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15 जनवरी तक शुरू हो जाएगा अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य, वैदिक सिटी बनेगा मंदिर का परिसर
अयोध्या. रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण नए साल में 15 जनवरी तक शुरू हो जाएगा। यह जानकारी रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने दी है। वे सर्किट हाउस में राम मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक के समापन अवसर पर मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने बताया कि नींव की ड्राइंग की अंतिम रिपोर्ट विशेषज्ञ तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 15 दिसंबर तक सौंप देंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर मानचित्र बनेगा और अगले एक माह में यानी 15 जनवरी तक मंदिर निर्माण प्रारंभ हो जायेगा।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने दो दिवसीय बैठक के नतीजे को बेहद उत्साहित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रस्तावित मंदिर के परकोटे के भीतर निर्माण की योजना के साथ परकोटे के बाहर यानी रामजन्मभूमि परिसर के बाकी 65 एकड़ भूमि पर विकास कार्यों की समीक्षा की गयी।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर के अलावा रामजन्मभूमि परिसर को वैदिक सिटी के रूप में विकसित करना चाहते हैं और हमारे लिए उनका यह प्रयास अत्यंत स्वागतयोग्य है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों के अनुरूप हम भी चाहते हैं कि रामजन्मभूमि परिसर कल्चरल कैपिटल ऑफ दी वल्र्ड के रूप में विकसित करें और अयोध्या श्रीराम की गरिमा के अनुरूप विश्व की सांस्कृतिक राजधानी बने।
इससे पूर्व राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के दूसरे दिन मंदिर निर्माण की प्रक्रिया पर गंभीर मंथन किया गया। बैठक में निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, राम मंदिर के मुख्य शिल्पी सीके सोमपुरा के पुत्र आशीष सोमपुरा सहित एल एंड टी, टाटा कंसल्टेंट इंजीनियर्स के प्रतिनिधि तथा भवन निर्माण के क्षेत्र से जुड़े कई दिग्गज विशेषज्ञ मौजूद रहे। बैठक में टेस्ट पाइलिंग की जांच से संबंधित रिपोर्ट के साथ मंदिर की नींव की मजबूती के लिए गहन विचार-विमर्श किया गया।
सर्किट हाउस के सभागार में सुबह से देर शाम तक चल रही बैठक से मीडिया का दूर रखा गया। समझा जाता है कि बैठक में नींव की मजबूती व उसमें प्रयुक्त की जाने वाली सामग्री के संयोजन के फार्मूले पर फैसला किया गया।
बैठक में मंदिर के परकोटे में निर्मित होने वाले भवन व पिलर्स के निर्माण के लिए मानचित्र के अनुरूप स्थल तय किया गया। एक हजार वर्ष तक अक्षुण्ण रहने वाले कालजयी मंदिर के लिए नींव की मजबूती को बेहद अहम माना जा रहा है। सर्किट हाउस में निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हुई थी।
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