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संसद में गूंजा रश्मि सामंत नस्‍लीय भेदभाव का मामला: एस जयशंकर बोले- हम नस्‍लवाद से आंखें नहीं चुरा सकते

First Published Mar 15, 2021, 4:09 PM IST
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नई दिल्‍ली. ब्रिटेन में रश्मि सामंत के साथ नस्‍लीय भेदभाव का मुद्दा सोमवार को भारतीय संसद में गूंजा। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नस्‍लीय भेदभाव के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। राज्यसभा में एस जयशंकर ने कहा कि महात्‍मा गांधी की जमीन से होने के नाते, हम कभी नस्‍लवाद से आंखें नहीं चुरा सकते। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस मामले में नजर बनाए हुए है और जरूरत होगी तो इसे मजबूती से उठाया जाएगा। 
 

दरअसल, हाल ही में रश्मि सामंत ने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा था। लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी टिप्पणी के लिए उनसे इस्तीफा ले लिया गया था। इस घटना को रश्मि ने रेशियल प्रोफाइलिंग का मुद्दा बताया था। साथ ही उन्होंने ऑक्सफोर्ड प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। 

दरअसल, हाल ही में रश्मि सामंत ने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा था। लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी टिप्पणी के लिए उनसे इस्तीफा ले लिया गया था। इस घटना को रश्मि ने रेशियल प्रोफाइलिंग का मुद्दा बताया था। साथ ही उन्होंने ऑक्सफोर्ड प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। 

एस जयशंकर ने संसद में उठाया मुद्दा
अब इस मुद्दे को एस जयशंकर ने राज्यसभा में उठाया। उन्होंने कहा, महात्‍मा गांधी की जमीन से होने के नाते, हम कभी नस्‍लवाद से आंखें नहीं चुरा सकते। खासतौर से तब जब यह किसी ऐसे देश में हो जहां हमारे लोग इतनी ज्‍यादा संख्‍या में रहते हैं। हमारे यूके के साथ मजबूत रिश्‍ते हैं। जरूरत पड़ने पर हम पूरी स्‍पष्‍टता से ऐसे मुद्दे उठाएंगे।

एस जयशंकर ने संसद में उठाया मुद्दा
अब इस मुद्दे को एस जयशंकर ने राज्यसभा में उठाया। उन्होंने कहा, महात्‍मा गांधी की जमीन से होने के नाते, हम कभी नस्‍लवाद से आंखें नहीं चुरा सकते। खासतौर से तब जब यह किसी ऐसे देश में हो जहां हमारे लोग इतनी ज्‍यादा संख्‍या में रहते हैं। हमारे यूके के साथ मजबूत रिश्‍ते हैं। जरूरत पड़ने पर हम पूरी स्‍पष्‍टता से ऐसे मुद्दे उठाएंगे।

क्या है मामला? 
रश्मि सामंत को अध्यक्ष पद के चुनाव में 3708 वोटों में 1966 वोट मिले थे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी 2017 की पोस्ट को वायरल कर 'नस्‍लभेदी', 'साम्‍य विरोधी' और 'ट्रांसफोबिक' बताया गया। इसके बाद ऑक्‍सफर्ड में कुछ छात्र संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग की। वहीं, इस मामले में सामंत ने एक खुले पत्र में माफी भी मांगी लेकिन जब विवाद नहीं थमा तो उन्‍होंने इस्‍तीफा देने का फैसला किया। वे भारत लौट आईं और उन्होंने अपनी पोस्ट को भी हटा लिया। 

क्या है मामला? 
रश्मि सामंत को अध्यक्ष पद के चुनाव में 3708 वोटों में 1966 वोट मिले थे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी 2017 की पोस्ट को वायरल कर 'नस्‍लभेदी', 'साम्‍य विरोधी' और 'ट्रांसफोबिक' बताया गया। इसके बाद ऑक्‍सफर्ड में कुछ छात्र संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग की। वहीं, इस मामले में सामंत ने एक खुले पत्र में माफी भी मांगी लेकिन जब विवाद नहीं थमा तो उन्‍होंने इस्‍तीफा देने का फैसला किया। वे भारत लौट आईं और उन्होंने अपनी पोस्ट को भी हटा लिया। 

भारत सरकार ने ब्रिटेन को दिया कड़ा संदेश
भारत सरकार ने रश्मि सामंत का मुद्दा उठाकर ब्रिटेन और वहां की संसद को जवाब देना चाहती है। दरअसल, ब्रिटेन की संसद ने पिछले दिनों भारत में चल रहे किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया था। 

भारत सरकार ने ब्रिटेन को दिया कड़ा संदेश
भारत सरकार ने रश्मि सामंत का मुद्दा उठाकर ब्रिटेन और वहां की संसद को जवाब देना चाहती है। दरअसल, ब्रिटेन की संसद ने पिछले दिनों भारत में चल रहे किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया था। 

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