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भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को शिकार बना रहा कोरोना, NGO का दावा, इन्हें 5 गुना ज्यादा खतरा
भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जिन 5 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है, वे लोग 1984 में हुए गैस त्रासदी के शिकार भी थे।बुधवार को अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी। 21 मार्च को भोपाल गैस त्रासदी के लिए काम करने वाले कुछ संगठनों ने अधिकारियों को लिखित में दिया भी था कि गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों को कोरोना से पांच गुना ज्यादा खतरा है।
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गैस त्रासदी में बचे लोगों का इलाज करने वाले एक हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से बीमार लोगों का इलाज किया जा रहा है। इससे गैस त्रासदी के पीड़ितों को काफी दिक्कत हो रही है। भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन एनजीओ की सदस्य रचना ढींगरा ने इस बात की जानकारी दी।
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रचना ढींगरा ने कहा, भोपाल में कोरोना से पहले व्यक्ति मौत हुई थी , उसकी उम्र 55 साल थी। अधिकारियों की लापरवाही से 5 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।
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कोरोना से एक अन्य व्यक्ति की मौत हुई, जिसकी उम्र 80 साल थी। वह भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) से रिटायर हुए थे। उनकी सही तरीके से देखभाल नहीं की गई। ढींगरा ने कहा कि उनकी मौत 8 अप्रैल को हुई। चौंकाने वाली बात तो यह है कि उनकी टेस्टिंगा का रिजल्ट मौत के बाद 11 अप्रैल को आया। वो कोरोना पॉजिटिव थे।
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कोरोना से 40 साल के एक गैस पीड़ित की मौत हुई। उन्हें एक साल से मुंह का कैंसर था। 12 अप्रैल को उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। 52 साल के गैस पीड़ित चोट से परेशान थे। उन्हें तपेदिक था और सांस लेने में दिक्कत होती थी। उन्हें तुरन्त इलाज नहीं मिला और उन्होंने दम तोड़ दिया।
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गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली कुछ संस्थाओं ने 21 मार्च को राज्य और केंद्र के कुछ अधिकारियों को लिखा, गैस पीड़ितों में अधिकतर लोगों को किडनी, सांस और कैंसर जैसी दिक्कतें हैं। उन्होंने दावा किया कि गैस पीड़ितों के लिए कोरोना वायरस अन्य की तुलना में कम से कम पांच गुना ज्यादा खतरनाक है।
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ढींगरा ने कहा कि भोपाल गैस पीड़ितों की जरूरतों पर विशेष ध्यान देने के बजाय राज्य सरकार ने गैस विक्टिम्स के लिए एकमात्र सुपर-स्पेशियलिटी भोपल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) को अपने कब्जे में ले लिया, और इसे कोरोना रोगियों के इलाज के लिए शुरू कर दिया।
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पिछले 22 दिनों से किसी भी गैस पीड़ित को वहां आपातकालीन सेवाओं का लाभ नहीं पा रहा है। एनजीओ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका भी दायर की है, जिसमें मांग की गई है कि गैस पीड़ितों को उनके इलाज के लिए खोले गए हॉस्पिटल में इलाज मिले।
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