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लॉकडाउन 4.0: पांच जोन में बंटा देश, राज्य सरकारें खुद करेंगी तय, जानिए क्या है बफर और कंटेनमेंट जोन

First Published May 17, 2020, 8:45 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के 31 मई तक बढ़ा दिया है। कल सोमवार यानी 18 मई से लॉकडाउन का चौथा चरण लागू होगा। इसको लेकर गृहमंत्रालय ने गाइडलाइन भी जारी कर दिया है। गृहमंत्रालय ने इस बार जोनों के निर्धारण का निर्णय राज्य सरकारों के ऊपर सौंप दिया है। इसके साथ ही अब जोनों की संख्या बढ़ाकर 5 कर दी गई है। 
 

गृहमंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक देश को अब 5 जोन में बांटा गया है। इनमें रेड जोन, ग्रीन और ऑरेंज जोन के अलावा बफर जोन और कंटेनमेंट जोन शामिल हैं। इन पांच जोन को लेकर फैसला राज्य सरकारें लेंगी। अभी तक कोरोना वायरस को लेकर देश में सिर्फ तीन जोन बनाए गए थे, जिनमें रेड जोन, ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन शामिल हैं। 

गृहमंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक देश को अब 5 जोन में बांटा गया है। इनमें रेड जोन, ग्रीन और ऑरेंज जोन के अलावा बफर जोन और कंटेनमेंट जोन शामिल हैं। इन पांच जोन को लेकर फैसला राज्य सरकारें लेंगी। अभी तक कोरोना वायरस को लेकर देश में सिर्फ तीन जोन बनाए गए थे, जिनमें रेड जोन, ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन शामिल हैं। 

रेड जोन- वे इलाके जहां कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं या आ रहे हैं, उनके सरकार ने रेड जोन में रखा है। यहां सख्त पाबंदियां लागू हैं और आगे भी रहेंगी। लोगों को घरों में ही रहने होगा, सिर्फ जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल सकते हैं। 10 साल से छोटे और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को घरों से बाहर निकला बंद रहेगा।

रेड जोन- वे इलाके जहां कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं या आ रहे हैं, उनके सरकार ने रेड जोन में रखा है। यहां सख्त पाबंदियां लागू हैं और आगे भी रहेंगी। लोगों को घरों में ही रहने होगा, सिर्फ जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल सकते हैं। 10 साल से छोटे और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को घरों से बाहर निकला बंद रहेगा।

ऑरेंज जोन- ऑरेंज जोन में वे इलाके हैं जहां कोरोना के केस तो सामने आ रहे हैं, लेकिन लगातार सुधार भी हैं। स्थानीय प्रशासन ने यहां कई तरह की छूट दी है। इन इलाकों में प्रशासन द्वारा लॉकडाउन, सील या फिर अन्य एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

ऑरेंज जोन- ऑरेंज जोन में वे इलाके हैं जहां कोरोना के केस तो सामने आ रहे हैं, लेकिन लगातार सुधार भी हैं। स्थानीय प्रशासन ने यहां कई तरह की छूट दी है। इन इलाकों में प्रशासन द्वारा लॉकडाउन, सील या फिर अन्य एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

बफर जोन- बफर जोन वे जिले हैं जो रेड जोन वाले जिले से सटे हैं। सरकार को आशंका है कि इन जिलों पर ढिलाई बरतने पर पड़ोस के जिले के रेड जोन का असर यहां भी हो सकता है। इसलिए ऐसे जिलों को अलग जोन में बांटकर नजर रखी जा रही है, ताकि यहां नए केस आने से बचाया जा सके।

बफर जोन- बफर जोन वे जिले हैं जो रेड जोन वाले जिले से सटे हैं। सरकार को आशंका है कि इन जिलों पर ढिलाई बरतने पर पड़ोस के जिले के रेड जोन का असर यहां भी हो सकता है। इसलिए ऐसे जिलों को अलग जोन में बांटकर नजर रखी जा रही है, ताकि यहां नए केस आने से बचाया जा सके।

कंटेनमेंट जोन-  यह ऐसे इलाके हैं जहां कोरोना संक्रमण केस में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहा है। यानी कभी नए केस कम आ रहे हैं तो कभी बहुत ज्यादा केस आ रहे हैं।

कंटेनमेंट जोन-  यह ऐसे इलाके हैं जहां कोरोना संक्रमण केस में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहा है। यानी कभी नए केस कम आ रहे हैं तो कभी बहुत ज्यादा केस आ रहे हैं।

ग्रीन जोन- ग्रीन जोन वे इलाके हैं जो कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। यहां के लोगों की जिंदगी बाकी जोन की तुलना में बहुत आसाना है। लगभग सभी तरह की सुविधाएं चालू हैं। हालांकि लोगों को बाहर निकलने पर मास्क लगाना और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है।

ग्रीन जोन- ग्रीन जोन वे इलाके हैं जो कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। यहां के लोगों की जिंदगी बाकी जोन की तुलना में बहुत आसाना है। लगभग सभी तरह की सुविधाएं चालू हैं। हालांकि लोगों को बाहर निकलने पर मास्क लगाना और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है।

कंटेनमेंट में सिर्फ जरूरी सेवाओं को मिली छूट
कंटेनमेंट में सिर्फ जरूरी सेवाएं खुली रहेंगी। कंटेनमेंट क्षेत्र से लोग बाहर आ जा नहीं सकेंगे। सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी के लिए छूट दी जाएगी। कंटेनमेंट एरिया में कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग, हाउस टू हाउस सर्वेलांस और अन्य तरीके अपनाए जाएंगे।

कंटेनमेंट में सिर्फ जरूरी सेवाओं को मिली छूट
कंटेनमेंट में सिर्फ जरूरी सेवाएं खुली रहेंगी। कंटेनमेंट क्षेत्र से लोग बाहर आ जा नहीं सकेंगे। सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी के लिए छूट दी जाएगी। कंटेनमेंट एरिया में कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग, हाउस टू हाउस सर्वेलांस और अन्य तरीके अपनाए जाएंगे।

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