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'सिर पर तलवार मारा, चाकू घोंपा...' परिजनों ने बताया किस हालत में मिला IB कर्मचारी अंकित का शव

First Published Feb 26, 2020, 7:39 PM IST
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नई दिल्ली. संशोधित नागरिकता कानून को लेकर दिल्ली हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। आज अब तक 4 और शव मिल चुके हैं। इसमें एक खुफिया विभाग के कर्मचारी का भी शव बरामद किया गया है। इससे पहले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतनलाल भी शहीद हो गए हैं। आईबी के कर्मचारी अंकित का शव हिंसा प्रभावित चांद बाग इलाके से मिला है। अंकित लापता थे और परिजनों ने पुलिस में इसकी शिकायत भी दर्ज कराई थी। अधिकारियों ने बताया कि अंकित चांद बाग इलाके में रहते थे और शायद पथराव में उनकी जान गई है। उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी अस्पताल ले जाया गया है।

चांद बाग पुलिया के नाले से अंकित का शव निकाला गया है। बताया जा रहा है कि यह कल शाम की वारदात है, जिसमें आईबी कर्मचारी की मौत हुई है। हालांकि मौत का कारण पता नहीं चल सका है। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है लेकिन परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।  (फाइल फोटो)

चांद बाग पुलिया के नाले से अंकित का शव निकाला गया है। बताया जा रहा है कि यह कल शाम की वारदात है, जिसमें आईबी कर्मचारी की मौत हुई है। हालांकि मौत का कारण पता नहीं चल सका है। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है लेकिन परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। (फाइल फोटो)

अंकित के परिजनों ने बतायाः अंकित के परिवारवालों ने बताया कि अंकित के सिर पर तलवार से वार किया गया था। उसे चाकू भी मारा था। नाले में पत्थर से अंकित का शव दबा रखा था। परिवारवाले ने बताया कि पहले खजूरी खास थाने में रिपोर्ट लिखवाने गए थे फिर दयालपुर में थाने में लापता की रिपोर्ट लिखवाई थी।

अंकित के परिजनों ने बतायाः अंकित के परिवारवालों ने बताया कि अंकित के सिर पर तलवार से वार किया गया था। उसे चाकू भी मारा था। नाले में पत्थर से अंकित का शव दबा रखा था। परिवारवाले ने बताया कि पहले खजूरी खास थाने में रिपोर्ट लिखवाने गए थे फिर दयालपुर में थाने में लापता की रिपोर्ट लिखवाई थी।

अंकित शर्मा की मौत की खबर आते ही परिजनों को रो- रोकर बुरा हाल है। परिजन खुद को रोक नहीं पा रहा हैं। अंकित शर्मा की मां बेटे की मौत की खबर सुनकर बेसूध हो जा रही है। वहीं, दिल्ली हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की भी मौत हो गई थी। जबकि उपद्रवियों के हमले में एक डीसीपी अमित शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों की पत्थरबाजी में 56 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गोकुलपुरी इलाके में प्रदर्शनकारियों की तरफ से किए गए पथराव में हेड कांस्टेबल की जान चली गई।

अंकित शर्मा की मौत की खबर आते ही परिजनों को रो- रोकर बुरा हाल है। परिजन खुद को रोक नहीं पा रहा हैं। अंकित शर्मा की मां बेटे की मौत की खबर सुनकर बेसूध हो जा रही है। वहीं, दिल्ली हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की भी मौत हो गई थी। जबकि उपद्रवियों के हमले में एक डीसीपी अमित शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों की पत्थरबाजी में 56 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गोकुलपुरी इलाके में प्रदर्शनकारियों की तरफ से किए गए पथराव में हेड कांस्टेबल की जान चली गई।

हिंसा की शुरुआत कैसे हुई? यह हिंसा पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद और उसके आसपास के इलाकों में हो रही है। 22 फरवरी को देर रात जाफराबाद में मेट्रो स्टेशन के पास कुछ महिलाएं नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने बैठीं थीं।

हिंसा की शुरुआत कैसे हुई? यह हिंसा पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद और उसके आसपास के इलाकों में हो रही है। 22 फरवरी को देर रात जाफराबाद में मेट्रो स्टेशन के पास कुछ महिलाएं नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने बैठीं थीं।

23 फरवरी को जाफराबाद के पास मौजपुर में नागरिकता कानून के समर्थन में प्रदर्शन किए गए थे।इसके बाद दोनों गुटों में झड़प हुई थी। यह झड़प और हिंसा 24 और 25 फरवरी को भी जारी रही। यह हिंसा मौजपुर, भजनपुरास, बाबरपुर करावल नगर, शेरपुर चौक, कर्दमपुरी और गोकलपुरी समेत उत्पर पूर्वी दिल्ली में हुई।

23 फरवरी को जाफराबाद के पास मौजपुर में नागरिकता कानून के समर्थन में प्रदर्शन किए गए थे।इसके बाद दोनों गुटों में झड़प हुई थी। यह झड़प और हिंसा 24 और 25 फरवरी को भी जारी रही। यह हिंसा मौजपुर, भजनपुरास, बाबरपुर करावल नगर, शेरपुर चौक, कर्दमपुरी और गोकलपुरी समेत उत्पर पूर्वी दिल्ली में हुई।

पत्थर बरसा रहे लोगों को पुलिस एक तरफ से खदेड़ती तो उनके साथी दूसरी तरफ से पथराव शुरू कर देते। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही उन्होंने कई दुकानों में आग लगाई और सैकड़ों घरों के शीशे तोड़ दिए। पुलिसकर्मी रह-रह कर डंडे पटकर उग्र भीड़ को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उपद्रवी घरों पर पथराव करते रहे। इसी दौरान उपद्रवियों ने 30 से अधिक लोगों को पीट-पीट कर लहूलुहान कर दिया। हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने दुकानों के ताले तोड़कर लूटपाट की भी कोशिश की। उपद्रव करीब 6 घंटे चला।

पत्थर बरसा रहे लोगों को पुलिस एक तरफ से खदेड़ती तो उनके साथी दूसरी तरफ से पथराव शुरू कर देते। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही उन्होंने कई दुकानों में आग लगाई और सैकड़ों घरों के शीशे तोड़ दिए। पुलिसकर्मी रह-रह कर डंडे पटकर उग्र भीड़ को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उपद्रवी घरों पर पथराव करते रहे। इसी दौरान उपद्रवियों ने 30 से अधिक लोगों को पीट-पीट कर लहूलुहान कर दिया। हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने दुकानों के ताले तोड़कर लूटपाट की भी कोशिश की। उपद्रव करीब 6 घंटे चला।

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