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इस महिला ने बदल दी मध्य प्रदेश की राजनीति, सिंधिया को कांग्रेस से अलग कर पहुंचाया मोदी के पास
नई दिल्ली. कांग्रेस का साथ छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज यानी बुधवार भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस में तवज्जो नहीं मिलने के बाद उन्होंने नई शुरूआत करने का निर्णय लिया है। इन सब के बीच जानकारी सामने आ रही है कि बीजेपी में सिंधिया की एंट्री की पटकथा उनके ससुराल पक्ष की ओर से लिखी गई थी। बड़ौदा राजपरिवार की महारानी राजमाता शुभांगिनी देवी गायकवाड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मध्यस्थता कराने में अहम भूमिका निभाई है। जिसके बाद सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन करने का मन बनाया।
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ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने और महाराज कहे जाने वाले सिंधिया का ससुराल गुजरात के बड़ौदा राजघराने में है। ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शनी बड़ौदा के गायकवाड राजघराने से ताल्लुक रखती हैं।
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सिंधिया का अक्सर गुजरात के बड़ौदा आना जाना रहता है। बड़ौदा की महारानी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अत्यधिक सम्मान करते हैं और उनसे उनके संबंध भी अच्छे हैं। जिसकी वजह से यह कहा जा रहा कि सिंधिया को भाजपा के करीब लाने में महारानी ने मध्यस्थता की।
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सूत्रों की माने तो बड़ौदा राजघराने की महारानी राजमाता शुभांगिनी देवी गायकवाड ने सिंधिया और बीजेपी हाईकमान के बीच मध्यस्थता करते हुए भाजपा में शामिल होने का रास्ता तैयार किया। जिसके बाद सिंधिया को भी सारी स्थितियों के बारे में जानकारी दी गई और रणनीतियां तय की गई।
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कांग्रेस में सिंधिया को खास तवज्जो नहीं मिल रही ही थी। बताया जा रहा कि सोनिया गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की बातों को नहीं सुना जबकि राहुल ने भी उन्हें कहा था कि आप (मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री) कमलनाथ के साथ बात कर अपने मतभेदों को सुलझाओ।
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सूत्रों की मानें तो कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी के आगे सिंधिया बेबस नजर आ रहे थे। कमलनाथ ने भी सिंधिया को अनसुना कर दिया था, जिससे वो कांग्रेस से नाराज हो गये थे।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कांग्रेस छोड़ दी और बुधवार को उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। सिंधिया के इस्तीफा देने के बाद ही कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी अपना त्याग पत्र राजभवन को भेज दिया। माना जा रहा है कि सिंधिया को बीजेपी राज्यसभा के जरिए केंद्र में मंत्री बनाने का फैसला कर सकती है।
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सिंधिया की नाराजगी के बीच खबर सामने आई थी कि रविवार को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया सोनिया से मिलना चाहते थे। लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया। जिसके बाद सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने और बीजेपी में जाने का मन बना लिया।
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सूत्रों की माने तो सिंधिया को भाजपा में लाने के लिए पहली कोशिश भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने की थी, जब वह असफल हो गए तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री शाह ने मोर्चा संभाला और बगावत का दूसरा अध्याय शुरू हुआ।
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मंगलवार को पीएम मोदी से सिंधिया की मुलाकात से पहले चर्चा जोरों पर थी कि सिंधिया और पीएम मोदी के बीच सोमवार को ही मुलाकात हो चुकी है। बताया जा रहा कि सिंधिया के ससुराल पक्ष ने मोदी और सिंधिया की मुलाकात कराई थी। जिसके बाद सिंधिया ने भाजपा में शामिल होने के निर्णय लिया था।
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ज्योतिरादित्य की प्रियदर्शनी राजे से 12 दिसंबर 1994 में शादी की थी। प्रियदर्शनी दुनिया की 50 सबसे खूबसूरत महिलाओं में शुमार की जा चुकी हैं। 30 सितंबर 2001 को उत्तर प्रदेश में विमान दुर्घटना में सांसद पिता माधवराव सिंधिया की मृत्यु के बाद 18 दिसंबर को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की सदस्यता ली। जिसके बाद 19 जनवरी 2002 को सिंधिया ने गुना से चुनाव लड़ा और पहली बार में ही सांसद चुने गए।
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