फांसी टालने के लिए यह चाल चल सकते हैं निर्भया के दरिंदे, 22 जनवरी को मिलनी है मौत
नई दिल्ली. निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने दोषी विनय और मुकेश की क्यूरेटिव याचिका खारिज की। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब निर्भया के दरिंदों को 22 जनवरी को फांसी का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
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हालांकि, अभी विनय और मुकेश के पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का विकल्प बचा है। वहीं, अक्षय और पवन के पास अभी क्यूरेटिव और दया याचिका का विकल्प बचा है।
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इसी के चलते मुकेश ने मंगलवार को राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगा दी है। यह दया याचिका तिहाड़ जेल प्रशासन को सौंप दी है। वहीं, अभी दो अन्य दोषी अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता ने क्यूरेटिव पिटीशन दायर नहीं की। इनके पास 21 जनवरी तक का वक्त है। तब तक यह विकल्प बचाकर रख सकते हैं।
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कानून के जानकारों के मुताबिक, क्यूरेटिव या दया याचिका लंबित होने तक फांसी नहीं दी जा सकती। दोषी इस आधार पर फांसी की सीमा को बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।
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16 दिसंबर को हुई थी दरिंदगी: दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से 6 लोगों ने बर्बरता पूर्वक सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था।
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निर्भया की 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर में माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में चार दोषी जेल में बंद हैं। वहीं, एक दोषी ने जेल में ही आत्महत्या कर ली।
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इस घटना के वक्त एक दोषी नाबालिग था, वह रिहा हो चुका है।
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