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चिड़चिड़ा, झगड़ालू था निर्भया का मुख्य दोषी, कोर्ट में कहा था कोई पछतावा नहीं, फिर लगा ली थी फांसी
नई दिल्ली. निर्भया के दोषी अब मौत के करीब पहुंच गए हैं। हाईकोर्ट ने निर्भया के दोषियों को एकसाथ फांसी देने की बात कहते हुए कानूनी अधिकारों के प्रयोग के लिए 7 दिन की मोहलत दी है। जिसके बाद यह तय हो गया है कि दोषियों की मौत का कोई तारीख तय होगी और उन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा। निर्भया से दरिंदगी 6 दोषियों ने की थी। जिसमें 4 दोषियों को मौत दी जानी है। वहीं, एक दोषी नाबालिग होने के कारण दो साल तक बाल सुधार गृह में रखे जाने के बाद से आजाद हो गया है। खास बात यह है कि वही आरोपी यानी रामसिंह जो इस पूरे घटना का मास्टर माइंड था यानी मुख्य आरोपी। जिसने कोर्ट द्वारा सजा मिलने के बाद खुद को मौत के हवाले कर दिया था। जानिए निर्भया के साथ बर्बरता का मुख्य आरोपी राम सिंह कौन था और उसकी मौत को लेकर समय-समय पर क्यों सवाल उठते रहते हैं?
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मार्च 2013 में की आत्महत्याः निर्भया केस की जब जांच शुरू हुई थी तो राम सिंह को इस मामले में मुख्य आरोपी बताया गया था। हालांकि मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में राम सिंह की लाश मिली थी। पुलिस का कहना था कि राम सिंह ने खुद ही तिहाड़ में फांसी लगाई थी, लेकिन राम सिंह का परिवार हमेशा आरोप लगाता रहा कि उसकी हत्या की गई थी। (फाइल फोटो- निर्भया का मुख्य दोषी राम सिंह)
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निर्भया गैंगरेप में सबसे पहले राम सिंह को ही गिरफ्तार किया गया था। राम सिंह ने अपने 16 दिसंबर की वारदात के बाद एक साक्षात्कार में डॉक्युमेंट्री बनाने वाली महिला से कहा था कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उसने उस घटना के लिए 23 वर्षीय पीड़िता निर्भया को ही दोषी ठहराया था।
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राम सिंह पेशे से बस ड्राइवर था और वारदात वाली रात उस बस को वही चला रहा था, जिसमें निर्भया से दुष्कर्म हुआ था। बस ड्राइवर राम सिंह का घर दक्षिण दिल्ली के रविदास कैंप में था। राम सिंह के स्वभाव के बारे में बताते हुए उसके पड़ोसियों ने एक बार बताया था कि शराब पीना और झगड़ा करना राम सिंह के लिए आम बात थी।
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राम सिंह का परिवार लगभग 20 साल पहले राजस्थान से दिल्ली आया था। पांच भाइयों के परिवार में राम सिंह तीसरे नंबर पर था। स्कूल में दाखिला कराने के बावजूद उसने शुरुआती दौर में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।
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तिहाड़ जेल के पूर्व विधि अधिकारी सुनील गुप्ता ने अपनी पुस्तक 'ब्लैक वारंट' में लिखा है कि राम सिंह के पोस्टमार्टम रिपोर्ट को उन्होंने ध्यान से देखा था। उस रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि राम सिंह के शरीर में अल्कोहल के अंश पाए गए थे। आखिर राम सिंह के शरीर में अल्कोहल का अंश कहां से आया? इस बात की पूरी संभावना है कि राम सिंह को शराब किसी ने पिलाई होगी। उन्होंने ये भी सवाल उठाए थे कि एक छोटे से सेल में जिसमें राम सिंह के अलावा भी अन्य कैदी हों, कोई भला कैसे खुदकशी कर सकता है? हालांकि जेल प्रशासन ने इसे राम सिंह द्वारा आत्महत्या करार दिया था। (फाइल फोटो- निर्भया केस का नाबालिग आरोपी)
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जेल अधिकारियों के मुताबिक, राम सिंह ने जेल की ओर से मिली दरी, कंबल और अपने कपड़ों से रस्सी बनाई और पाजामे के नाड़े से फांसी का फंदा बना लिया। वह तिहाड़ की जेल नंबर 3 में बंद था। राम सिंह का एक हाथ खराब था और दूसरे में लोहे की रॉड पड़ी थी। इसके बाद भी उसे बस चलाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। (फाइल फोटो- निर्भया के 4 अन्य दोषी, जिन्हें फांसी दी जानी है)
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तमाम मीडिया रिपोर्टस में यह दावा किया गया कि राम सिंह का बर्ताव बेहद अकड़ भरा था। वह बहुत जिद्दी, चिड़चिड़ा और गुस्सैल था। उसे दोस्त मेंटल कह कर बुलाते थे। जब राम सिंह को तिहाड़ जेल लाया गया था तो कैदियों ने उसे बुरी तरह से पीटा था। इसके बाद उसे अलग सेल में रखा गया। राम सिंह ही वो आरोपी था जिसने दिल्ली के ट्रायल कोर्ट में कहा था कि उसने बहुत बड़ा गुनाह किया है। उसे फांसी दे दी जाए।
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