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मां दरिंदों को ऐसी सजा दिलाना कि... निर्भया की मां ने बताया मरते वक्त बेटी ने लिया था यह वादा
नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने गुरुवार को चौथी बार डेथ वारंट जारी करते हुए 20 मार्च की तारीख तय की है। जिसके बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि चारों दोषियों को फांसी दे दी जाएगी। डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया की मां ने कहा कि 20 मार्च को हमारी जिंदगी की सुबह होगी। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक चारों फांसी पर नहीं लटका दिए जाते। पूरी उम्मीद है कि यह अंतिम डेथ वारंट होगा। अगर कोई प्रक्रिया है तो वे उनको मरते हुए देखना चाहती हैं।
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इसके बाद निर्भया की मां ने कहा कि जब निर्भया मर रही थी, तो उसने मुझसे कहा था कि मां यह ध्यान रखना कि दोषियों को ऐसी सजा हो कि इस तरह का अपराध फिर कभी न दोहराया जाए। वहीं, अदालत में सुनवाई ने पहले निर्भया की मां से कहा था कि उन्होंने लंबा इंतजार किया है, लेकिन हार नहीं मानी। अभी भी उनमें लड़ाई लडने की क्षमता है।
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'दोषियों के पास अभी 14 दिन का वक्त': राष्ट्रपति ने निर्भया के दोषी पवन की दया याचिका को 4 मार्च को खारिज कर दी है। जिसके बाद से निर्भया के दरिंदों की मौत का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन नियम के मुताबिक, पवन को दया याचिका खारिज होने से लेकर 14 दिन का वक्त दिया जाएगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट 14 दिन बाद फांसी की तारीख तय कर सकती है।
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तीन बार टल चुकी है फांसीः पटियाला कोर्ट ने 7 जनवरी को पहला डेथ वारंट जारी किया था, जिसमें दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी दिया जाना था। लेकिन दोषियों के कानूनी दांव पेंच के चलते यह फांसी टल गई। फिर 17 जनवरी को जारी किया, इसके मुताबिक- 1 फरवरी को फांसी होनी थी। हालांकि, कानूनी दांव पेंच के चलते यह भी टल गया। इसके बाद कोर्ट ने तीसरी बार डेथ वॉरंट जारी कर 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी की तारीख तय की थी। लेकिन दोषी पवन ने 2 मार्च को दया याचिका लगा दी। इस वजह से कोर्ट ने डेथ वॉरंट को रद्द कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट में 23 मार्च को सुनवाईः दोषियों को अलग अलग फांसी देने की मांग वाली केंद्र सरकार की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सरकार का कहना है कि जिनके कानूनी विकल्प खत्म हो गए, उन्हें फांसी देनी चाहिए। अब इस मामले में 23 मार्च को सुनवाई होगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया है कि इस सुनवाई का निचली अदालत के डेथ वारंट पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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नहीं बचा है अब कोई विकल्पः निर्भया के चारों दोषी अब तक कानूनी विकल्पों के सहारे फांसी से बचते आ रहे हैं। पवन की दया याचिका खारिज होने के बाद चारों दोषियों के पास मौत से बचने के लिए अब कोई विकल्प नहीं नहीं, चारों दोषियों के क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका के विकल्प खत्म हो चुके हैं। हालांकि कहा जा रहा कि तीनों दोषियों की तरह पवन भी दया याचिका खारिज होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख कर सकता है।
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16 दिसंबर 2012 की वह काली रातः 16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने दरिंदगी की थी। साथ ही निर्भया के साथ बस में मौजूद दोस्त के साथ भी मारपीट की गई थी।दोनों को चलती बस से फेंक कर दोषी फरार हो गए थे। इसके बाद निर्भया का दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला था। जहां से उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। 29 दिसंबर को निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
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