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ना विदेश हथियार ना देसी कट्टे, दिल्ली हिंसा भड़काने में इस्तेमाल हुई ये खतरनाक चीजें

First Published Feb 28, 2020, 4:25 PM IST
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नई दिल्ली: दिल्ली में दो गुटों के बीच हुई हिंसा ने 42 जानें ले ली। अब भले ही दिल्ली का माहौल शांत हो गया है लेकिन इसके बाद जो माहौल सामने देखने को मिल रहा है, वो खौफनाक है। दिल्ली हिंसा में बाहर से ना तो कोई हथियार सप्लाई किया गया ना ही कहीं से कोई जखीरा बरामद किया गया। इस हिंसा को भड़काने में जिन हथियारों का इस्तेमाल किया गया, उसे देख आप भी हैरान रह जाएंगे।  

22 फरवरी से 26 फरवरी तक दिल्ली जलती रही। इस दौरान 42 लोगों की जान गई तो करीब ढाई सौ से अधिक लोग घायल हो गए।

22 फरवरी से 26 फरवरी तक दिल्ली जलती रही। इस दौरान 42 लोगों की जान गई तो करीब ढाई सौ से अधिक लोग घायल हो गए।

जब हिंसा थमी तो सड़कों पर दिखी सिर्फ जली गाड़िया और जली दुकानें।

जब हिंसा थमी तो सड़कों पर दिखी सिर्फ जली गाड़िया और जली दुकानें।

हिंसाग्रस्त इलाकों की तस्वीरें सामने आने के बाद अब सभी हैरान हैं। इस हिंसा में बाहर से ना तो किसी हथियार की सप्लाई की गई ना ही किसी तरह का बंदूक इस्तेमाल किया गया।

हिंसाग्रस्त इलाकों की तस्वीरें सामने आने के बाद अब सभी हैरान हैं। इस हिंसा में बाहर से ना तो किसी हथियार की सप्लाई की गई ना ही किसी तरह का बंदूक इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली हिंसा भड़काने में जिस हथियार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया, वो है गुलेल। जी हां, दिल्ली में कई घरों से गुलेल मिली है।

दिल्ली हिंसा भड़काने में जिस हथियार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया, वो है गुलेल। जी हां, दिल्ली में कई घरों से गुलेल मिली है।

इस गुलेल के जरिये दंगाई छिपकर दूर तक निशाना लगा लोगों को मार रहे थे।

इस गुलेल के जरिये दंगाई छिपकर दूर तक निशाना लगा लोगों को मार रहे थे।

हिंसा में दूसरा हथियार जिसे जमकर इस्तेमाल किया गया, वो रहा पत्थर। बड़े-बड़े पत्थरों के जरिये लोगों को मारा गया।

हिंसा में दूसरा हथियार जिसे जमकर इस्तेमाल किया गया, वो रहा पत्थर। बड़े-बड़े पत्थरों के जरिये लोगों को मारा गया।

पेट्रोल की बोतलों को बम बनाकर भी इस्तेमाल किया गया। इन बोतलों को गुलेल में फंसा कर दूर तक आग लगाई गई।

पेट्रोल की बोतलों को बम बनाकर भी इस्तेमाल किया गया। इन बोतलों को गुलेल में फंसा कर दूर तक आग लगाई गई।

इस्तेमाल हुए गुलेल चमड़े से बने थे। जिसे लोगे की सलाखों के साथ बांधा गया था। गुलेल में बड़े-बड़े पत्थर भी बांधकर फेंके जा रहे थे।

इस्तेमाल हुए गुलेल चमड़े से बने थे। जिसे लोगे की सलाखों के साथ बांधा गया था। गुलेल में बड़े-बड़े पत्थर भी बांधकर फेंके जा रहे थे।

इतना ही नहीं, कई जगहों से प्लास्टिक की छोटी-छोटी थैलियां भी मिली हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि इनमें तेजाब भरा है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।

इतना ही नहीं, कई जगहों से प्लास्टिक की छोटी-छोटी थैलियां भी मिली हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि इनमें तेजाब भरा है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।

पूरी दिल्ली को इन छोटी-छोटी चीजों से ही उपद्रवियों ने तबाह कर दिया।

पूरी दिल्ली को इन छोटी-छोटी चीजों से ही उपद्रवियों ने तबाह कर दिया।

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