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हाईवे के बाद पटरी पर लेटे किसान, 85वें दिन भी सरकार नहीं झुकी, आमजन परेशान

First Published Feb 18, 2021, 1:15 PM IST
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ये तस्वीरें कृषि कानूनों के खिलाफ 85 दिनों से चले आ रहे किसान आंदोलन के दौरान गुरुवार को देशव्यापी रेल आंदोलन की हैं। सरकार पर दवाब बनाने और आंदोलन को 'धार' देने की स्ट्रैटजी के तहत 40 किसान संगठनों के शीर्ष नेतृत्व ने दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक देशभर  ट्रेन रोकने का ऐलान किया था। इस आंदोलन का सबसे अधिक असर दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-जम्मू, दिल्ली-भोपाल और दिल्ली-हावड़ा रूट पर नजर आ रहा है। सरकार की ओर से बातचीत के प्रस्ताव के बावजूद किसान संगठन कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। किसानों ने हाईवे जाम कर रखे हैं। अब रेल रोको से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि रेल रोको अभियान शांतिपूर्ण होगा। आंदोलन के दौरान यात्रियों को चने बांटेंगे, दूध और पानी पिलाएंगे। देखें कुछ तस्वीरें...

रेल रोको आंदोलन को देखते हुए देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) की 20 एक्स्ट्रा कंपनियां यानी करीब 20 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।

रेल रोको आंदोलन को देखते हुए देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) की 20 एक्स्ट्रा कंपनियां यानी करीब 20 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।

रेल रोको आंदोलन का सबसे अधिक असर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल में देखा गया। 

रेल रोको आंदोलन का सबसे अधिक असर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल में देखा गया। 

भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चंढूनी ने चेतावनी दी कि नए कृषि कानूनों की वापसी तक कोई अपने घर नहीं लौटेगा।

भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चंढूनी ने चेतावनी दी कि नए कृषि कानूनों की वापसी तक कोई अपने घर नहीं लौटेगा।

यह तस्वीर पटना की है। यहां जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन रोकी। 

यह तस्वीर पटना की है। यहां जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन रोकी। 

पंजाब और हरियाणा में किसान आंदोलन का सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है।

पंजाब और हरियाणा में किसान आंदोलन का सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है।

केंद्र सरकार किसानों को बातचीत का न्यौता दे चुकी है, लेकिन किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़ी हुई है।

केंद्र सरकार किसानों को बातचीत का न्यौता दे चुकी है, लेकिन किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़ी हुई है।

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