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गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे पर पढ़ाई के लिए मध्य प्रदेश में क्यों खोला गया अध्ययन केंद्र? ये है बड़ी वजह

First Published Jan 11, 2021, 11:30 AM IST
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ग्वालियर. मध्य प्रदेश में हिंदू महासभा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे पर एक ज्ञान शाला अध्ययन केंद्र खोला है। हिंदू महासभा ने कहा, भारत के विभाजन के विभिन्न पहलुओं के बारे में अध्ययन के लिए और युवाओं को शिक्षित करने के लिए यह ज्ञान शाला खोली गई है। नाथूराम विनायक गोडसे महात्मा गांधी का हत्यारा था, जिसने 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में  महात्मा गांधी की छाती में गोली मार दी थी।


हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने कहा,  महासभा ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया था, जबकि कांग्रेस देश के विभाजन' के लिए जिम्मेदार है।


हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने कहा,  महासभा ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया था, जबकि कांग्रेस देश के विभाजन' के लिए जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा, अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया था। कांग्रेस ने नेहरू और जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश का विभाजन किया। हिंदू महासभा ने इसका विरोध किया। हिंदू महासभा ने ग्वालियर में अपने भवन में गोडसे ज्ञानशाला का उद्घाटन किया।
 

उन्होंने कहा, अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया था। कांग्रेस ने नेहरू और जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश का विभाजन किया। हिंदू महासभा ने इसका विरोध किया। हिंदू महासभा ने ग्वालियर में अपने भवन में गोडसे ज्ञानशाला का उद्घाटन किया।
 

हिंदू महासभा ने कहा, वे हमेशा गोडसे के किए कामों के साथ खड़े हैं। चाहे महात्मा गांधी कितने भी बड़े नेता हो।
 

हिंदू महासभा ने कहा, वे हमेशा गोडसे के किए कामों के साथ खड़े हैं। चाहे महात्मा गांधी कितने भी बड़े नेता हो।
 

हिंदू महासभा ने कहा, गोडसे ने ग्वालियर में प्रशिक्षण लिया और एक पिस्तौल खरीदी। बाद में वह अपनी योजना को अंजाम देने के लिए दिल्ली चला गया। पहले प्रयास में वह सफल नहीं रहा। जब गांधीजी गोडसे से मिले तो बाद में उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प पूरा किया। तब हमने कहा है कि आपने देश का विभाजन किया है और आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। 

हिंदू महासभा ने कहा, गोडसे ने ग्वालियर में प्रशिक्षण लिया और एक पिस्तौल खरीदी। बाद में वह अपनी योजना को अंजाम देने के लिए दिल्ली चला गया। पहले प्रयास में वह सफल नहीं रहा। जब गांधीजी गोडसे से मिले तो बाद में उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का संकल्प पूरा किया। तब हमने कहा है कि आपने देश का विभाजन किया है और आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे। 

उन्होंने कहा, नेता चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, हम गोडसे के किए कामों के साथ खड़े हैं। राष्ट्र के पिता की हत्या के लिए दोषी नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर, 1949 को फांसी की सजा दी गई थी। महासभा ने गोडसे का एक मंदिर भी ग्वालियर में बनवाया था।  
 

उन्होंने कहा, नेता चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, हम गोडसे के किए कामों के साथ खड़े हैं। राष्ट्र के पिता की हत्या के लिए दोषी नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर, 1949 को फांसी की सजा दी गई थी। महासभा ने गोडसे का एक मंदिर भी ग्वालियर में बनवाया था।  
 

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