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फांसी के फंदे पर कम हो कष्ट,आसानी से हो जाए मौत...निर्भया के दोषियों के लिए निकाला जा रहा यह तरीका
नई दिल्ली. सात साल के लंबे इंतजार के बाद निर्भया कांड के चार दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। इसके लिए तिहाड़ जेल तैयारियां को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। इन सब के बीच तरह तरह की कवायदें भी की जा रही हैं। इसी क्रम में एक संगठन ने इन दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाए जाने से पहले इन्हें गरुण पुराण सुनाये जाने की मांग की है।
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संगठन का कहना है कि हिन्दू धार्मिक परम्परा में माना जाता है कि मृत्यु से पूर्व गरुण पुराण सुनने से लोग मृत्यु के लिए स्वयं को मानसिक रूप से तैयार कर पाते हैं। साथ ही, इससे उन्हें कष्ट कम होता है और उन्हें मौत के बाद सद्गति मिलती है। संगठन ने इसके लिए तिहाड़ जेल के डिजी संजीव गोयल को पत्र लिखकर दोषियों को गरुण पुराण सुनाये जाने की अनुमति देने का निवेदन भी किया है।
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कम कष्टकारी हो मौत- जेल सुधारों के लिए काम कर रही संस्था राष्ट्रीय युवा शक्ति के अध्यक्ष प्रदीप रघुनंदन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि दोषियों को उनके किये की सजा दिए जाने की सारी प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। अब जबकि उनका मरना निश्चित हो गया है, उन्हें ऐसी मृत्यु देने की कोशिश की जानी चाहिए जो कम से कम कष्टकारी हो। गरुण पुराण सुनने से मृतक और उसके परिवार मृत्यु के बाद की परिस्थिति के लिए स्वयं को मानसिक रूप से बेहतर ढंग से तैयार कर पाते हैं।
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धार्मिक व्यवस्था में माना जाता है कि इससे उनको मृत्यु के बाद बेहतर काल देखने को मिलता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए उनकी मांग है कि मानवीय आधार पर फांसी दिए जाने से पूर्व उन्हें गरुण पुराण सुनाये जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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क्या है गरुण पुराण- हिन्दू धर्म साहित्य के 18 पुराणों में से एक गरुण पुराण है। जिसमें मृत्यु के बाद जीवन का क्या होता है, इन प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया गया है। महर्षि वेदव्यास लिखित इस ग्रन्थ में भगवान विष्णु के वाहन गरुण ने उनसे विभिन्न सवाल किए, जिनका भगवान विष्णु ने जवाब दिया है।
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इसमें वर्णित कथा के मुताबिक राजा परीक्षित मोहवश अपनी मृत्यु के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। उन्होंने अपनी मृत्यु को रोकने के लिए उपाय किए, जिसके कारण उनकी मौत नहीं हो पा रही थी। लेकिन गरुण पुराण सुनने के बाद उनका मोह दूर हुआ और वे मृत्यु के लिए सहर्ष तैयार हो गए। माना जाता है कि इस ग्रंथ में शुरू में 19,000 श्लोक थे, लेकिन अब इसमें केवल सात हजार श्लोक ही रह गए हैं।
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जारी हुआ मौत का पैगाम- पटियाला कोर्ट द्वारा मौत का फरमान जारी होने के बाद फांसी की सजा पा चुके दो दोषियों विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह ने इस मामले में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर रखी है। कोर्ट इस पर 14 जनवरी मंगलवार को सुनवाई कर सकती है। लेकिन माना जा रहा है कि इस मामले में दोषियों के बचने की अब कोई गुंजाइश शेष नहीं बची है और उनकी फांसी तय है।
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क्या हुआ था 7 साल पहले ? 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में पैरामेडिकल छात्रा से 6 लोगों ने चलती बस में दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया था। इस दरिंदगी के 10 दिन बाद यानी 26 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। घटना के नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों क्रमशः राम सिंह, पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी की सजा सुनाई थी।
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मार्च 2014 में हाईकोर्ट और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी थी। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य दोषी नाबालिग होने की वजह से 3 साल में सुधार गृह से छूट चुका है। जिसके बाद अब इन चार दोषियों को फांसी पर लटकाया जाएगा।
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