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कौन है निर्भया का मुख्य दोषी राम सिंह, जिसकी मौत की आड़ में दोषी की मां ने फांसी टालने की कोशिश की
नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को फांसी से बचाने के लिए किसी की मां तो किसी की पत्नी ने मोर्चा संभाल लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मंगलवार को मुकेश की मां की उस अर्जी को ठुकरा दिया, जिसमें कहा था कि मुकेश के भाई और केस के मुख्य आरोपी राम सिंह की मौत की जांच सही तरीके से नहीं हुई। अर्जी में कहा गया था कि जांच के लिए मुकेश के जिंदा रहने की जरूरत है। इसलिए उसे फांसी न दी जाए। दोषी अक्षय की पत्नी ने परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी लगा दी है। बिहार में लगाई गई इस अर्जी पर 19 मार्च को सुनवाई होगी। दोषियों के परिवार को उम्मीद है कि कोई भी याचिका पर सुनवाई पेंडिंग रहेगी तो शायद दोषियों को फांसी की तारीख रद्द हो जाए। चार दोषियों को 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी होनी है। लेकिन क्या आपको पता है कि निर्भया केस का मुख्य दोषी राम सिंह कौन था? उसकी मौत कैसे हुई?
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निर्भया का मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ में ही आत्महत्या कर ली थी। राम सिंह का शव 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल के सेल में फंदे से लटका मिला था।
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11 मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में राम सिंह की लाश मिली थी। जेल प्रशासन के मुताबिक राम सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राम सिंह का परिवार 20 साल पहले राजस्थान से दिल्ली आया था। यह पांच भाईयों में तीसरे नंबर पर था। यह पढ़ने के लिए स्कूल तो गया, लेकिन शुरुआत स्तर पर भी पढ़ाई छोड़ दी। निर्भया गैंगरेप में सबसे पहले राम सिंह को ही गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक राम सिंह को घटना के 18 घंटे के अंदर ही पकड़ लिया गया था।
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बस ड्राइवर राम सिंह दक्षिण दिल्ली के रविदास झुग्गी झोपड़ी कॉलोनी में रहने वाला था। निर्भया से गैंगरेप के दौरान राम सिंह ही बस चला रहा था। पड़ोसियों के मुताबिक, राम सिंह को शराब की लत थी। उसके लिए झगड़ा करना आम बात थी। उसने ही सबसे पहले निर्भया के साथ रेप किया था।
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राम सिंह ही वो आरोपी था जिसने अदालत में कहा था कि उसने बहुत बड़ा गुनाह किया है। उसे फांसी दे दी जाए।
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जब राम सिंह को तिहाड़ जेल लाया गया था तो कैदियों ने उसे बुरी तरह से पीटा था। इसके बाद उसे अलग सेल में रखा गया। राम सिंह की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया था कि राम सिंह की जेल में हत्या की गई है।
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राम सिंह का बर्ताव बेहद अकड़ भरा था। वह बहुत जिद्दी, चिड़चिड़ा और गुस्सैल था। उसे दोस्त मेंटल कह कर बुलाते थे।
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राम सिंह का एक हाथ खराब था और दूसरे में लोहे की रॉड पड़ी थी। इसके बाद भी उसे बस चलाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी।
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जेल अधिकारियों के मुताबिक, राम सिंह ने जेल की ओर से मिली दरी, कंबल और अपने कपड़ों से रस्सी बनाई और पाजामे के नाड़े से फांसी का फंदा बना लिया। वह तिहाड़ की जेल नंबर 3 में बंद था।
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