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मुझे बचाओ, मेरे मुंह से खून आ रहा है...निर्भया के दोषी विनय ने ऐसे किया मौत से बचने का ड्रामा
नई दिल्ली. मौत को पास आता देख निर्भया के दोषी बचने की हर कोशिश कर रहे हैं। अभी तक तो विनय खुद को पागल बता रहा था। मां को न पहचानने की दलील दे रहा था। अब उसने नया ड्रामा किया। तिहाड़ जेल प्रशासन को बताया कि उसने पिन निगल लिया है और उसके मुंह से खून आ रहा है। यह खबर मिलने ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। तुरन्त डॉक्टर को बुलाया गया। निर्भया के दोषयों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी दी जानी है। लेकिन फांसी की संभावना कम ही है, क्योंकि अभी एक दोषी के पास दया याचिका का विकल्प बचा है।
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घटना की जानकारी मिलते ही तुरन्त वरिष्ठ अधिकारियों ने मेडिकल जांच कराई। विनय का एक्सरे कराया गया। हालांकि जब रिपोर्ट आई तो विनय का दावा झूठा निकला।
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एक्सरे के बाद मेडिकल रिपोर्ट आई तो विनय की पोल खुल गई। जेल प्रशासन ने कहा, दोषी पूरी तरह से स्वस्थ है।
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विनय ने इससे पहले भी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। कुछ दिन पहले ही उसने दीवार में सिर पटककर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी।
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निर्भया के दोषियों को अच्छी तरह से पता है कि अगर वह शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक होंगे, तब ही उन्हें फांसी दी जा सकती है। ऐसे में अगर उन्हें चोट लग जाती है तो फांसी की तारीख को टालना पड़ सकता है।
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दोषियों को फांसी तभी हो सकती है, जब वे पूरी तरह से स्वस्थ हों।
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तिहाड़ जेल में बंद दोषियों का रोज मेडिकल चेकअप कराया जाता है। उनके खाने का भी चार्ट बनाया गया है। किसी भी तरह की बीमारी से बचाने के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं।
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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तीसरी बार डेथ वॉरंट जारी किया है। कोर्ट के मुताबिक, दोषियों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। इससे पहले दो बार डेथ वॉरंट जारी किया जा चुका है। पहली बार फांसी की तारीख 22 जनवरी और फिर 1 फरवरी को तय किया गया।
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दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया।
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लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया।
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घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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