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पुलिस ने पीटा, उनको बचाने के लिए मेरे साथ... फांसी से बचने के लिए निर्भया के दोषी पवन ने खेला दांव
नई दिल्ली. निर्भया के दरिंदे चौथी बार भी फांसी से बचने के लिए लगातार दांव चल रहे हैं। इसी क्रम में चारों दोषियों में से एक दोषी पवन ने जेल में तैनात पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवन गुप्ता ने पुलिस पिटाई करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि चारों दोषियों को 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी है।
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'सुरक्षा कर्मियों को बचाने के लिए की जा रही जल्दबाजी': पवन ने कड़कड़ाडूमा कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। वह फिलहाल मंडोली जेल में बंद है और उसने आरोप लगाए हैं कि जेल के पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की है। उसने याचिका में यह दावा किया है कि अपने सुरक्षाकर्मियों को बचाने के लिए जेल प्रशासन फांसी में जल्दबाजी कर रहा है। पवन की याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होनी है। (फाइल फोटोः निर्भया के चारों दोषी)
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विनय की मांग, आजीवन कारावास देंः दोषी कोर्ट द्वारा डेथ वारंट जारी होने के बाद लगातार मौत से बचने के लिए हर जोर आजमाइश कर रहे हैं। इसी क्रम में दोषी विनय शर्मा ने अपने वकील एपी सिंह के माध्यम से दिल्ली के उपराज्यपाल से मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है। वकील एपी सिंह ने सीआरपीसी की धारा 432, 433 के तहत मौत की सजा को निलंबित करने के लिए याचिका दायर की है। (फाइल फोटोः निर्भया का दोषी)
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16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाईः सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को दोषी मुकेश की याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई करने का निर्णय लिया। मुकेश ने शुक्रवार को अपने वर्तमान वकील एमएल शर्मा के जरिये अपनी पुरानी वकील वृंदा ग्रोवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। याचिका में वृंदा पर दिल्ली पुलिस के साथ मिली भगत कर मुकेश के खिलाफ साजिश करने और जानबूझकर उसकी क्यूरेटिव पिटीशन जल्दी दाखिल करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही वृंदा के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मुकेश को उसके कानूनी विकल्प दोबारा इस्तेमाल करने का मौका दिए जाने की गुहार लगाई गई है। (फाइल फोटोः कोर्ट के बाहर खड़ी निर्भया की मां आशा देवी)
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दिल्ली सरकार के सिफारिश को भी दी जाएगी चुनौतीः निर्भया के दोषी विनय, अक्षय और पवन के वकील एपी सिंह ने एक वेबसाइट को बताया कि विनय की ओर से अर्जी दाखिल की जाएगी, जिसमें उसकी दया याचिका खारिज करने के दिल्ली सरकार की सिफारिश को चुनौती दी जाएगी। सिंह ने बताया कि विनय ने जब दया याचिका दायर की गई थी तब दिल्ली में चुनाव चल रहा था और आचार संहिता लागू थी इस दौरान कैसे दिल्ली के मंत्री ने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की ये सवाल अदालत के सामने उठाया जाएगा। (फोटोः दोषियों की प्रोफाइल)
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नहीं बचा है कोई कानूनी विकल्पः निर्भया के दोषियों के फांसी से बचने के लिए सारे कानून विकल्प खत्म हो गए है। हालांकि दोषी बचने के लिए कोई न कोई तरकीब खोज ही ले रहे हैं। लेकिन चारों दोषियों को मिलने वाले कानूनी विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो गए हैं। अभी तक दोषी इन्हीं विकल्पों के कारण बचते आए है।
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तीन बार मौत से बच चुके हैं दरिंदेः निर्भया के दोषी 3 बार मौत से बच चुके है। कोर्ट ने इससे पहले 3 बार डेथ वारंट जारी किया और दरिंदों के दलील के कारण तीनों बार फांसी पर रोक लगानी पड़ी। दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने 7 जनवरी को पहली बार दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वारंट जारी किया, जिसमें दोषियों को 21 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाए जाने का आदेश दिया गया। लेकिन दोषियों ने कानूनी दांव पेंच का प्रयोग करते हुए 14 जनवरी को इस आदेश पर रोक लगवा दिया। (फाइल फोटोः दोषियों की फांसी टलने पर नाराज निर्भया की मां)
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दूसरी बार जारी हुआ डेथ वारंटः पहली बार फांसी की तारीख टलने के बाद दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दूसरी बार डेथ वारंट जारी करते हुए 17 जनवरी को आदेश दिया कि दोषियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। लेकिन दोषियों ने फिर पैंतरेबाजी करते हुए 31 जनवरी को फांसी को टलवाने में सफल हुए। जिसके बाद कोर्ट 17 फरवरी को आदेश देते हुए 3 मार्च को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया। लेकिन दोषी तीसरी बार भी फांसी से बचने में सफल हुए। (फाइल फोटोः निर्भया की मां)
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कौन हैं निर्भया के चारों दोषी?निर्भया (Nirbhaya) के पहले दोषी का नाम अक्षय ठाकुर है। यह बिहार का रहने वाला है। इसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और दिल्ली चला आया। शादी के बाद ही 2011 में दिल्ली आया था। यहां वह राम सिंह से मिला। घर पर इस पत्नी और एक बच्चा है। दूसरे दोषी को नाम मुकेश सिंह है। यह बस क्लीनर का काम करता था। जिस रात गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह बस में ही सवार था। (फाइल फोटोः निर्भया के चारों दोषी)
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गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था। तीसरा दोषी पवन गुप्ता है। पवन दिल्ली में फल बेंचने का काम करता था। वारदात वाली रात वह बस में मौजूद था। पवन जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। चौथा दोषी विनय शर्मा है। विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। वारदात वाली रात विनय बस चला रहा था। इसने पिछले साल जेल के अंदर आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन बच गया। (फाइल फोटोः निर्भया का दोषी)
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क्या हुआ था 16 दिसंबर 2012 को?दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। (फाइल फोटोः निर्भया से इसी बस में दरिंदगी की गई थी।)
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दरिंदों ने निर्भया से दरिंदगी तो की ही इसके साथ ही उसके दोस्त को भी बेरहमी से पीटा। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई। (फाइल फोटोः निर्भया की मौत के बात श्रद्धांजलि देती हुई मां)
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कुछ इस तरह हुई थी दरिंदगीः निर्भया से दरिंदगी करने वाले आरोपियों ने चेहरे पर दांत से काटा था। छाती और गले पर नाखून से काटने के निशान मिले थे। इतना ही नहीं पेट पर नुकीले हथियार से गंभीर चोट लगा हुआ था। वहीं, इलाज कर रहे डॉक्टरों को प्राइवेट पार्ट्स पर तेज चोट के निशान लोहे की रॉड शरीर के अंदर डाले जाने के जख्म मिले थे। जिसके कारण बच्चेदानी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ था। वहीं, रॉड की वजह से छोटी आंत पूरी तरह से बाहर आ गई थी। जबकि बड़ी आंत का भी काफी हिस्सा प्रभावित हुआ था। (फाइल फोटोः निर्भया के चारों दोषी, जिन्होंने दरिंदगी की थी, इसमें दो लोग और शामिल थे जिसमें एक ने फांसी लगा ली जबकि दूसरा नाबालिग होने के कारण जेल से छूट चुका है।)
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