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किसी के पिता फल बेंचते हैं तो किसी की मां को दिखाई नहीं देता...ऐसा है 6 दोषियों का परिवार
नई दिल्ली. निर्भया केस के चार दोषी पवन, विनय, अक्षय और मुकेश को फांसी के फंदे पर टांग दिया गया है। 15 मिनट तक उनकी बॉडी फंदे से लटकती रही, फिर डॉक्टर ने उनकी नब्ज चेक की। कुछ देर बाद डॉक्टर ने चारों को मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर तिहाड़ जेल से बाहर आई, वहां मौजूद लोगों ने निर्भया की मां सहित न्यायपालिका को धन्यवाद दिया। निर्भया केस में कुल 6 आरोपी थे। मुख्य आरोपी राम सिंह की तिहाड़ जेल में साल 2013 में मौत हो गई थी। एक दोषी नाबालिग था, जिसे 3 साल बाद रिहा कर दिया गया।
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फांसी से एक दिन पहले 6 याचिकाएं रद्द : फांसी से एक दिन पहले दोषियों की एक के बाद एक 6 याचिकाएं खारिज हुईं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर की दूसरी दया याचिका को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति की ओर से दूसरी दया याचिका ठुकराने पर अक्षय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। मुकेश, सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। मुकेश ने दावा किया था कि गैंगरेप के वक्त वह दिल्ली में ही नहीं था। पवन, सुप्रीम कोर्ट में ही दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो गई। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 3 दोषियों की फांसी पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। चारों दोषी पटियाला हाउस कोर्ट की रद्द की गई याचिका के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी।
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निर्भया का मुख्य दोषी राम सिंह था। मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में राम सिंह की लाश मिली थी। पुलिस के मुताबिक राम सिंह ने खुद को फांसी लगाई थी, लेकिन बचाव पक्ष के वकीलों और राम सिंह के परिवार का आरोप था कि राम सिंह की हत्या की गई थी। राम सिंह बस ड्राइवर था। दक्षिण दिल्ली के रविदास झुग्गी में रहने वाला राम सिंह वारदात से 20 साल पहले राजस्थान से दिल्ली आया था। निर्भया केस में सबसे पहले राम सिंह को ही गिरफ्तार किया गया था।
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निर्भया से गैंगरेप का दोषी मुकेश बस क्लीनर का काम करता था। जिस रात गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह बस में ही सवार था। गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था।
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पवन दिल्ली में फल बेंचने का काम करता था। वारदात वाली रात वह बस में मौजूद था। पवन जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा था।
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निर्भया का दोषी विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। वारदात वाली रात विनय बस चला रहा था। इसने पिछले साल जेल के अंदर आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन बच गया।
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निर्भया को 6वां दोषी नाबालिग था। वारदात के वक्त वह 17 साल का था। नाबालिग दोषी उत्तर प्रदेश के एक गांव का रहना वाला है। वह 11 साल की उम्र में दिल्ली आया था। इस केस में इसपर बतौर नाबालिग मुकदमा चलाया गया। 31 अगस्त 2013 को नाबलिग को बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया और उसे सुधार गृह में तीन साल के लिए भेज दिया गया। इसके बाद उसे फ्री कर दिया गया।
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यह बिहार का रहने वाला था। इसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और दिल्ली चला आया। शादी के बाद ही 2011 में दिल्ली आया था। यहां वह राम सिंह से मिला। घर पर इस पत्नी और एक बच्चा है।
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