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निर्भया के घर 7 साल से नहीं मना त्योहार, बाबा ने छोड़ा गांव...पिता बोले, फांसी होने के बाद लौटेगी खुशियां
नई दिल्ली. पूरा देश निर्भया के दरिंदों को फांसी पर लटकते हुए देखना चाहता है। कोर्ट द्वारा जारी किए गए चौथे डेथ वारंट के मुताबिक चारों दोषियों को 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी है। माना जा रहा कि दोषियों के लिए यह अंतिम डेथ वारंट है, क्योंकि इससे पहले तीन बार डेथ वारंट जारी किया जा चुका है। लेकिन हर बार दरिंदे फांसी से बच गए हैं। इन सब के बीच खबर सामने आई है कि निर्भया की मौत के बाद से परिवार कोई त्योहार नहीं मनाता है।
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परिवार का कहना है कि बेटी के साथ दरिंदगी करने वाले हैवानों को जब तक मौत नहीं मिल जाती तब तक कोई त्योहार नहीं मनाएंगे। एक वेबसाइट को दिए गए फोनिक इंटरव्यू में निर्भया के पिता ने बताया कि 20 मार्च को दरिंदों को फांसी दिए जाने के बाद ही उनका परिवार होली और अन्य त्यौहार मनाएगा।
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निर्भया के पिता का कहना है कि पूरा विश्वास है कि 20 मार्च को दरिंदे फांसी पर लटक जाएंगे। इसके बाद परिवार में होली और दीपावली मनाई जाएगी। निर्भया के बाबा ने कहा कि उनके घर पर होली हर साल फीकी रहती है। इस साल लगा था कि घर पर होली मनेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे खुद घर छोड़ चुके हैं और होली के बाद आएंगे। पूरा यकीन है कि चारों दरिंदों को 20 मार्च को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। इसके बाद वे होली मनाएंगे।
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मुकेश की याचिका पर सुनवाई 16 कोः सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को दोषी मुकेश की याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई करने का निर्णय लिया। मुकेश ने शुक्रवार को अपने वर्तमान वकील एमएल शर्मा के जरिये अपनी पुरानी वकील वृंदा ग्रोवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। याचिका में वृंदा पर दिल्ली पुलिस के साथ मिली भगत कर मुकेश के खिलाफ साजिश करने और जानबूझकर उसकी क्यूरेटिव पिटीशन जल्दी दाखिल करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही वृंदा के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मुकेश को उसके कानूनी विकल्प दोबारा इस्तेमाल करने का मौका दिए जाने की गुहार लगाई गई है।
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तीन बार मौत से बच चुके हैं दरिंदेः निर्भया के दोषी 3 बार मौत से बच चुके है। कोर्ट ने इससे पहले 3 बार डेथ वारंट जारी किया और दरिंदों के दलील के कारण तीनों बार फांसी पर रोक लगानी पड़ी। दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने 7 जनवरी को पहली बार दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वारंट जारी किया, जिसमें दोषियों को 21 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाए जाने का आदेश दिया गया। लेकिन दोषियों ने कानूनी दांव पेंच का प्रयोग करते हुए 14 जनवरी को इस आदेश पर रोक लगवा दिया।
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नहीं बचा है कोई कानूनी विकल्पः निर्भया के दोषियों के फांसी से बचने के लिए सारे कानून विकल्प खत्म हो गए है। हालांकि दोषी बचने के लिए कोई न कोई तरकीब खोज ही ले रहे हैं। लेकिन चारों दोषियों को मिलने वाले कानूनी विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो गए हैं। अभी तक दोषी इन्हीं विकल्पों के कारण बचते आए है।
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दूसरी बार जारी हुआ डेथ वारंटः पहली बार फांसी की तारीख टलने के बाद दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दूसरी बार डेथ वारंट जारी करते हुए 17 जनवरी को आदेश दिया कि दोषियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी। लेकिन दोषियों ने फिर पैंतरेबाजी करते हुए 31 जनवरी को फांसी को टलवाने में सफल हुए। जिसके बाद कोर्ट 17 फरवरी को आदेश देते हुए 3 मार्च को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया। लेकिन दोषी तीसरी बार भी फांसी से बचने में सफल हुए।
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कोर्ट ने पूछा, कहां है दया याचिकाः वकील एपी सिंह ने कहा कि अक्षय की पहली दया याचिका तथ्यों को आभाव में खारिज हो गई थी। इसलिए दूसरी दया याचिका लगाई गई। उसे तिहाड़ जेल प्रशासन ने रिसिव भी किया। लेकिन उसे अब तक आगे नहीं भेजा गया है। कोर्ट ने इसपर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब भी मांगा है कि आखिर वह दया याचिका कहां पर है?
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16 दिसंबर 2012 की वह काली रातः दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं।
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दरिंदों ने निर्भया से दरिंदगी तो की ही इसके साथ ही उसके दोस्त को भी बेरहमी से पीटा। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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