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न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर क्या होता है, जिससे बिगड़ी इरफान खान की तबीयत, 53 साल की उम्र में निधन
नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जंग लड़ रहे थे। उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर था। मंगलवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इरफान खान की मौत की खबर सबसे पहले फिल्म मेकर शूजित सरकार ने दी। उन्होंने ट्वीट कर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।

क्या होता है न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर?
शरीर का एंडोक्राइन सिस्टम यानी अंत:स्त्रावी बॉडी सेल्स से बना होता है जो हार्मोन्स पैदा करता है। यह हार्मोन्स और कुछ नहीं कैमिकल सत्व (सबस्टांस) होते हैं जो रक्तवाहिनियों के जरिए प्रवाह करते हैं और शरीर के अन्य अंगों को कार्य करने में मदद करते हैं।
ट्यूमर क्या होता है?
ट्यूमर शरीर में मौजूद सेल्स का वह भाग है जो कंट्रोल से बाहर होकर अचानक बढ़ने लगता है। धीरे-धीरे यह मांस के एक लोथड़े के रूप में इकट्ठा होने लगता है। हालांकि हर बार ट्यूमर खतरनाक नहीं होता है। कई बार इसमें कैंसर पनप जाता है और कई बार यह बिना किसी परेशानी के शरीर में यूं ही पड़ा भी रहता है।
ट्यूमर घातक हो सकता है
कैंसर युक्त ट्यूमर घातक होता है और अगर इसका शुरुआती चरण में पता न चले तो यह तेजी से बढ़कर शरीर के अन्य अंगों में भी फैल जाता है। जबकि ऐसा ट्यूमर जिसमें कैंसर नहीं है वह बढ़ता तो है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलता और इसे बिना किसी नुकसान के आसानी से हटाया भी जा सकता है।
न्यूरोक्राइन ट्यूमर क्या होता है?
इस तरह का ट्यूमर शरीर के उन हिस्सों में बनता है, जहां हार्मोन्स बनते और रिलीज होते हैं। जिन सेल्स में यह ट्यूमर पैदा होता है वह हार्मोन्स बनाने वाले एंडोक्राइन सेल्स और नर्व सेल्स का कॉम्बीनेशन होते हैं। इरफान खान ने अपने ट्वीट में लिखा था कि न्यूरो का मतलब सिर्फ दिमागी नसों से नहीं है। न्यूरोक्राइन सेल्स पूरे शरीर में पाए जाते हैं, जैसे- फेफड़ों में, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट जिसमें पेट और आंत भी आते हैं। न्यूरोक्राइन सेल्स हमारे शरीर में कई तरह के काम करते हैं, जैसे शरीर में हवा और खून के बहाव को फेफड़ों के जरिए बनाए रखना आदि।
न्यूरोक्राइन ट्यूमर से क्या-क्या दिक्कत आती है
न्यूरोक्राइन ट्यूमर से बार-बार पेशाब आना, प्यास लगना और भूख भी बढ़ सकती है। थकान, घबराहट, चक्कर आना, पसीना आना, बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। इनके अलावा इसमें डायरिया हो सकता है। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर की वजह से थकान, वजन घटाने, या शरीर के किसी भाग में दर्द होने लगता है। इसके कारण चेहरे का फूलना, पसीना आना और डायरिया हो जाता है। विभिन्न न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर के अलग-अलग लक्षण होते हैं।
इरफान अली खान ने द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेमसेक, रोग जैसी फिल्मों मे अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हासिल फिल्म के लिये उन्हे साल 2004 का फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
वह बालीवुड की 30 से ज्यादा फिल्मों मे अभिनय कर चुके हैं। इरफान हॉलीवुड मे भी एक जाना पहचाना नाम हैं। वह ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर और द अमेजिंग स्पाइडर मैन फिल्मों मे भी काम कर चुके हैं।
2011 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किए गए। 60वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2012 में इरफान खान को फिल्म पान सिंह तोमर में अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया।
इरफान खान की 95 साल की मां सईदा बेगम की चार दिन पहले जयपुर में मृत्यु हो गई थी। अभिनेता कोरोना वायरस से निपटने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के कारण अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाये थे।
कैंसर की बीमारी से निजात पाने के बाद 2019 में वापसी करते हुए अभिनेता इरफान खान ने अंग्रेजी मीडियम फिल्म की शूटिंग की थी।
मार्च 2018 में इरफान को अपनी बीमारी का पता चला था। उन्होंने खुद फैंस के साथ यह खबर साझा की थी।
इरफान के परिवार में पत्नी सुतापा देवेंद्र सिकदर और दो बेटे बाबिल और अयान हैं। इरफान खान टोंक के नवाबी खानदान से ताल्लुक रखते हैं।
उनका बचपन भी टोंक में ही गुजरा। उनके माता-पिता टोंक के ही रहने वाले थे। 7 जनवरी 1967 को जन्मे इरफान का पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था।
इरफान क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वे फैमिली बिजनेस संभालें। हालांकि, इरफान को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में जाने का मौका मिल गया और यहीं से उनका एक्टिंग करियर शुरू हुआ। छोटे पर्दे पर उनकी शुरुआत ‘श्रीकांत’ और ‘भारत एक खोज’ से हुई।
'पान सिंह तोमर' के लिए इरफान को नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया। कला के क्षेत्र में उन्हें देश के चौथे सबसे बड़े सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा गया।
इरफान के निधन पर जावेद अख्तर ने क्या कहा?
जावेद अख्तर ने बताया कि इरफान से आखिरी बार लंदन में मुलाकात हुई थी। शेर-ओ-शायरी की बातें हुईं। उन्होंने कहा था कि जल्द लौटेंगे तो फिर इत्मीनान से बात होगी। उनकी अदायगी एक करिश्मा है। बीमारी के दौरान भी काम करते रहे, ये जज्बा था उनमें।
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