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मौत से पहले निर्भया के दोषियों को क्यों पहनाए गए काले कपड़े, विनय ने गुस्से में कर दिया मना
नई दिल्ली. निर्भया केस के चारों दोषियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। फांसी से पहले चारों को काले रंग का नया कपड़ा पहनने के लिए दिया गया, लेकिन विनय ने काले रंग का कपड़ा पहनने से मना कर दिया। ऐसे में बताते हैं कि आखिर फांसी से पहले दोषियों को काला कपड़ा क्यों पहनाया जाता है? बता दें कि निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देने के लिए चौथी बार दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वॉरंट जारी किया था।
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क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड?दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चारों दोषियों को डेथ सेल (काल कोठरी) नंबर 3 में रखा गया था। डेथ सेल, फांसी घर के नजदीक था।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी रात जेल का स्टाफ जागता रहा। यहां पर कर्मचारियों ने 24 घंटे तक ड्यूटी की।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह-सुबह दोषियों को सिर्फ चाय दी जाती है। चाय इसलिए दी जाती है, क्योंकि दोषी थोड़ा वॉर्मअप हो जाए।
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इसके बाद डीएम को बुलाया जाता है। फिर दोषियों से पूछा जाता है कि उनकी कोई वसीयत है या नहीं। फिर एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराया जाता है। डीएम की मौजूदगी में ही उसपर साइन होता है।
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वहां से डीएम रवाना हो जाते हैं। फिर जेलर कहते हैं कि आप नहा लो। नहाने के लिए इसलिए कहा जाता है क्योंकि आप इस दुनिया से एक नई दुनिया में जा रहे हैं।
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दोषी नहाने को तैयार होते हैं तो जल्लाद आता है। वह अपने साथ एक काले रंग का कपड़ा लाता है। काले रंग का कुर्ता और काले रंग का पैजामा। इसमें कोई च्वॉइस नहीं होती है। इसके बाद सभी जेल कर्मचारी अपनी घड़ी मिलाते हैं। किसी की भी घड़ी की सुई आगे पीछे नहीं होती है। टाइम सबके एक होते हैं। बकायदा सेट किए जाते हैं।
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काले कपड़े पहने के बाद कैदी के हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर बांधा जाता है। सेल से निकालने के बाद भी उनके सिर को भी काले कपड़े से ढक दिया जाता है।
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कपड़े नए और सिर्फ काले ही पहनाए जाते हैं। आम तौर पर जो कैदी होता है तो सफेद धारीदार ड्रेस होती है, लेकिन जब फांसी के लिए ले जाते हैं तो काले कपड़े होते हैं। इसके पीछे दो वजहें हैं। आम तौर पर जो फांसी के लिए जाता है, वह बहुत डरा होता है, सहमा होता है। ऐसे में कई बार वह यूरिन पास कर देता है। तो काले रंग के कपड़ों में यूरिन का पता नहीं चलता है। सफेद रंग में दिखता है। दूसरा प्रक्रिया देख न सके।
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