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दिल्ली दंगे में इसने अपना दोस्त को खो दिया, लाश लेने के लिए अस्पताल पहुंचा तो ऐसे रोने लगा
नई दिल्ली. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा पर दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा ने कहा, हमने अब तक 123 एफआईआर दर्ज की हैं। हिरासत में लिए या गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या लगभग 630 है। उन्होंने कहा कि अब उत्तर पूर्वी जिलों में स्थिति सामान्य है। हिंसा की कोई भी घटना आज सामने नहीं आई। आज 10 घंटे के लिए धारा 144 में राहत भी दी गई थी। आज सुरक्षा को थोड़ा बढ़ाया गया था। दिल्ली हिंसा के पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को मुआवजे का ऐलान किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिनके घर जले हैं उन्हें 25-25 हजार कैश दिया जाएगा। ये रकम शनिवार दोपहर से दी जाएगी।
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आंखों में आंसू लिए शख्स का नाम शहजाद है। यह जीटीबी अस्पताल के सामने अपने दोस्त मोहसिन अली का शव लेने के लिए खड़ा है। दंगी में शहजाद ने अपने दोस्त को खो दिया।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हिंसा में 82 लोगों को गोली लगी, जिसमें 21 की मौत हो गई।
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पुलिस ने अब तक मृतकों और घायलों समेत 250 लोगों की एक लिस्ट तैयार की है।
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दिल्ली हिंसा में मृतकों की संख्या 38 तक पहुंची, 29 शवों की पहचान हुई।
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हिंसा स्थल से 350 से ज्यादा इस्तेमाल किए कारतूस मिले।
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जांच के दौरान 0.32 मिमी, 0.9 मिमी और 0.315 मिमी कैलिबर के कारतूस मिले।
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हिंसा वाली जगह से खिलौने वाले बंदूक के भी कारतूस मिले। (हिंसा में मारे गए मुदस्सिर खान का बेटा)
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छापेमारी के दौरान पुलिस को तलवार और पेट्रोल बम भी मिले।
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छोटे अपराधियों ने बेरोजगारों को देशी पिस्तौल और गोलियां बांटी।
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दिल्ली हिंसा में स्थानीय अपराधियों के शामिल होने की आशंका।
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मौजपुर के लोगों ने बताया, इधर से भागते हुए कुछ लोग आए, बाहर के लोग घर में घुस गए।
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मौजपुर के लोगों ने कहा, हिंसा में स्थानीय लोग (मौजपुर के लोग नहीं थे) नहीं थे।
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मौजपुर के लोगों ने बताया, पत्थर के आगे कौन टिके, ऐसा पत्थर मारा की तीसरी मंजिल पर पुहंचा।
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मौजपुर के लोगों ने कहा, हम लोग यहीं पैदा हुए, यहीं पर मरेंगे।
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मौजपुर के लोगों ने कहा, जिन लोगों ने पत्थर मारा, आज तक उन्हें यहां नहीं देखा।
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दंगाइयों ने पहले दुकान का शटर तोड़ा, फिर लूट-पाट शुरू कर दी- चश्मदीद।
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लूट-पाट की, फिर पेट्रोल छिड़कर हमारी गाड़ियां, दुकान, घर सब जला डाला- चश्मदीद।
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चश्मदीदों के मुताबिक, जब भीड़ नीचे हमारी दुकानें जलाने लगी तो हम छत की ओर भागे।
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पुलिस या सुरक्षा बल के कोई भी जवान दंगाईयों को रोकने के लिए मौजूद नहीं था- चश्मदीद।
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दिल्ली के गंगा विहार की एक गली से कुछ लोग चले गए हैं, कई घरों में ताला लगा हुआ है। (तस्वीर- अंकित शर्मा का शव ले जाते हुए)
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