफान की मां। मोहम्मद इरफान की दिल्ली हिंसा में मौत हो गई। जीटीबी अस्पताल में बेटे की शव लेने के लिए पहुंची मां।
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230
दिल्ली में भड़की हिंसा में बृजपुरी इलाके में 23 साल के राहुल ठाकुर की भी हत्या कर दी गई। 23 साल के राहुल ठाकुर के रिश्तेदार और दोस्त 27 फरवरी, 2020 को नई दिल्ली में अंतिम संस्कार से पहले उनके पार्थिव शरीर के आसपास खड़े लोग।
330
दिल्ली हिंसा में मृतक राहुल ठाकुर के परिजन।
430
दिल्ली हिंसा में 31 साल के मोहम्मद मुदस्सिर की मौत हो गई। शव के सामने रोते-बिलखते मुदस्सिर के पिता।
530
दिल्ली हिंसा में शोएब खान (22) की मौत हो गई। जीटीबी अस्पताल में शोएब के परिजन।
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दिल्ली हिंसा में मारे गए IB कर्मचारी अंकित शर्मा का शव ले जाते हुए। जीटीबी अस्पताल की तस्वीर।
730
अजरा खातून, इन्होंने दिल्ली हिंसा में अपने भतीजे अशफाक हसन (22 साल) को खो दिया। जीटीबी अस्पताल में भतीजे का शव लेने के लिए जाते हुए।
830
जीटीबी अस्पताल के सामने रोती हुई महिला। दिल्ली हिंसा में इन्होंने अपनों को खो दिया।
930
जीटीबी अस्पताल के सामने महिला तस्वीर दिखाकर अपनों को पूछते हुए कि जिंदा है या नहीं।
1030
जीटीबी अस्पताल के बाहर, हिंसा में मारे गए व्यक्ति का शव ले जाते हुए।
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दिल्ली हिंसा के दौरान स्कूल का गार्ड मनोज। हिंसा के दौरान शिव विहार में स्कूल के अंदर तोड़ फोड़ की गई थी।
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जीटीबी अस्पताल से अपनों का शव ले जाते परिजन।
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दिल्ली हिंसा में 22 साल के राहुल सोलंकी को नार्थ दिल्ली में गोली लग गई थी। जीटीबी अस्पताल में उसका शव लेने के लिए जाते परिजन।
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दिल्ली हिंसा में इन्होंने अपनों को खो दिया। जीटीबी अस्पताल में शव गृह में जाते हुए।
1530
दिल्ली हिंसा में मारे गए मोहम्मद मुदस्सिर के पिता। 27 फरवरी को उनका अंतिम संस्कार किया गया।
1630
दिल्ली हिंसा में इस शख्स के सीने में गोली लगी। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ले जाते हुए।
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मृतक मोहम्मद मुदस्सिर के शव के आस-पास खड़े परिजन।
1830
कारावल नगर में हिंसा के दौरान घायल शख्स।
1930
दिल्ली का जीटीबी अस्पताल। जहां शवों के लाने की लाइन लगी है।
2030
अपने भतीजे बाबू (32) के शव के इंतजार में खड़े शमीम अहमद। इन्होंने भी दिल्ली हिंसा में अपने को खो दिया।
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