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प्यारी सी बच्ची अपनी मुस्कान कई चेहरों पर बिखेर गई, मरने के बाद भी बचा गई 5 लोगों की जिंदगी

First Published Jan 14, 2021, 5:48 PM IST
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नई दिल्ली. किसी ने सही कहा है कि बच्चे भगवान के रुप होते हैं। क्योंकि उनके आते ही खुशियां आ जाती हैं। ऐसी ही एक दिल को छू देने वाली कहानी देश की राजधानी दिल्ली से सामने आई है, जहां एक 20 महीने की प्यारी सी बच्ची कई चेहरों पर मुस्कान बिखेर गई। वह मरकर भी अपने शरीर के अंगों को डोनेट करके 5 लोगों की जिदंगी सवारते हुए उनको जीवनदान दे गई। इस तरह इतनी कम उम्र में अंग दान कर यह बच्ची देश ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे छोटी ऑर्गन डोनर बन गई है। 


दरअसल, दिल्ली के रोहणी इलाके में रहने वाले अशीष कुमार की 20 महीने की बच्ची धनिष्ठा खेलते वक्त घर की पहली मंजिल से नीचे गिर गई थी। मासूम गिरते ही बेसुध हो गई, माता-पिता ने फौरन उसे सर गंगाराम लेकर गए, जहां उसे अस्पताल भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने दिन रात इलाज करके उसे होश में लाने की कोशिश की, लेकिन उसपर कोई असर नहीं हुआ। (फोटो गेटी)


दरअसल, दिल्ली के रोहणी इलाके में रहने वाले अशीष कुमार की 20 महीने की बच्ची धनिष्ठा खेलते वक्त घर की पहली मंजिल से नीचे गिर गई थी। मासूम गिरते ही बेसुध हो गई, माता-पिता ने फौरन उसे सर गंगाराम लेकर गए, जहां उसे अस्पताल भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने दिन रात इलाज करके उसे होश में लाने की कोशिश की, लेकिन उसपर कोई असर नहीं हुआ। (फोटो गेटी)


धीरे-धीरे धनिष्ठा के सारे अंगों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने 11 जनवरी को मासूम को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद बच्ची के माता पिता अशीष कुमार और बबिता को इस बारे में जानकरी दी गई। इसके बाद पति-पत्नी ने धनिष्ठा के अंग दान करने का फैसला किया। (फोटो गेटी)


धीरे-धीरे धनिष्ठा के सारे अंगों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने 11 जनवरी को मासूम को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद बच्ची के माता पिता अशीष कुमार और बबिता को इस बारे में जानकरी दी गई। इसके बाद पति-पत्नी ने धनिष्ठा के अंग दान करने का फैसला किया। (फोटो गेटी)

पिता और माता ने अंगदान को लेकर अस्पताल के अधिकारियों से बात की। फैसला लेते वक्त पति-पत्नी को दुख तो हुआ है, लेकिन दूसरों की जिंदगी के बार में सोचते हुए मन बना लिया। जिसके बाद मासूम का दिल लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया सर गंगाराम अस्पताल ने निकाल कर पांच रोगियों में प्रत्यारोपित कर दिया। (फोटो गेटी)

पिता और माता ने अंगदान को लेकर अस्पताल के अधिकारियों से बात की। फैसला लेते वक्त पति-पत्नी को दुख तो हुआ है, लेकिन दूसरों की जिंदगी के बार में सोचते हुए मन बना लिया। जिसके बाद मासूम का दिल लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया सर गंगाराम अस्पताल ने निकाल कर पांच रोगियों में प्रत्यारोपित कर दिया। (फोटो गेटी)


बच्ची के पिता आशीष ने दुखी मन से कहा कि सचमुच अपनों को खोने के बाद उनके अंगों को दान करना बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन  हमने अस्पताल में रहते हुए कई ऐसे मरीज़ देखे जिन्हे अंगों की सख्त है। जिन्हें अगर यह अंग मिल जाएं तो उनकी जिंदगी सवर जाएगी। हम नहीं चाहते थे कि जिस तरह हम बेटी को खो चुके हैं कोई ओर अपने बच्चों को खोए। इसलिए हमने दिल पर पत्थर रखकर मरीजों को धनिष्ठा के दिल लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए।
 


बच्ची के पिता आशीष ने दुखी मन से कहा कि सचमुच अपनों को खोने के बाद उनके अंगों को दान करना बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन  हमने अस्पताल में रहते हुए कई ऐसे मरीज़ देखे जिन्हे अंगों की सख्त है। जिन्हें अगर यह अंग मिल जाएं तो उनकी जिंदगी सवर जाएगी। हम नहीं चाहते थे कि जिस तरह हम बेटी को खो चुके हैं कोई ओर अपने बच्चों को खोए। इसलिए हमने दिल पर पत्थर रखकर मरीजों को धनिष्ठा के दिल लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए।
 

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